Gold Outlook: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। ऐसे माहौल में निवेशकों के सामने सवाल है कि क्या अभी सोने में निवेश करना चाहिए या इंतजार करना बेहतर होगा। टाटा म्युचुअल फंड ने अपने ताजा आउटलुक में कहा कि मजबूत बुनियादी कारकों, केंद्रीय बैंकों की बढ़ती खरीद और भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच आने वाले वर्षों में सोना और चांदी मजबूत बने रह सकते हैं। मौजूदा भू-आर्थिक परिस्थितियां कीमती धातुओं के पक्ष में बनी हुई हैं और लंबी अवधि में निवेश पोर्टफोलियो में सोने का महत्व बढ़ सकता है।
मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के बाद सोने की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण इसमें तेजी आई है। मजबूत बुनियादी कारकों और बाजार की अनिश्चितताओं को देखते हुए टाटा म्युचुअल फंड ने सोने में निवेश की सलाह दोहराई हैं। डॉलर में मजबूती या तनाव कम होने से कीमतों में आने वाली किसी भी गिरावट को सोना जमा करने या निवेश का मौका माना जा सकता है।
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फंड हाउस के अनुसार मौजूदा वैश्विक आर्थिक हालात सोने और चांदी की कीमतों को सहारा दे सकते हैं। इसके पीछे कई बुनियादी कारण भी काम कर रहे हैं। ऐसे में अगर कीमतों में गिरावट आती है, तो निवेशक धीरे-धीरे खरीदारी पर विचार कर सकते हैं। टाटा म्युचुअल फंड का मानना है कि लंबी अवधि के लिए पोर्टफोलियो में सोने में निवेश का माहौल अभी भी अनुकूल बना रह सकता है।
टाटा म्युचुअल फंड ने नोट में कहा कि ऐतिहासिक तेजी के बाद कीमतों में सुधार (करैक्शन) आना स्वाभाविक है, लेकिन इससे कीमती धातुओं के लॉन्ग टर्म तेजी के रुझान पर कोई असर नहीं पड़ता। सोने को समर्थन देने वाले मूलभूत कारक अब भी मजबूत बने हुए हैं।
1. दुनिया के कई हिस्सों में देशों के बीच तनाव बना हुआ है। इस वजह से भू-राजनीतिक स्थिति अभी भी अस्थिर बनी हुई है।
2. सोना निवेशकों के लिए एक सुरक्षित विकल्प माना जाता है। इसलिए ग्लोबल निवेश पोर्टफोलियो में इसकी अहम भूमिका बनी हुई है। निवेशक इसे आर्थिक अनिश्चितता के समय सुरक्षा के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
3. बढ़ते राजकोषीय घाटे और डी-डॉलराइजेशन के रुझानों के बीच मुद्रा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम होने से डॉलर में मजबूती के संकेत भी दिख रहे हैं।
4. सप्लाई बाधाओं के कारण बाजार में नए सोने की उपलब्धता सीमित बनी हुई है।
5. दुनिया के कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सिर्फ फिएट मुद्राओं पर निर्भर नहीं रखना चाहते। इसलिए केंद्रीय बैंक अपने भंडार में सोना बढ़ा रहे हैं। इसी वजह से पिछले 10 वर्षों में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद लगभग दोगुनी हो गई है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी में गोल्ड ईटीएफ में 565 मिलियन डॉलर का अच्छा निवेश दर्ज किया गया। हालांकि यह पिछले दो महीनों के ऊंचे स्तर की तुलना में थोड़ा कम रहा। महीने की शुरुआत में कुछ बड़े फंड्स से निकासी (रिडेम्प्शन) देखी गई, जिसकी वजह संभवतः सोने की कीमतों में गिरावट के दौरान निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली करना था। हालांकि जैसे-जैसे महीना आगे बढ़ा, यह निकासी धीरे-धीरे संतुलित हो गई, जिससे यह संकेत मिलता है कि गोल्ड ETF में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है।
टाटा म्युचुअल फंड ने कहा कि इस बढ़ती दिलचस्पी को सेबी द्वारा हाल ही में म्युचुअल फंड स्कीमों के वर्गीकरण ढांचे में किए गए बदलाव से भी समर्थन मिला है। अब इस नए ढांचे के तहत फंड्स को तय सीमाओं के भीतर सोने और चांदी से जुड़े निवेश साधनों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की ज्यादा लचीलापन मिल गया है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, गोल्ड-सिल्वर रेश्यो हाल के वर्षों के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंचने के बाद अच्छी रिकवरी दिखा रहा है। यह रेश्यो बढ़कर 56 तक पहुंच गया है, जो चांदी के मुकाबले सोने के बेहतर प्रदर्शन का संकेत देता है। मौजूदा स्तरों से यह रेश्यो फिर से औसत स्तर (mean reversion) की ओर बढ़ते हुए 70–72 के दायरे तक जा सकता है। इसकी मुख्य वजह भू-राजनीतिक और व्यापारिक तनाव के बीच सोने की मांग में बढ़ोतरी मानी जा रही है।
जब भू-राजनीतिक तनाव या वित्तीय अनिश्चितता बढ़ती है, तो सोना आमतौर पर बेहतर प्रदर्शन करता है। इससे गोल्ड-सिल्वर रेश्यो बढ़ जाता है। इसके विपरीत, जब औद्योगिक मांग मजबूत होती है और अर्थव्यवस्था को लेकर आशावाद बढ़ता है, तो चांदी को ज्यादा फायदा मिलता है। ऐसे समय में गोल्ड-सिल्वर रेश्यो कम हो जाता है।