भारत और जर्मनी ने सोमवार को 27 बिंदुओं पर द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने का ऐलान किया। इनमें प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) व्यापार समझौते के संदर्भ में व्यापार बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने के साथ रक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य कर्मियों की आवाजाही, सेमीकंडक्टर, आपूर्ति श्रृंखला, प्रौद्योगिकी और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में संबंधों को मजबूत करने के लिए 19 समझौते और आठ घोषणाएं शामिल हैं।
दो दिवसीय भारत यात्रा पर आए जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने अहमदाबाद में सोमवार की सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत में कहा कि भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए उनके देश का पूरा समर्थन है। मैर्त्स ने ईयू और भारत के बीच व्यापार वार्ता को तत्काल अंजाम तक पहुंचाने की भी गुजारिश की, ताकि कई साल से अटकी आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने में मदद मिल सके।
मुक्त व्यापार समझौते पर यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा की भारत यात्रा के दौरान 27 जनवरी को हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है। ये दोनों इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि भी होंगे।
प्रधानमंत्री मोदी के साथ चर्चा और बाद में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में मैर्त्स ने कहा कि विश्व व्यवस्था में अस्थिरता के इस दौर में भारत और जर्मनी के संबंधों को नए स्तर पर ले जाना बेहद महत्त्वपूर्ण होगा।
उन्होंने इस अस्थिरता का मुकाबला करने के लिए भारत के साथ आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को बढ़ावा देने के जर्मनी के रणनीतिक दृष्टिकोण को भी सामने रखा। मैर्त्स ने कहा, ‘माहौल बेहद चुनौतीपूर्ण है। हमें इससे निपटने के लिए हाथ मिलाना होगा।’ उन्होंने कहा कि रूस पर निर्भरता कम करने के लिए जर्मनी भारत के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाना चाहता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि न केवल भारत बल्कि एशिया की पहली यात्रा पर आए जर्मन चांसलर ने भारत के साथ संबंधों को काफी महत्त्व दिया है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देशों ने पिछले साल ही रणनीतिक साझेदारी के 25 साल पूरे किए हैं।
इसके अलावा, सीईओ फोरम को संबोधित करते हुए मैर्त्स ने यह भी कहा कि यह संयोग नहीं है कि जर्मन चांसलर के रूप में आठ महीने पहले पदभार संभालने के बाद उन्होंने अपनी पहली एशिया यात्रा के लिए भारत को चुना। प्रधानमंत्री मोदी ने चर्चा के दौरान इस ओर भी ध्यान दिलाया कि भारत-जर्मनी के बीच वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार पिछले कुछ वर्षों में 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ कर 51.23 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। जर्मनी ईयू में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। यह ईयू के साथ भारत के कुल व्यापार का 25 प्रतिशत से अधिक है। जर्मनी की सरकार भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लिए उत्सुक है।
पिछले पांच वर्षों के दौरान जर्मनी में रहने वाले भारतीयों की संख्या दोगुनी होकर 3,00,000 पर पहुंच गई है। इनमें लगभग 60,000 छात्र भी शामिल हैं। दोनों पक्षों ने भारतीय छात्रों और श्रमिकों के मुद्दों को संभालने के लिए जर्मनी द्वारा समर्पित संस्थागत तंत्र स्थापित करने पर चर्चा की है। मोदी ने कहा, ‘प्रवासन, गतिशीलता और कौशल बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। भारत का प्रतिभाशाली युवा कार्यबल जर्मनी की अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहा है।’
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच वैश्विक कौशल साझेदारी पर समझौता विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों की आवाजाही को सुगम बनाएगा। रक्षा संबंधों के बारे में प्रधानमंत्री मोदी ने जर्मन चांसलर को रक्षा व्यापार से संबंधित प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि दोनों देश एक-दूसरे के रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए एक कार्ययोजना पर काम करेंगे। इससे दोनों देशों में विकास और सह-उत्पादन के लिए नए अवसर खुलेंगे।
जर्मनी ने नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, पीएम ई-बस सेवा और सूरत एवं अहमदाबाद में मेट्रो नेटवर्क समेत जलवायु-अनुकूल शहरी ढांचा जैसी प्राथमिकता वाली परियोजनाओं पर द्विपक्षीय हरित और सतत विकास साझेदारी के तहत 1.24 अरब यूरो का निवेश करने का वादा किया है। दोनों नेताओं ने यूक्रेन और गाजा सहित वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की।
जर्मन सरकार की 2030 तक लक्षित कुल 10 अरब यूरो की प्रतिबद्धता में ज्यादातर रियायती ऋण के रूप में होंगी, जनमें लगभग 5 अरब यूरो का निवेश पहले ही किया जा चुका है या 2022 से चल रही परियोजनाओं के लिए आवंटित किया गया है। जर्मनी ने भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए वीजा मुक्त आवाजाही की घोषणा की है। इसके अलावा दोनों पक्ष विदेश नीति और सुरक्षा वार्ता तंत्र स्थापित करने समेत एक हिंद-प्रशांत से जुड़े समझौते पर भी सहमत हुए।
जर्मनी ने ऐलान किया कि वह अहमदाबाद में मानद वाणिज्य दूतावास खोलेगा। भारत और जर्मनी 8 अरब डॉलर के पनडुब्बी निर्माण समझौते पर भी बातचीत कर रहे हैं। मैर्त्स के साथ दो दर्जन व्यापार प्रतिनिधि भी भारत आए हैं। इनमें सीमेंस, डीएचएल समूह, इंफिनियन टेक्नॉलजीज, यूनिपर और एयरबस डिफेंस ऐंड स्पेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शामिल हैं।
दोनों पक्षों ने उच्च शिक्षा पर एक कार्ययोजना पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा कि वे माध्यमिक स्कूलों, विश्वविद्यालयों और व्यावसायिक शिक्षा केंद्रों सहित भारत में जर्मन भाषा की पढ़ाई के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध हैं।
दोनों नेताओं ने साबरमती आश्रम का भी दौरा किया। आश्रम आगंतुक पुस्तिका में अपने संदेश में मैर्त्स ने कहा, ‘महात्मा गांधी का प्रत्येक व्यक्ति की स्वतंत्रता और गरिमा की शक्ति में अटूट विश्वास हमें आज भी प्रेरित करता है। यह विरासत भारतीयों और जर्मन लोगों को एक ऐसी दुनिया में दोस्तों के रूप में एकजुट करती है जिसे शायद गांधी की शिक्षाओं की पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है।’ मैर्त्स मंगलवार को बेंगलूरु में भारतीय विज्ञान संस्थान और जर्मन कंपनी बॉश के परिसर का दौरा करेंगे।