H1B Visa Stamping: अगर आप H-1B या H-4 वीजा पर अमेरिका में काम कर रहे हैं और इमरजेंसी, फैमिली फंक्शन या शादी के लिए भारत आने का प्लान बना रहे हैं, तो एक इमिग्रेशन अटॉर्नी ने चेतावनी दी है कि टिकट बुक करने से पहले दो बार सोच लें।
वीजा अप्लाई करने वालों को भारत में अब बहुत लंबा और अनिश्चित इंतजार करना पड़ रहा है, क्योंकि 15 दिसंबर से सोशल मीडिया की ज्यादा सख्त जांच शुरू हो गई है। इस वजह से कई वर्कर्स और उनके परिवार वाले परेशान हैं कि कब या क्या वो अमेरिका वापस जा पाएंगे।
दिसंबर 2025 में भारत में सैकड़ों वीजा अपॉइंटमेंट कैंसल कर दिए गए और उन्हें मार्च 2026, अप्रैल या उससे भी बाद के लिए शेड्यूल किया गया। अप्रैल में इंटरव्यू वाले कई लोग अब कन्फ्यूज हैं कि ट्रैवल करें या नहीं, क्योंकि फिर से डेफर होने का डर है।
इमिग्रेशन अटॉर्नी राहुल रेड्डी कहते हैं कि जिन H-1B और H-4 वीजा धारकों को नया वीजा स्टैम्पिंग के बिना अमेरिका वापस नहीं जाना चाहिए, उन्हें भारत आने से बचना चाहिए, जब तक बहुत जरूरी न हो।
रेड्डी ने कहा, “वीजा स्टैम्पिंग के लिए ट्रैवल करने वालों को रिस्क नहीं लेना चाहिए, भले ही अप्रैल का अपॉइंटमेंट हो। इन तारीखों के भी डेफर होने की बहुत ज्यादा संभावना है।”
Also Read: मोदी ने ट्रंप को फोन नहीं किया, इसलिए अटक गई भारत-अमेरिका ट्रेड डील
उन्होंने आगे कहा कि जो लोग फिर भी ट्रैवल करने का फैसला करते हैं, उन्हें लंबे समय तक भारत में रहने के लिए तैयार रहना चाहिए।
रेड्डी कहते हैं “लोगों को पता होना चाहिए कि वो भारत में काफी लंबे समय तक रह सकते हैं। कोई नहीं जानता कि कितना टाइम लगेगा या नये नियम कब आ जाएंगे।”
अमेरिकी दूतावास कभी-कभी इमरजेंसी में वीजा अपॉइंटमेंट देते हैं, अगर कोई ‘अप्रत्याशित’ या बहुत जरूरी स्थिति हो और रेगुलर स्लॉट का इंतजार नहीं किया जा सकता। लेकिन अप्रूवल हर केस में अलग-अलग होता है और उपलब्धता पर निर्भर करता है।
रेड्डी ने बताया कि अभी भारत में इमरजेंसी अपॉइंटमेंट लगभग नहीं मिल रहे। “मुझे किसी का ऐसा केस नहीं पता जहां इमरजेंसी अपॉइंटमेंट न मांगा गया हो, लेकिन स्लॉट उपलब्ध नहीं हैं।”
उन्होंने समझाया कि फैमिली इमरजेंसी हमेशा क्वालिफाई नहीं करती। रेड्डी कहते हैं, “इमरजेंसी भारत पहुंचने की है, अमेरिका वापस जाने की नहीं। अमेरिकी सरकार किसी को भारत आने से नहीं रोक रही, इसलिए वीजा ऑफिसर इन मामलों को जल्दी लेने की वजह नहीं देखते।”
रेड्डी ने ये भी चेतावनी दी कि अगर कोई व्यक्ति भारत में फंस जाए और उसकी जॉब चली जाए, तो नई जॉब मिलना बहुत मुश्किल हो जाता है।
उन्होंने कहा, “अगर कोई भारत में रहते हुए जॉब खो देता है, तो नई कंपनी उसे हायर करने की संभावना बहुत कम है। नई कंपनी को फ्रेश पिटीशन फाइल करनी पड़ती है और 1 लाख डॉलर का H-1B फीस भी देना पड़ता है, जो ज्यादातर कंपनियां देने को तैयार नहीं होतीं।”
H-1B और H-4 वीजा धारकों के लिए जो पहले रूटीन ट्रैवल था, वो अब बहुत मुश्किल फैसला बन गया है। 2026 में भी टाइमलाइन अनिश्चित बनी हुई है। ऐसे में सलाह है कि जरूरत के बिना ट्रैवल से बचें और सारे रिस्क को ध्यान में रखकर प्लान बनाएं।