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EV Insurance: ईवी में बाहर का चार्जर लगाएंगे तो बैटरी का बीमा नहीं पाएंगे

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ईवी मालिक को ध्यान रखना चाहिए कि कार या दोपहिया की बैटरी और उससे जुड़ा पूरा सिस्टम बीमा के दायरे में रहकर महफूज बना रहे

Last Updated- March 03, 2026 | 11:53 PM IST
electric vehicles (ev)

भारत की सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रहे हैं। वाहन डीलरों के संगठन फाडा के मुताबिक 2025 में बिकने वाले कुल यात्री वाहनों में करीब 3.95 फीसदी हिस्सेदारी ईवी की ही रही। इस बाजार को हाल ही में और दम मिला, जब देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजूकी ने अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार ई-विटारा उतार दी।

ईवी के लिए जरूरी बीमा

ईवी के लिए भी जरूरी बीमा कवर वे ही हैं, जो पेट्रोल-डीजल और सीएनजी से चलने वाले वाहनों के लिए होते हैं। मोटर यान अधिनियम, 1988 के मुताबिक गाड़ी के मालिक और चालक के लिए व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा जरूरी है और साथ में थर्ड पार्टी बीमा भी होना चाहिए। वाहन खरीदने वालों को ओन-डैमेज बीमा भी खरीद ही लेना चाहिए।

टाटा एआईजी इंश्योरेंस में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (कंज्यूमर अंडरराइटिंग) दिनेश मोसामकर कहते हैं, ‘कानून के मुताबिक संपूर्ण बीमा कवर जरूरी है, जिसमें दुर्घटना, चोरी, आग, प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान और दुर्घटना में घायल व्यक्ति के मुआवजे का प्रावधान हो।’

व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा होगा तो गाड़ी के मालिक की मौत होने या विकलांग होने पर 15 लाख रुपये तक मिल सकते हैं। खरीदार सहयात्री के लिए भी बीमा ले सकते हैं। वे मूल्यह्रास से बचाने के लिए डेप्रिसिएशन शील्ड, कंज्यूमेबल एक्सपेंसेज कवर, रोडसाइड असिस्टेंस और दूसरे ऐड-ऑन बीमा कवर भी खरीद सकते हैं।

ईवी के लिए खास ऐड-ऑन

ईवी मालिक को ध्यान रखना चाहिए कि कार या दोपहिया की बैटरी और उससे जुड़ा पूरा सिस्टम बीमा के दायरे में रहकर महफूज बना रहे। बजाज जनरल इंश्योरेंस में चीफ डिस्ट्रिब्यूशन ऑफिसर (रिटेल बिजनेस) राकेश कौल समझाते हैं, ‘चूंकि ईवी बैटरी के दम पर ही आगे बढ़ते और रफ्तार पाते हैं, इसलिए ट्रैक्शन बैटरी, बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम और ईवी ड्राइव सिस्टम के लिए बीमा सुरक्षा कवर बहुत जरूरी है।’

ईवी खरीदने वालों को बैटरी के मूल्यह्रास की चिंता भी रहनी चाहिए। मोसामकर का कहना है, ‘अक्सर ईवी की कुल कीमत में 50 फीसदी बैटरी की ही कीमत होती है। यह ऐड-ऑन लिया तो दावे के समय बैटरी के डेप्रिसिएशन यानी घटी कीमत से होने वाला खर्च बच जाएगा।’ वह इलेक्ट्रिक सर्ज सिक्योर भी खरीदने की सलाह देते हैं ताकि चार्जिंग के वक्त शॉर्ट सर्किट, आर्किंग, बिजली लीकेज के खतरे और पानी भीतर जाने की सूरत में नुकसान से बचाता है।

पावर केबल और चार्जर जैसे पुर्जों को बचाने वाला बीमा कवर भी हर हाल में लेना चाहिए। यूनिवर्सल सोम्पो जरनल इंश्योरेंस मे चीफ टेक्निकल ऑफिसर आरती मलिक की सलाह है कि थोड़ा ज्यादा प्रीमियम अदा करना पड़े तब भी बैटरी के चार्जर का बीमा करा लेना चाहिए ताकि चोरी और किसी तरह के नुकसान की सूरत में ईवी मालिक की जेब पर चोट नहीं पड़े।

कौन सी पॉलिसी बेहतर

ईवी मालिकों के पास दो विकल्प होते हैं। कौल बताते हैं, ‘कुछ बीमा कंपनियां ईवी के लिए खास पॉलिसी दे रही हैं, जिसमें थर्ड पार्टी बीमा, ओन-डैमेज बीमा और ईवी के लिए जरूरी कवर होते हैं।’ इसकी जगह ईवी मालिक सामान्य वाहन बीमा भी खरीद सकते हैं और उसमें अपनी जरूरत के मुताबिक ऐड-ऑन जोड़ सकते हैं। कौल के हिसाब से संपूर्ण ईवी बीमा ज्यादा सुविधाजनक हो सकता है और उसमें प्रीमियम भी कम रह सकता है।

क्या शामिल, क्या बाहर

बैटरी का बीमा कराने पर पानी घुसने या ट्रैक्शन बैटरी, बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम और इलेक्ट्रिक ड्राइव सिस्टम को नुकसान होने पर सही कराने या उसे बदलने का खर्च मिल सकता है। कौल बताते हैं, ‘चार्जिंग के दौरान वोल्टेज अचानक बढ़ जाने या बैटरी लगाते, निकालते अथवा चार्ज करते समय इलेक्ट्रोकेमिकल रिएक्शन के कारण विस्फोट होने, आग लगने या धुआं निकलने की स्थिति में बैटरी बीमा के तहत दावा किया जा सकता है।’

इंश्योरेंस ब्रोकर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के निदेशक समीर समदानी के मुताबिक किसी बाहरी कारण से या वोल्टेज बढ़ने से मैकेनिकल शॉक लगे तो भी इस बीमा के तहत दावा किया जा सकता है। लेकिन कई मसले बीमा के दायरे से बाहर भी होते हैं।

आरती बताती हैं, ‘गाड़ी की उम्र के साथ या लापरवाही के कारण बैटरी में आने वाली सामान्य दिक्कतों पर यह बा काम नहीं करता। बैटरी के साथ छेड़छाड़ होने या कार कंपनी के बजाय बाहर का चार्जर इस्तेमाल होने पर नुकसान हुआ तो भी इस बीमा से कुछ नहीं मिलेगा।’

बैटरी डेड यानी बिल्कुल बेकार होने पर, उसकी क्षमता कम होने, लापरवाही, वारंटी में शामिल विनिर्माण खामियों, गलत तरीके से इस्तेमाल करने या असुरक्षित चार्जिंग करने तथा बिना बताए वाहन मॉडिफाई कराने पर भी बीमा काम नहीं करता। वाहन का रखरखाव ठीक से नहीं किया जाए या लंबे अरसे तक उसे चार्ज नहीं किया जाए तो भी बीमा कंपनी की देनदारी नहीं बनती।

चार्जिंग से जुड़ा बीमा

हो सकता है कि सामान्य वाहन बीमा के दायरे में होम चार्जर और केबल जैसे ईवी चार्जिंग उपकरण नहीं आ रहे हों। आरती कहती हैं, ‘ईवी खरीदने वालों को बैटरी चार्जर की चोरी या नुकसान की आशंका ध्यान में रखते हुए ऐड-ऑन खरीद लेना चाहिए।’

ईवी मालिकों को पता होना चाहिए कि क्या-क्या बीमा के दायरे से बाहर है। प्रूडेंट इंश्योरेंस ब्रोकर्स में वाइस प्रेसिडेंट (मोटर इंश्योरेंस) तेजिंदर पाल सिंह आगाह करते हैं, ‘अगर बैटरी या चार्जर उसी कार कंपनी के नहीं हैं या चार्जिंग कंपनी के बताए दिशानिर्देशों के मुताबिक नहीं की गई है तो दावा खारिज किया जा सकता है।’

बैटरी या चार्जर का इंस्टॉलेशन भी कार कंपनी के बताये दिशानिर्देशों के मुताबिक ही होना चाहिए। कवरश्योर के संस्थापक और सीईओ सौरभ विजयवर्गीय की राय है कि खरीदारों को इंस्टॉलेशन से जुड़े सभी दस्तावेज संभालकर रखने चाहिए ताकि दावा करते समय विवाद खड़ा न हो।

सही आईडीवी और ऐड-ऑन

इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू (आईडीवी) यानी बीमा पॉलिसी में तय किया गया वाहन का मूल्य उसका वह बाजार मूल्य होता है, जो चोरी या वाहन पूरी तरह बरबाद होने की सूरत में बीमा कंपनी देती है। वाहन कंपनी जिस कीमत पर गाड़ी बेचती है, उसमें से गाड़ी की उम्र के हिसाब से डेप्रिसिएशन घटा देते हैं तो आईडीवी आ जाती है।

कार नई हो तो खरीदार को बिल में दी गई कीमत के आसपास की आईडीवी चुननी चाहिए। सिंह समझाते हैं, ‘बीमा कंपनी एक्स-शोरूम कीमत में करीब 5 फीसदी कमी या डेप्रिसिएशन करके आईडीवी निकाल सकती है। कार जितनी पुरानी होती है, डेप्रिसिएशन भी उतना ही ज्यादा होता है।’

बाजार में अपनी गाड़ी की कीमत पता कर लें और आईडीवी उसी के आसपास रखें। विजयवर्गीय कहते हैं कि इलेक्ट्रिक वाहन के बैटरी जैसे पुर्जे इतने महंगे हैं कि बीमा पर्याप्त नहीं रहने का खतरा बढ़ जाता है।

जो ऐड-ऑन आपके पास होने ही चाहिए, उनमें जीरो-डेप्रिसिएशन या रिटर्न-टु-इनवॉयस और रोड साइड असिस्टेंस शामिल हैं। जीरो-डेप्रिसिएशन इसलिए जरूरी है क्योंकि इसमें पुर्जों की कीमत बगैर डेप्रिसिएशन के दी जाती है और ईवी के पुर्जे आम तौर पर महंगे ही होते हैं। सिंह बताते हैं, ‘रिटर्न-टु-इनवॉयस कवर लिया जाए तो चोरी या पूरी तरह बरबाद होने पर आईडीवी के बजाय गाड़ी खरीदते समय चुकाई गई कीमत मिल सकती है, जिसमें रजिस्ट्रेशन या कर का खर्च भी शामिल होता है।’

विजयवर्गीय की राय है, ‘गाड़ी चलाने के तरीके को देखकर बीमा लेने से आपकी जेब का खर्च कम हो सकता है। अगर आप शहर के भीतर ही गाड़ी चलाते हैं तो पे ऐज यू ड्राइव कवर ले सकते हैं, हाईवे पर चलाने वालों को एक्सटेंडेड असिस्टेड कवर ठीक रहेगा और असुरक्षित इलाकों में इलेक्ट्रिकल प्रोटेक्शन कवर लेना फायदेमंद हो सकता है।’

बंदिशें और शर्तें

अगर आप अपनी ईवी की बैटरी के लिए दावा डालते हैं तो रकम यह देखकर मिलेगी कि आपका वाहन कितना पुराना है। समदानी बताते हैं, ‘बैटरी और चार्जर प्रोटेक्ट कवर अक्सर 6 साल तक पुराने ईवी पर ही मिलता है।’

इसी तरह ईवी के खास ऐड-ऑन में आईडीवी या पुर्जे की कीमत जितनी रकम ही मिल पाती है। मोसामकर के मुताबिक अगर जीरो डेप्रिसिएशन नहीं है तो हो सकता है कि बैटरी कवर में डेप्रिसिएटेड वैल्यू ही मिल पाए। पांच साल से ज्यादा पुराने ईवी पर कुछ ऐड-ऑन मिलते ही नहीं हैं और मिलते भी हैं तो प्रीमियम ज्यादा चुकाना पड़ता है। यह भी हो सकता है कि बीमा कंपनी एक साल के भीतर बैटरी से जुड़े दावों की संख्या भी तय कर दे।

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First Published - March 3, 2026 | 11:53 PM IST

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