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होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से बढ़ेंगी मुश्किलें, भारत समेत एशियाई देशों में बढ़ सकते हैं कच्चे तेल के दाम

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वर्ष 2020 और 2025 की पहली तिमाही के बीच लगभग 8.87 करोड़ बैरल प्रति दिन कच्चा तेल इस स्ट्रेट से होकर गुजरा

Last Updated- March 04, 2026 | 12:31 AM IST
Strait of Hormuz

ईरान ने अमेरिका-इजरायल के हवाई हमले के बाद होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की घोषणा की है, जिससे वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। वर्ष 2020 और 2025 की पहली तिमाही के बीच लगभग 8.87 करोड़ बैरल प्रति दिन कच्चा तेल इस स्ट्रेट से होकर गुजरा।

इस कुल आयात में चीन की हिस्सेदारी 31 फीसदी, भारत की 15 फीसदी और दक्षिण कोरिया की 11 फीसदी रही। वर्ष 2023 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात का 43 फीसदी इसी मार्ग से होकर आया। इसके बाद डेनिश स्ट्रेट (23 फीसदी) और तुर्की स्ट्रेट (11 फीसदी) का स्थान रहा। यदि यह संकरा रास्ता बंद होता है तो भारत में भी तेल कीमतें बढ़ने का खतरा है।

कच्चे तेल के आयात के लिए होर्मुज स्ट्रेट पर भारत की निर्भरता पहले के मुकाबले कम हुई है। वर्ष 2020 में यहां 55 फीसदी तेल आयात इसी मार्ग से होता था जबकि साल 2025 की पहली तिमाही तक यह घटकर 41 फीसदी पर आ गया। अन्य देशों की बात करें तो होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से चीन का तेल आयात बढ़ा है जो 2020 में 28 फीसदी से बढ़कर 2025 की पहली तिमाही में 33 फीसदी हो गया, जबकि इसी अवधि में भारत की हिस्सेदारी 15 फीसदी से घटकर 13 फीसदी रह गई।

बीते साल जब जून में ईरान ने इस स्ट्रेट को बंद किया था तो दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई थी और भारत भी इससे अछूता नहीं रह पाया था। होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते सबसे ज्यादा कच्चे तेल का आयात जापान, चीन और भारत करते हैं। सूची दर्शाती है कि अपने कच्चे तेल आयात के लिए एशियाई देश काफी हद तक होर्मुज पर निर्भर हैं।

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First Published - March 4, 2026 | 12:31 AM IST

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