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दुनिया के केंद्रीय बैंक अचानक क्यों धीमे पड़ गए? जनवरी में सोना खरीद सिर्फ 5 टन

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कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव से खरीदारी थमी; उज्बेकिस्तान सबसे बड़ा खरीदार, रूस ने बेचा सोना

Last Updated- March 04, 2026 | 12:44 PM IST
Gold Rate

दुनिया के केंद्रीय बैंकों की सोना खरीद में जनवरी में अचानक बड़ी गिरावट देखने को मिली। जहां पिछले 12 महीनों में औसतन हर महीने करीब 27 टन सोना खरीदा जा रहा था, वहीं जनवरी में यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 5 टन रह गया। विशेषज्ञों का कहना है कि सोने की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव और कुछ मौसमी कारणों की वजह से केंद्रीय बैंकों ने इस बार खरीदारी में सावधानी बरती।

उज्बेकिस्तान ने बढ़ाई सबसे ज्यादा खरीद

इस दौरान उज्बेकिस्तान सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा। देश के केंद्रीय बैंक ने 9 टन सोना खरीदा, जिससे उसका कुल सोना भंडार बढ़कर 399 टन हो गया। अब उज्बेकिस्तान के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी 86% तक पहुंच गई है, जबकि 2020 में यह सिर्फ 57% थी।

मलेशिया ने 2018 के बाद खरीदा सोना

मलेशिया के केंद्रीय बैंक ने भी 3 टन सोना खरीदा। इसके साथ ही देश का कुल सोना भंडार बढ़कर 42 टन हो गया, जो उसके कुल भंडार का करीब 5% है। खास बात यह है कि मलेशिया ने 2018 के बाद पहली बार अपने सोने के भंडार में बढ़ोतरी की है।

चीन ने लगातार 15वें महीने खरीदा सोना

चीन के केंद्रीय बैंक ने जनवरी में 1 टन सोना खरीदा। इसके साथ ही चीन ने लगातार 15वें महीने सोना खरीदने का सिलसिला जारी रखा। अब चीन के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगभग 10% के करीब पहुंच गई है।

रूस ने बेचा 9 टन सोना

वहीं दूसरी ओर रूस इस दौरान सबसे बड़ा विक्रेता रहा। रूस के केंद्रीय बैंक ने अपने भंडार से 9 टन सोना बेच दिया। इसके अलावा बुल्गारिया ने यूरो अपनाने के बाद 2 टन सोना यूरोपीय सेंट्रल बैंक को ट्रांसफर किया।

केडिया एडवाइजरी की राय

केडिया एडवाइजरी के मुताबिक, आने वाले समय में डॉलर के मुकाबले रुपया दबाव में रह सकता है और USD/INR का स्तर 94.20 तक पहुंच सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत डॉलर, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिका-भारत के ब्याज दरों का अंतर रुपये पर दबाव बनाए रख सकता है। हालांकि आरबीआई के दखल से बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव को सीमित किया जा सकता है।

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First Published - March 4, 2026 | 11:59 AM IST

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