अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ सार्थक बातचीत का हवाला देते हुए वहां के ऊर्जा संयंत्रों पर प्रस्तावित हमले को 5 दिन टालने की घोषणा से आज शेयर बाजार में तेजी देखी गई। हालांकि तेल की कीमतें ऊंची बनी रहने और ईरान तथा इजरायल के बीच तनाव जारी रहने से बाजार में बढ़त सीमित रही।
सुबह के कारोबार में बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 1,793 अंक या 2.5 फीसदी तक उछल गया था मगर बाद में बढ़त कम होकर 1,372 अंक रह गई और यह 74,069 पर बंद हुआ। नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 400 अंक या 1.8 फीसदी चढ़कर 22,912 पर बंद हुआ। दोनों सूचकांकों में 3 फरवरी के बाद सबसे मजबूत बढ़त देखी गई। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 7.6 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 423 लाख करोड़ रुपये रहा।
एक दिन पहले सोमवार को सेंसेक्स जून 2024 के बाद सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ था और निफ्टी अप्रैल 2025 के निचले स्तर पर बंद हुआ था।
अन्य एशियाई बाजारों ने भी अपनी बढ़त गंवा दी। ईरान संघर्ष के समाधान को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच यूरोपीय बाजारों में गिरावट का रुख रहा।
ईरान ने सोमवार रात को तेल अवीव सहित इजरायल के विभिन्न शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए और पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया। इसके जवाब में इजरायल ने तेहरान सहित पश्चिमी और मध्य ईरान पर हमला किया। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा कि ये अभियान पूरी तीव्रता के साथ जारी रहेंगे। एक मीडिया रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फारस की खाड़ी में अमेरिका के सहयोगी देश भी ईरान के खिलाफ इस अभियान में शामिल हो सकते हैं।
पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद फीकी पड़ने के साथ ही ब्रेंट क्रूड की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई बढ़ने, वैश्विक वृद्धि पर दबाव पड़ने और केंद्रीय बैंकों द्वारा अपनी मौद्रिक नीति को और सख्त बनाने का जोखिम है।
भले ही निकट भविष्य में तनाव कुछ कम हो जाए मगर निवेशक इस संघर्ष के व्यापक आर्थिक नतीजों को लेकर सतर्क हैं।
एमके ग्लोबल के शोध प्रमुख शेषाद्रि सेन ने कहा, ‘भले ही हाल में तनाव कम होने के कुछ संकेत मिले हों मगर पश्चिम एशिया का संघर्ष अब ज्यादा नाजुक दौर में पहुंच रहा है। ऊर्जा से जुड़े संयंत्रों पर हुए हमलों से आपूर्ति में बाधा आने का खतरा बढ़ गया है। तेल के लिए इस क्षेत्र पर निर्भरता और सीमित रणनीतिक भंडार को देखते हुए भारत को बढ़ती ऊर्जा कीमतों के कारण झटका लग सकता है। लंबे समय तक चलने वाले इस संघर्ष से वैश्विक अपस्फीति और बाजार में भारी उठापटक का खतरा बढ़ जाता है, जिसका असर भारत के निर्यात, धन प्रेषण और पूंजी प्रवाह पर पड़ सकता है।’
डीबीएस बैंक में वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव ने कहा, ‘तेल और ऊर्जा की अन्य प्रमुख चीजों का शुद्ध आयातक होने के नाते भारत को ऊंची कीमतों और आपूर्ति में बाधा के बीच चालू खाते का घाटा बढ़ने और पूंजी के प्रवाह में कमी का सामना करना पड़ रहा है। जैसे-जैसे तेल के दाम बढ़ेंगे महंगाई का दबाव भी बढ़ सकता है।’ बीएसई पर 2,949 शेयर बढ़त में और 1,319 गिरावट में रहे।
सेंसेक्स में एचडीएफसी बैंक को छोड़कर सभी शेयर नुकसान में रहे। एचडीएफसी बैंक में 3 फीसदी की तेजी आई और सेंसेक्स की बढ़त में इसने 276 अंक का योगदान दिया। लार्सन ऐंड टुब्रो तथा इंडिगो में भी 5-5 फीसदी की तेजी आई। निफ्टी स्मॉलकैप और निफ्टी मिडकैप 2.6 फीसदी बढ़त में रहे। अन्य सभी क्षेत्रीय सूचकांक भी लाभ में रहे।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 8,010 करोड़ रुपये के शेयर बेचे और घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 5,867 करोड़ रुपये की लिवाली की।