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बच्चों के लिए PPF अकाउंट: खाता खोलने का तरीका और टैक्स के नियम बेहद आसान भाषा में समझें

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बच्चों के सुरक्षित भविष्य और पढ़ाई के खर्च के लिए PPF एक बेहतरीन सरकारी योजना साबित हो सकता है। जानिए इसके जरूरी नियम, टैक्स में लाभ और खाता खोलने का आसान तरीका

Last Updated- May 15, 2026 | 7:22 PM IST
mother son
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

माता-पिता हमेशा अपने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित और खुशहाल बनाने की चिंता में रहते हैं। बच्चों की उच्च शिक्षा, शादी या किसी मेडिकल इमरजेंसी जैसे बड़े खर्चों के लिए समय पर एक बड़ा फंड तैयार करना आसान नहीं होता। ऐसे में पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी PPF एक बेहद भरोसेमंद और सुरक्षित लॉन्ग-टर्म सेविंग्स ऑप्शन माना जाता है। केंद्र सरकार की इस योजना में जोखिम बिल्कुल नहीं होता, इसलिए सुरक्षित निवेश चाहने वाले अभिभावकों के लिए यह एक बेहतरीन जरिया है।

क्या नाबालिग बच्चों के नाम पर खुल सकता है PPF अकाउंट?

जी हां, PPF नियमों के मुताबिक माता-पिता या कानूनी अभिभावक अपने 18 साल से कम उम्र के बच्चों के नाम पर PPF खाता खोल सकते हैं। हालांकि, इसके लिए कुछ जरूरी नियम तय किए गए हैं:

  • एक बच्चा, एक खाता: एक बच्चे के नाम पर देश भर में केवल एक ही PPF अकाउंट खोला जा सकता है।
  • माता या पिता में से कोई एक ही बनेगा गार्जियन: बच्चे के खाते को माता या पिता में से कोई एक ही संभाल सकता है। दोनों एक साथ मिलकर संयुक्त रूप से गार्जियन नहीं बन सकते।
  • दादा-दादी के लिए नियम: दादा-दादी या नाना-नानी अपने पोते-पोतियों के लिए सीधे PPF खाता नहीं खोल सकते। वे ऐसा तभी कर सकते हैं, जब माता-पिता के न होने पर उन्हें बच्चे का कानूनी अभिभावक घोषित किया गया हो।

यह खाता तब तक अभिभावक की देखरेख में ही चलता है जब तक बच्चा बालिग नहीं हो जाता। जैसे ही बच्चा 18 साल का होता है, उसे खाते को खुद संभालने के लिए बैंक या पोस्ट ऑफिस में नए सिरे से अपने KYC डॉक्यूमेंट और साइन जमा करने होते हैं।

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माता-पिता क्यों चुनते हैं बच्चों के लिए PPF?

PPF योजना अपनी तीन सबसे बड़ी खासियतों की वजह से पारंपरिक और सुरक्षित निवेश पसंद करने वाले परिवारों की पहली पसंद बनी हुई है:

  1. सरकारी गारंटी: चूंकि यह सरकार द्वारा समर्थित योजना है, इसलिए इसमें जमा पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहता है।
  2. इनकम टैक्स में छूट: इसमें निवेश करने पर आयकर कानून की धारा 80सी (Section 80C) के तहत टैक्स का लाभ मिलता है।
  3. टैक्स-फ्री मैच्योरिटी: PPF खाते की सबसे बड़ी खूबी यह है कि जब इसकी अवधि पूरी होती है, तो मिलने वाली पूरी रकम और उस पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है।

इस स्कीम में ब्याज की गणना सालाना कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि) के आधार पर होती है। सरकार हर तिमाही में इसकी ब्याज दरों की समीक्षा करती है और जरूरत के अनुसार बदलाव करती है।

चूंकि इस योजना का लॉक-इन पीरियड 15 साल का होता है, इसलिए अगर माता-पिता बच्चे के जन्म के शुरुआती सालों में ही यह खाता खोल देते हैं, तो लंबे समय में कंपाउंडिंग के जादू से एक बहुत बड़ा फंड तैयार हो जाता है। यह बड़ी रकम भविष्य में बच्चे की पढ़ाई या अन्य बड़े सपनों को पूरा करने में बहुत मददगार साबित होती है।

निवेश से जुड़े नियम और सीमाएं

बच्चों के नाम पर PPF खाता खोलने से पहले निवेश की सीमाओं को अच्छी तरह समझ लेना जरूरी है:

  • 1.5 लाख रुपये की अधिकतम सीमा: एक वित्त वर्ष (Financial Year) में माता-पिता अपने खुद के PPF खाते और बच्चे के PPF खाते को मिलाकर अधिकतम 1.5 लाख रुपये ही जमा कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई अभिभावक अपने खुद के खाते में 1 लाख रुपये जमा करता है, तो वह उसी साल बच्चे के खाते में ज्यादा से ज्यादा 50,000 रुपये ही डाल सकता है।
  • न्यूनतम जमा राशि: खाते को चालू रखने के लिए हर साल कम से कम 500 रुपये जमा करना अनिवार्य है।
  • अतिरिक्त पैसे पर नुकसान: यदि कोई गलती से तय सीमा (1.5 लाख रुपये) से अधिक पैसा जमा कर देता है, तो उस अतिरिक्त रकम पर कोई ब्याज नहीं मिलता है। साथ ही, इससे खाता प्रबंधन में भी दिक्कतें आ सकती हैं।

बच्चे का PPF खाता कैसे खोलें?

PPF खाता किसी भी अधिकृत बैंक शाखा या डाकघर (Post Office) में जाकर आसानी से खोला जा सकता है। इसकी प्रक्रिया भी सामान्य PPF खाते जैसी ही होती है।

जरूरी डॉक्यूमेंट

  • बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate)
  • अभिभावक का आधार कार्ड ([Aadhaar Omitted] की जानकारी के लिए आवश्यक)
  • अभिभावक का पैन कार्ड
  • निवास का प्रमाण पत्र (Address Proof)
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • पूरी तरह भरा हुआ PPF खाता खोलने का फॉर्म

कुछ बैंक अपने नियमों और जांच प्रक्रिया के हिसाब से आपसे कुछ और जरूरी डॉक्यूमेंट भी मांग सकते हैं।

खाता खोलने का आसान तरीका

  1. सबसे पहले PPF सेवा देने वाले किसी भी नजदीकी बैंक या पोस्ट ऑफिस में जाएं।
  2. वहां से माइनर PPF अकाउंट खोलने का फॉर्म लें और उसे ध्यानपूर्वक भरें।
  3. फॉर्म के साथ बच्चे के डॉक्यूमेंट और अपने केवाईसी डॉक्यूमेंट्स अटैच करके जमा करें।
  4. खाता सक्रिय करने के लिए शुरुआती न्यूनतम योगदान राशि जमा करें।
  5. वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी होते ही बच्चे का PPF खाता खुल जाएगा।

आजकल कई बैंक इंटरनेट बैंकिंग के जरिए ऑनलाइन PPF खाता खोलने की सुविधा भी देते हैं। अगर माता-पिता का उसी बैंक में पहले से अकाउंट है, तो वे घर बैठे बेहद आसानी से बच्चे का माइनर PPF अकाउंट खोल सकते हैं।

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पैसे निकालने और मैच्योरिटी के नियम

PPF 15 साल के लॉक-इन पीरियड के साथ आता है, जिसका सीधा मतलब है कि यह पूरी तरह एक लंबी अवधि का निवेश है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि जरूरत पड़ने पर आपको बीच में बिल्कुल पैसे नहीं मिलेंगे।

  • आंशिक निकासी (Partial Withdrawal): एक तय समय सीमा पूरी होने के बाद नियमों के तहत खाते से आंशिक रूप से पैसे निकाले जा सकते हैं। हालांकि, इसके लिए कुछ निश्चित सीमाएं तय होती हैं।
  • लोन की सुविधा: खाता खोलने के कुछ सालों बाद जमा राशि के बदले लोन लेने की सुविधा भी मिलती है। इससे बिना निवेश को तोड़े जरूरत के समय पैसों का इंतजाम हो जाता है।
  • मैच्योरिटी के बाद के विकल्प: 15 साल पूरे होने पर खाताधारक के पास तीन विकल्प होते हैं। वह चाहे तो पूरा पैसा निकालकर खाता बंद कर सकता है, नए निवेश के साथ इसकी अवधि को आगे बढ़ा सकता है, या फिर बिना नया पैसा डाले भी खाते को चालू रख सकता है जिस पर ब्याज मिलता रहेगा।

क्या बच्चों के लिए अलग PPF खाता खोलना सही है?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका प्लान क्या हैं और आप टैक्स की प्लानिंग कैसे कर रहे हैं। जो परिवार बाजार के जोखिमों से दूर रहकर एक निश्चित, सुरक्षित और टैक्स-फ्री रिटर्न चाहते हैं, उनके लिए बच्चे के नाम पर PPF खाता खोलना एक बहुत ही समझदारी भरा फैसला है।

हालांकि, महंगाई की दर और लंबे समय में मिलने वाले रिटर्न को देखते हुए कई माता-पिता एक अलग रणनीति अपनाते हैं। वे सुरक्षा के लिए PPF में निवेश करने के साथ-साथ बेहतर ग्रोथ के लिए बाजार से जुड़े विकल्पों जैसे म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) में भी कुछ हिस्सा लगाते हैं। इससे उनके पोर्टफोलियो में सुरक्षा और बढ़त दोनों का सही संतुलन बन जाता है।

बच्चों के मामले में सबसे बड़ा फायदा समय का होता है। जितनी छोटी उम्र में निवेश शुरू किया जाएगा, समय के साथ कंपाउंडिंग का लाभ उतना ही ज्यादा मिलेगा, जिससे भविष्य के बड़े खर्चों का बोझ आसानी से उठाया जा सकेगा।

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First Published - May 15, 2026 | 7:22 PM IST

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