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आसमान में भारत की ताकत बढ़ाने की जरूरत, वायुसेना ने ‘घातक’ स्टेल्थ ड्रोन कार्यक्रम को तेज करने पर दिया जोर

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इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ प्रमुख ने 'लॉयल विंगमैन' कार्यक्रमों के मुकाबले 2030 तक क्षमता हासिल करने के लिए DRDO के 'घातक' स्टेल्थ ड्रोन कार्यक्रम में तेजी लाने की जरूरत बताई है

Last Updated- May 16, 2026 | 10:22 AM IST
ashutosh dixit
इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित | फोटो: Commons

इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने कहा कि देश में उन्नत दूर से संचालित मारक (स्ट्राइक) विमान (आरपीएसए) तैयार करने के कार्यक्रम में तेजी लाने की दरकार है। दीक्षित ने शुक्रवार को कहा कि ये विमान भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के लड़ाकू विमानों के साथ उड़ान भरेंगे और उनकी मदद करेंगे।

उन्होंने अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में चल रहे ‘लॉयल विंगमैन’ कार्यक्रमों के साथ रफ्तार बनाए रखने के लिए न्यूनतम क्षमता हासिल करने की समय सीमा वर्ष 2030 निर्धारित की।

उन्होंने नई दिल्ली में एरोस्पेस पावर ऐंड स्ट्रैटजिक स्टडीज सेंटर द्वारा आयोजित मानव रहित हवाई प्रणालियों एवं उनसे निपटने के तरीकों पर एक सेमिनार में कहा कि रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के स्वदेशी ‘घातक’ स्टेल्थ आरपीएसए कार्यक्रम को ‘तत्काल गति’ दी जानी चाहिए।

भविष्य में आईएएफ के अभियानों में स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान शामिल हो सकते हैं जो कई घातक आरपीएसए के साथ वास्तविक समय में तालमेल स्थापित करेंगे। इनमें प्रत्येक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों और लक्ष्यीकरण सेंसर से लेकर सटीक गोला-बारूद तक विभिन्न मिशन पेलोड ले जा सकता है। पायलट अपने हेलमेट-माउंटेड कंट्रोल डिस्प्ले के माध्यम से आरपीएसए नियंत्रित कर सकेंगे और खतरा उठाए बिना अभियानों को अंजाम दे सकेंगे। उन्होंने कहा,‘भारतीय वायु सेना आगे इसी तरह से युद्ध करेगी।’

पारंपरिक लड़ाकू विमानों को स्वायत्त प्रणालियों के साथ जोड़ने की अवधारणा को मानव-मानव रहित टीमिंग के रूप में जाना जाता है। दीक्षित ने अमेरिका के क्रैटोस एक्सक्यू -58 वाल्किरी और ऑस्ट्रेलिया के बोइंग एमक्यू -28 घोस्ट बैट जैसे लॉयल विंगमैन कार्यक्रमों का जिक्र किया। उन्होंने कहा,‘भारत के पास घातक है। हमें भारतीय वायु सेना की स्पष्ट परिचालन आवश्यकता और डीआरडीओ, हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड और योग्य निजी क्षेत्र के भागीदारों को शामिल करते हुए एक प्रतिबद्ध संयुक्त कार्यक्रम के साथ इसे तत्काल गति देनी चाहिए।’

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First Published - May 16, 2026 | 10:21 AM IST

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