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जीएसटी कटौती के बाद ऑटो सेक्टर में मांग तेज, लेकिन मिडिल ईस्ट तनाव से निर्यात और सप्लाई चेन पर बढ़ सकता है दबाव

Last Updated- March 04, 2026 | 10:05 AM IST
SIAM

भारत का ऑटो सेक्टर इस समय तेज रफ्तार से बढ़ रहा है, लेकिन वैश्विक तनाव इसकी रफ्तार पर असर डाल सकता है। एंटीक स्टॉक ब्रोकरेज की रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2025 में जीएसटी दरों में कटौती के बाद ऑटो इंडस्ट्री में तेज सुधार देखने को मिला है। फरवरी 2026 तक के आंकड़े बताते हैं कि सेक्टर में वाहनों की मांग मजबूत बनी हुई है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव भारतीय ऑटो कंपनियों के निर्यात पर असर डाल सकता है, क्योंकि कई कंपनियों का कारोबार पश्चिम एशिया के बाजारों पर काफी निर्भर है।

मिडिल ईस्ट पर बड़ी निर्भरता

रिपोर्ट के मुताबिक कई बड़ी भारतीय ऑटो कंपनियों के लिए मिडिल ईस्ट और उत्तरी अफ्रीका का बाजार काफी महत्वपूर्ण है। कुल निर्यात में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी अशोक लेलैंड के लिए करीब 30 प्रतिशत, हुंडई मोटर इंडिया के लिए लगभग 40 प्रतिशत, मारुति सुजुकी के लिए करीब 12 प्रतिशत, आयशर मोटर्स (रॉयल एनफील्ड) के लिए करीब 26 प्रतिशत और बजाज ऑटो के लिए करीब 10 प्रतिशत है। वहीं टाटा मोटर्स की लग्जरी ब्रांड जगुआर लैंड रोवर के लिए भी यह क्षेत्र एक अहम बाजार माना जाता है। ऐसे में अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो इसका असर कंपनियों के निर्यात, माल ढुलाई और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।

पैसेंजर व्हीकल की मांग में तेज रफ्तार

घरेलू बाजार में पैसेंजर व्हीकल की मांग तेजी से बढ़ रही है। अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच घरेलू थोक बिक्री में करीब 7 से 8 प्रतिशत की सालाना बढ़त दर्ज की गई है। इस दौरान टाटा मोटर्स की पैसेंजर व्हीकल बिक्री 34 प्रतिशत और हुंडई की बिक्री करीब 10 प्रतिशत बढ़ी। वहीं एसयूवी सेगमेंट में भी अच्छी मांग देखने को मिली। महिंद्रा एंड महिंद्रा की एसयूवी बिक्री 19 प्रतिशत और मारुति सुजुकी की बिक्री करीब 12 प्रतिशत बढ़ी है। कंपनियों का कहना है कि बढ़ती लागत और महंगाई को देखते हुए अब वाहनों की कीमतों की हर महीने समीक्षा की जा रही है, ताकि मुनाफे पर ज्यादा असर न पड़े।

कमर्शियल व्हीकल में जबरदस्त उछाल

कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में भी जीएसटी कटौती का साफ असर दिखाई दे रहा है। जीएसटी दर 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने के बाद इस सेगमेंट में मांग तेज हुई है। अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के दौरान घरेलू कमर्शियल व्हीकल बिक्री में करीब 12 से 13 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इस दौरान वोल्वो आयशर कमर्शियल व्हीकल्स की बिक्री 54 प्रतिशत, टाटा मोटर्स की 37 प्रतिशत और अशोक लेलैंड की 33 प्रतिशत बढ़ी। इससे साफ है कि ट्रक और भारी वाहनों की मांग में मजबूत सुधार देखने को मिल रहा है।

दोपहिया वाहनों की बिक्री में भी तेजी

दोपहिया वाहनों के बाजार में भी अच्छी बढ़त देखने को मिल रही है। फरवरी 2026 में हीरो मोटोकॉर्प की घरेलू बिक्री 45 प्रतिशत, टीवीएस मोटर की 32 प्रतिशत, बजाज ऑटो की 27 प्रतिशत और रॉयल एनफील्ड की 13 प्रतिशत बढ़ी है। इसके अलावा दोपहिया वाहनों के निर्यात में भी मजबूत बढ़त बनी हुई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि वैश्विक बाजारों में भी मांग धीरे-धीरे सुधर रही है।

ग्रामीण बाजार ने दी नई ताकत

ट्रैक्टर सेगमेंट में जीएसटी कटौती के बाद ग्रामीण मांग को बड़ा सहारा मिला है। जीएसटी दर 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किए जाने के बाद ट्रैक्टर बिक्री में तेजी आई है। अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच ट्रैक्टर बिक्री करीब 30 प्रतिशत बढ़ी है। इस सेगमेंट में महिंद्रा एंड महिंद्रा करीब 24 प्रतिशत वृद्धि के साथ सबसे आगे रही। बेहतर मानसून, रबी की मजबूत बुआई और जलाशयों में पर्याप्त पानी के कारण ग्रामीण इलाकों में आय बढ़ी है, जिसका सीधा फायदा ट्रैक्टर बिक्री को मिला है।

तीन पहिया वाहनों में भी मजबूत ग्रोथ

तीन पहिया वाहनों की मांग में भी अच्छी बढ़त देखने को मिली है। महिंद्रा एंड महिंद्रा के घरेलू तीन पहिया वाहनों की बिक्री में करीब 30 प्रतिशत और बजाज ऑटो की बिक्री में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं टीवीएस मोटर ने कम आधार के कारण 118 प्रतिशत की तेज बढ़त दर्ज की है, जिससे इस सेगमेंट में मजबूत मांग के संकेत मिलते हैं।

आगे क्या है तस्वीर

एंटीक स्टॉक ब्रोकरेज का कहना है कि सितंबर 2025 में जीएसटी में बदलाव के बाद ऑटो सेक्टर में फिर से तेजी आनी शुरू हो गई है। उनका मानना है कि आने वाले 4 से 6 तिमाहियों तक वाहनों की मांग मजबूत बनी रह सकती है। हालांकि ब्रोकरेज ने यह भी कहा है कि दुनिया में बढ़ते तनाव की वजह से कंपनियों के निर्यात, लागत और सप्लाई चेन पर दबाव पड़ सकता है। निवेश के नजरिए से ब्रोकरेज को मारुति सुजुकी, टीवीएस मोटर और बजाज ऑटो के शेयर बेहतर लग रहे हैं। उनका मानना है कि मध्यम अवधि में इन कंपनियों में जोखिम के मुकाबले बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना है।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।

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First Published - March 4, 2026 | 9:52 AM IST

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