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देश में कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार, वैकल्पिक आयात मार्गों पर फोकस: हरदीप सिंह पुरी

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अमेरिका और इजरायली सैन्य हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई के बाद इस होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का ऐलान कर दिया है

Last Updated- March 04, 2026 | 12:14 AM IST
Hardeep Singh Puri

पश्चिम एशिया में गहराते संकट के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा कि युद्ध के कारण पैदा होने वाले व्यवधान से घबराने की जरूरत नहीं है। भारत के पास कच्चे तेल और पेट्रोल, डीजल और विमानन टर्बाइन ईंधन (एटीएफ) सहित प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार मौजूद है।

पुरी ने कहा कि भारतीय ऊर्जा कंपनियां होर्मुज स्ट्रेट के बजाय अन्य रास्तों से ऊर्जा आयात को बढ़ावा देने के लिए खरीद में विविधता लाएंगी। होर्मुज से दुनिया के कुल शिपमेंट का पांचवां हिस्सा गुजरता है और संकट की स्थिति में यह मार्ग विभिन्न देशों के लिए बड़ी कमजोरी साबित होता है। अमेरिका और इजरायली सैन्य हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई के बाद इस होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का ऐलान कर दिया है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘इस समय ईंधन स्टॉक को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। निरंतर निगरानी के आधार पर सरकार सतर्क और आशावादी है। यदि स्थिति और बिगड़ती है तो चरणबद्ध तरीके से उपाय किए जा सकते हैं।’

एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि भारत के पास वर्तमान में 25 दिनों का कच्चे तेल का स्टॉक और पेट्रोल एवं डीजल सहित 25 दिनों का पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार मौजूद है। उन्होंने कहा कि देश के पास लगभग 25 से 30 दिनों का तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का स्टॉक भी है।

पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के साथ ही खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा ढांचे पर हमला हुआ है, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को बंद करना भी शामिल है। अधिकारी ने कहा, ‘यदि होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहता है, तो पश्चिम एशिया से शिपमेंट भारत लाने के लिए केप ऑफ गुड होप मार्ग का विकल्प चुनेंगे।’

उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिदिन 56 लाख बैरल कच्चे तेल की खपत होती है, जिसमें से लगभग 40 प्रतिशत होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता है। पश्चिम एशिया में युद्ध से उपजे संकट ने भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा चुनौतियां बढ़ा दी हैं, क्योंकि देश कच्चे तेल, एलपीजी और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति के लिए खाड़ी क्षेत्र पर बहुत अधिक निर्भर है।

इक्विटी रिसर्च फर्म येस सिक्योरिटीज के अनुसार, भारत की एलपीजी आपूर्ति का लगभग 83 प्रतिशत, एलएनजी का 56 प्रतिशत और कच्चे तेल का 51 प्रतिशत आयात होर्मुज से जुड़े मार्गों से होकर आता है। ड्रोन हमलों के बाद सऊदी अरामको ने हाल ही में फारस की खाड़ी तट पर रस तनूरा में अपनी सबसे बड़ी रिफाइनरी में संचालन रोक दिया है, जबकि कतरएनर्जी ने भी अपनी सुविधाओं पर हमलों के कारण अस्थायी रूप से एलएनजी उत्पादन बंद कर दिया है।

कतर भारत को दूसरा सबसे बड़ा एलएनजी आपूर्तिकर्ता है। अधिकारी ने कहा, ‘अगर कतरएनर्जी लंबे समय तक बंद रही, तो हमें विकल्पों की तलाश करनी होगी।’ उन्होंने कहा कि फिलहाल सरकार पेट्रोलियम निर्यात में कटौती करने या देश में एलपीजी के उपयोग को युक्तिसंगत बनाने पर विचार नहीं कर रही है। बिजनेस स्टैंडर्ड ने पहले खबर दी थी कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के साथ भारत होर्मुज स्ट्रेट से अलग पश्चिम अफ्रीका और अमेरिका जैसे भौगोलिक क्षेत्रों से कच्चा तेल लाने और अपने ऊर्जा भंडार का उपयोग करने पर विचार कर रहा है।

सामरिक पेट्रोलियम भंडार

भारत ने तीन स्थानों पर 53.3 लाख टन की क्षमता वाले कच्चे तेल के सामरिक पेट्रोलियम भंडार स्थापित किए हैं। इसमें आंध्र प्रदेश में विशाखापत्तनम में 13.3 लाख टन क्षमता, कर्नाटक में मंगलूरु में 15 लाख टन क्षमता और कर्नाटक के पादुर में 25 लाख टन शामिल है। अगस्त 2025 में लोक सभा में पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा दिए गए लिखित जवाब में यह जानकारी दी गई है। ये भंडार लगभग 9.5 दिनों की कच्चे तेल की आवश्यकता को पूरा करने के लिए बफर के रूप में कार्य करने के लिए हैं।

तेल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा संचालित भंडारण सुविधाओं की 64.5 दिनों की क्षमता को ध्यान में रखते हुए कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण के लिए राष्ट्रीय क्षमता पर्याप्त है जो 74 दिनों तक आपूर्ति बनाए रखने में सक्षम है।

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First Published - March 4, 2026 | 12:14 AM IST

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