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Budget 2026 Rituals: बजट से पहले क्यों है हलवा समारोह इतना खास और क्या है इसका महत्व; यहां जानें सबकुछ

Budget 2026: वित्त मंत्रालय ने बजट 2026-27 की तैयारियां शुरू कर दी हैं, हलवा समारोह और लॉक-इन प्रक्रिया से गोपनीयता सुनिश्चित की जाती है

Last Updated- January 14, 2026 | 9:09 AM IST
Halwa ceremony
Representative Image

Budget 2026 Rituals: वित्त मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट तैयारी शुरू कर दी है। मंत्रालय इस समय आगामी बजट के प्रमुख प्रस्ताव और नीतिगत प्राथमिकताओं पर काम कर रहा है।

जैसे-जैसे बजट प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, उद्योग संगठनों ने अपनी मांगें सरकार के सामने रखनी शुरू कर दी हैं। सीमलेस ट्यूब मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (STMAI) ने वित्त मंत्रालय से आग्रह किया है कि वह निर्यात के कम से कम 10% हिस्से के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना लागू करे। एसोसिएशन का कहना है कि यह कदम निर्यात को बढ़ावा देने और घरेलू निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय बाजार में विस्तार करने में मदद करेगा।

बजट पेश करने की तिथि और प्रक्रिया

हर साल भारत के वित्त मंत्री संसद में 1 फरवरी को यूनियन बजट पेश करते हैं। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए यह तारीख 1 फरवरी 2026 रविवार निर्धारित की गई है, जो इतिहास में पहली बार बजट रविवार को पेश किया जाएगा। हालांकि, चूंकि यह रविवार है और साथ ही संगठित अवकाश का दिन है, इसलिए अंतिम तिथि की पुष्टि कैबिनेट कमिटी ऑन पार्लियामेंट्री अफेयर्स जनवरी 2026 में करेगी।

बजट प्रक्रिया अगस्त 2025 से शुरू हुई थी। सामान्य तौर पर, मंत्रालय सभी विभागों को बजट सर्कुलर जारी करते हैं, जिसमें उन्हें अपने क्षेत्रों के राजस्व और व्यय का अनुमान भेजना होता है। इसके बाद कई दौर की पूर्व-बजट चर्चाएं और विशेषज्ञ व आम जनता से परामर्श के बाद ही बजट संसद में पेश किया जाता है।

आर्थिक सर्वेक्षण का महत्व

बजट पेश होने से एक दिन पहले आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) प्रस्तुत किया जाता है। यह भारत की संपूर्ण आर्थिक गतिविधियों का विस्तृत आँकड़ा पेश करता है, जिसमें क्षेत्रवार और सेक्टरवार विवरण शामिल होता है। जहां बजट आगामी वित्त वर्ष के लिए होता है, वहीं आर्थिक सर्वेक्षण वर्तमान वित्त वर्ष के वास्तविक प्रदर्शन पर आधारित होता है।

हलवा समारोह: बजट की तैयारी का महत्वपूर्ण चरण

हलवा समारोह (Halwa Ceremony) बजट से लगभग 9-10 दिन पहले आयोजित किया जाता है। यह वित्त मंत्री और बजट तैयार करने वाले अधिकारियों के बीच कृतज्ञता का प्रतीक है। समारोह में वित्त मंत्रालय की रसोई में एक बड़ी कढ़ाई में हलवा बनाया जाता है, जिसे वित्त मंत्री खुद अपने हाथों से बजट तैयार करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को परोसती हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस हलवे की तैयारी आटे और सूजी से होती है, जिसमें देशी घी और ड्राईफ्रूट्स मिलाए जाते हैं।

इस समारोह के बाद “लॉक-इन अवधि” शुरू होती है। इस दौरान बजट तैयार करने वाले अधिकारी उत्तर ब्लॉक या बजट प्रिंटिंग परिसर से बाहर नहीं जा सकते और किसी भी तरह के बाहरी संपर्क से वंचित रहते हैं। सभी संचार उपकरण जमा कर दिए जाते हैं ताकि बजट की जानकारी पूर्णतः गोपनीय रहे। यह अवधि तब तक जारी रहती है जब तक कि प्रधानमंत्री की मंजूरी और बजट प्रिंटिंग की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।

हलवा समारोह केवल एक सांस्कृतिक या पारंपरिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह बजट तैयार करने वालों के कठिन परिश्रम को सम्मान देने और संकल्पना की गोपनीयता सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण चरण है।

 

जब भारत का बजट लीक हुआ

भारत के इतिहास में 1950 का बजट लीक सबसे शुरुआती और महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक माना जाता है। यह घटना उस समय हुई जब फाइनेंस मिनिस्टर जॉन माथाई थे और देश के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे।

उस समय भारत अभी हाल ही में स्वतंत्र हुआ था, और बजट तैयार करने और पेश करने की प्रक्रिया आज जितनी कड़ी नहीं थी। 1950 में यह हुआ कि बजट की कुछ पेज़ राष्ट्रपति भवन के प्रेस से लीक हो गए, जहाँ इन्हें संसद में पेश करने से कुछ घंटे पहले छापा जा रहा था।

इस लीक के कारण पत्रकारों के पास संवेदनशील जानकारी पहले से पहुँच गई, जिससे मीडिया में हड़कंप मच गया।

इस मामले में जॉन माथाई पर शक्तिशाली लोगों के हित में काम करने का आरोप लगा और बजट पेश करने के कुछ समय बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।

बजट प्रिंटिंग का स्थान बदला गया

उस समय बजट राष्ट्रपति भवन में छपता था। लीक के बाद, बजट की गोपनीयता बनाए रखने के लिए इसे दिल्ली के मिंटो रोड स्थित सरकारी प्रेस में छापना शुरू किया गया।

बाद में, 1980 में नॉर्थ ब्लॉक की बेसमेंट में बजट कागजात छापने की स्थायी व्यवस्था की गई।

First Published - January 13, 2026 | 11:28 AM IST

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