भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) कॉरपोरेट बिजनेस करेस्पॉन्डेंट (बीसी) चैनलों के लिए लाइसेंस व्यवस्था शुरू करने पर विचार कर सकता है। यह ऐसा कदम है, जो वर्तमान में नियमन के दायरे से बाहर की फिनटेक कंपनियों को नियामक की सीधी निगरानी में लाएगा। इस मामले से जुड़े 3 लोगों ने यह जानकारी दी।
बैंकिंग करेस्पॉन्डेंट की व्यवस्था में अनियमितता संबंधी चिंताओं के बाद बैंकिंग नियामक इस पर विचार कर रहा है, जिसमें एजेंटों द्वारा डायरेक्ट मनी ट्रांसफर (डीएमटी) सीमा का उल्लंघन और कुछ कारोबारियों द्वारा भुगतान ऐप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (एपीआई) का अनधिकृत उपयोग शामिल है।
इस समय कॉरपोरेट बीसी के रूप में काम करने वाली फिनटेक कंपनियां सीधे रिजर्व बैंक के नियमन के दायरे में नहीं हैं। इसके बजाय पार्टनर बैंकों को उन संस्थाओं के कामकाज के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है, जिनसे उनका अनुबंध होता है या वे उनकी नियुक्ति करते हैं।
इस मामले से अवगत एक व्यक्ति ने कहा, ‘बीसी बिजनेस में कुछ तनाव है। यह तनाव धोखाधड़ी और धनशोधन जैसे मसलों से जुड़ा हुआ है। रिजर्व बैंक का विचार है कि इसके लिए लाइसेंस के साथ सीधे नियमन की जरूरत है।’
एक अन्य सूत्र के अनुसार पिछले महीने भुगतान उद्योग की एक बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई, जिसमें नियामक और उद्योग के प्रतिभागी शामिल थे।
खबर छपने के लिए भेजे जाने तक इस मामले में रिजर्व बैंक ने पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया था।
इस सिलसिले में चल रही बातचीत से जुड़े लोगों ने कहा कि उद्योग के प्रतिनिधियों ने पहले ऐसी कंपनियों को विनियमित संस्थाओं के रूप में संचालित करने के लिए अधिकृत करने की मांग की है।
एक दूसरे सूत्र ने कहा, ‘बीसी व्यवस्था के तहत लाने के लिए और अधिक कामकाज की क्षमता होनी चाहिए। कॉरपोरेट बीसी को प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (पीपीआई) और पेमेंट एग्रीगेटर्स (पीए) की तरह एक विनियमित इकाई बनाया जा सकता है।’
इस समय इस सेग्मेंट में काम करने वाली कुछ फिनटेक ने लेनदेन संबंधी गतिविधियों के लिए अलग से भुगतान लाइसेंस प्राप्त कर लिया है, जिसकी वजह से उनके कुछ कामकाज रिजर्व बैंक की सीधी निगरानी में हैं। इसमें पीपीआई और पेमेंट एग्रीगेटर्स के लाइसेंस शामिल हैं।
हाल के महीनों में उद्योग ने पाया कि बीसी नेटवर्क एजेंट डीएमटी सीमा तोड़ रहे हैं, जो अभी अधिकतम 25,000 रुपये प्रति माह है और लेन देन की मात्रा निर्धारित सीमा से कई गुना है। इससे बैंक द्वारा उपलब्ध कराई गई एपीआई सुविधा का दुरुपयोग इस मसले को जटिल बना रहा है और धनशोधन को लेकर चिंता बढ़ी है।
उपरोक्त उल्लिखित एक व्यक्ति ने कहा, ‘इसका मकसद व्यवस्था के भीतर बेहतर तालमेल और मानकीकरण करना है।’
देश के दूरदराज के इलाकों में वुनियादी सेवाएं देने के लिए वित्तीय संस्थान और कंपनियां बिजनेस करेस्पॉन्डेंट तैनात करती हैं। ग्राहक सेवा केंद्रों के माध्यम से जमा, निकासी और बैंक खाता खोलने जैसी सुविधाएं दी जाती है।