भारत के बढ़ते क्रेडिट मार्केट में अब लोग लोन और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कैसे करते हैं, यह उनकी आर्थिक फैसलों को बहुत हद तक तय करता है। क्रेडिट स्कोर से लोन मिलना, ब्याज की दर और कुछ खास फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स के लिए योग्यता तय होती है। लेकिन बहुत से लोग इसे तब तक नहीं समझ पाते जब तक उनकी कोई एप्लीकेशन रिजेक्ट नहीं हो जाती।
फिनटेक प्लेटफॉर्म ZET के सह-संस्थापक और CEO मनीष शारा के मुताबिक, अच्छा क्रेडिट स्कोर एक बार में नहीं बनता। वो कहते हैं, “यह छोटी-छोटी आदतों को लगातार फॉलो करने से बनता है।”
उन्होंने ये भी बताया कि 2026 की शुरुआत में लेंडर्स अब क्रेडिट डेटा पर पहले से ज्यादा भरोसा कर रहे हैं ताकि उधारकर्ता के रिस्क का आकलन कर सकें।
शारा ने कहा कि पेमेंट हिस्ट्री क्रेडिट स्कोर पर सबसे ज्यादा असर डालती है। EMI या क्रेडिट कार्ड का बिल थोड़ा भी लेट हुआ तो वह क्रेडिट रिपोर्ट में दर्ज हो जाता है और महीनों तक स्कोर पर बुरा प्रभाव डालता रहता है। जिन लोगों का क्रेडिट हिस्ट्री छोटा है, उन पर इसका असर और भी ज्यादा होता है।
उन्होंने सलाह दी कि ड्यू डेट मिस न हो इसके लिए रिमाइंडर लगाएं या ऑटो-डेबिट करवा लें। समय पर पेमेंट करने से लेंडर्स को लगता है कि आप भरोसेमंद हैं, चाहे आपकी इनकम कितनी भी हो।
क्रेडिट यूजेशन यानी उपलब्ध क्रेडिट लिमिट में से कितना इस्तेमाल कर रहे हैं, यह भी लेंडर्स बहुत ध्यान से देखते हैं। शारा ने बताया कि अगर आप अपनी लिमिट का बहुत बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर रहे हैं तो लेंडर्स को चिंता होती है, भले ही आप समय पर पेमेंट कर दें। इससे लगता है कि आप क्रेडिट पर ज्यादा निर्भर हैं।
उन्होंने कहा कि कुल क्रेडिट लिमिट का 30 फीसदी से कम इस्तेमाल करना जिम्मेदार व्यवहार माना जाता है।
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मिनिमम ड्यू सिर्फ डिफॉल्ट से बचाने के लिए होता है, लंबे समय तक कर्ज मैनेज करने के लिए नहीं। शारा ने चेतावनी दी कि हर महीने सिर्फ मिनिमम अमाउंट भरने से ब्याज बहुत बढ़ जाता है और क्रेडिट प्रोफाइल भी कमजोर हो सकती है।
उन्होंने कहा कि क्रेडिट कार्ड का पूरा बकाया भरना कर्ज को कंट्रोल में रखता है और लंबे समय तक फाइनेंशियल डिसिप्लिन दिखाता है।
हर लोन या क्रेडिट कार्ड एप्लीकेशन से क्रेडिट रिपोर्ट पर हार्ड एनक्वायरी होती है। शारा कहते हैं कि थोड़े समय में कई एनक्वायरी होने से लगता है कि आप फाइनेंशियल स्ट्रेस में हैं, खासकर जिनका क्रेडिट हिस्ट्री कम है।
उन्होंने सलाह दी कि क्रेडिट के लिए सिर्फ तब अप्लाई करें जब सच में जरूरत हो और एप्लीकेशन को थोड़ा-थोड़ा समय देकर करें ताकि क्रेडिट प्रोफाइल अच्छी बनी रहे।
क्रेडिट हिस्ट्री की लंबाई स्कोरिंग में बहुत अहम है। शारा ने बताया कि पुराने क्रेडिट कार्ड्स दिखाते हैं कि आपने कितने साल से क्रेडिट को अच्छे से मैनेज किया है।
ऐसे अकाउंट्स को एक्टिव रखना क्रेडिट हेल्थ के लिए फायदेमंद होता है, जब तक कि उनमें हाई फीस या सिक्योरिटी का खतरा न हो।
शारा ने जोर दिया कि क्रेडिट स्कोर रातोंरात नहीं सुधरता। यह समय पर पेमेंट, बैलेंस कम रखने और क्रेडिट का सावधानी से इस्तेमाल करने जैसी लगातार आदतों से मजबूत होता है।
शारा ने सलाह दी कि अगर 2026 में ये आदतें चलती रहेंगी तो यह चुपके-चुपके आपके लिए क्रेडिट आसानी से और सस्ते दाम पर उपलब्ध करवाएंगी। क्रेडिट को शॉर्ट-टर्म सॉल्यूशन की बजाय लंबे समय की जिम्मेदारी मानने से व्यक्ति की फाइनेंशियल पोजीशन लंबे समय में मजबूत बनती है।