SEBI ने शुक्रवार को म्यूचुअल फंड के नियमों में बड़े पैमाने पर बदलाव की अधिसूचना जारी कर दी। ये बदलाव करीब 30 साल पुराने ढांचे को पूरी तरह नया रूप देने वाले हैं। नए नियमों से खर्चों की संरचना बदलेगी, जानकारी देने के तरीके और सख्त होंगे, साथ ही फंड हाउस की गवर्नेंस भी मजबूत होगी। ये सारे बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू हो जाएंगे।
नए नियमों की सबसे खास बात ये है कि अब म्यूचुअल फंड स्कीम्स अपना बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) परफॉर्मेंस के आधार पर चार्ज कर सकेंगी, लेकिन इसके लिए SEBI के तय शर्तों का पालन करना होगा। SEBI ने साफ कहा है कि ऐसी स्कीम्स को खर्च के ढांचे और उसकी जानकारी देने के नियमों का हमेशा पालन करना होगा।
अब तक जो टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) था, उसमें सब कुछ मिला-जुला रहता था। अब बेस एक्सपेंस रेशियो सिर्फ एसेट मैनेजमेंट कंपनी के मैनेजमेंट फीस तक सीमित होगा। ब्रोकरेज, सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT), स्टैंप ड्यूटी, एक्सचेंज फीस जैसी चीजें अलग से दिखानी होंगी। इससे निवेशकों को असल खर्च का सही-साफ पता चलेगा।
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ब्रोकरेज पर भी कैप कम कर दिया गया है। कैश मार्केट में ब्रोकरेज की सीमा अब 6 बेसिस पॉइंट्स (bps) रह गई है, जो पहले करीब 8.59 bps थी। डेरिवेटिव्स में ये 2 bps हो गई है, पहले 3.89 bps थी। इससे बड़े फंड्स पर असर पड़ सकता है, लेकिन पारदर्शिता बढ़ेगी।
एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी के एमडी और सीईओ नवनीत मुनोट ने कहा, “बड़े फंड्स पर असर तो पड़ेगा, लेकिन ये बाजार नियामक का पारदर्शिता बढ़ाने का एक और अच्छा कदम है।”
नए नियमों से ट्रस्टी और फंड हाउस के बड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी, जिससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत होगा।