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‘स्टार्टअप इंडिया मिशन ने बदली भारत की तस्वीर’, प्रधानमंत्री मोदी बोले: यह एक बड़ी क्रांति है

प्रधानमंत्री ने कहा,‘केवल 10 वर्षों में स्टार्टअप इंडिया मिशन एक क्रांति में तब्दील हो गया है। भारत वर्तमान में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप केंद्र बन चुका है।’

Last Updated- January 16, 2026 | 10:44 PM IST
Narendra Modi
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी | फाइल फोटो

वर्ष 2016 में शुरू हुए स्टार्टअप इंडिया मिशन ने एक दशक पूरा कर लिया है। इस अवधि में भारत का स्टार्टअप तंत्र परिपक्व चरण में पहुंच गया है। यह ऐसा चरण है जो सफल आरंभिक सार्वजनिक निर्गमों (आईपीओ) और टिकाऊ एव दीर्घकालिक कारोबारी ढांचे की तरफ बढ़ते रुझान के लिए खास तौर पर जाना जाता है।

देश का आईपीओ बाजार कैलेंडर वर्ष 2025 में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। कोटक इन्वेस्टमेंट बैंकिंग की एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में आईपीओ की मात्रा सालाना आधार पर 13 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ 1,89,020 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल साल सूचीबद्धता के लिए स्टार्टअप कंपनियों की लंबी कतार दिखी।

इसमें लेंसकार्ट, ग्रो, मीशो और फिजिक्सवाला सहित 18 स्टार्टअप इकाइयां सार्वजनिक हुईं और उन्होंने संयुक्त रूप से 41,000 करोड़ रुपये से अधिक रकम जुटाई। वर्ष 2024 में स्टार्टअप इकाइयों ने प्राथमिक बाजार से 29,000 करोड़ रुपये जुटाए थे।

इन शानदार आंकड़ों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को स्टार्टअप इंडिया मिशन को एक क्रांति बताया। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में इस मिशन ने देश के उद्यमशीलता परिदृश्य को बदल दिया है।

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भारत मंडपम में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा,‘केवल 10 वर्षों में स्टार्टअप इंडिया मिशन एक क्रांति में तब्दील हो गया है। भारत वर्तमान में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप केंद्र बन चुका है। दस साल पहले देश में 500 से भी कम स्टार्टअप इकाइयां थीं मगर अब यह संख्या बढ़कर 2,00,000 से अधिक हो गई है। वर्ष 2014 में केवल चार यूनिकॉर्न थीं मगर अब देश में ऐसी 125 से अधिक इकाइयां हैं।’

इसके अलावा मोदी ने स्टार्टअप को आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) समर्थित नवाचारों पर ध्यान केंद्रित करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा,‘अब हमें भविष्य के लिए स्वयं को तैयार करने और नए विचारों पर काम करने की जरूरत है। कई नए क्षेत्र तेजी से उभर रहे हैं। एआई तकनीक इनमें एक है जो रणनीतिक सुरक्षा और स्वायत्तता में अहम भूमिका निभाएगी। भविष्य में किसी राष्ट्र की ताकत और उसकी प्रतिस्पर्द्धी क्षमता इस बात पर निर्भर करेगी कि उसने एआई नवाचार में कितनी प्रगति की है। भारत में स्टार्टअप तंत्र को इस प्रयास का नेतृत्व करना चाहिए।’

प्रधानमंत्री ने इस बात का भी जिक्र किया कि सरकार ने स्टार्टअप इकाइयों के लिए राह आसान बना दी है। मोदी ने कहा कि अनुपालन से जुड़ी औपचारिकताएं सरल करने, इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित करने, निजी कंपनियों के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र खोलने, 1 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष और डीप-टेक फंड्स ऑफ फंड्स जैसे उपाय किए गए हैं।

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मोदी ने कुछ आंकड़ों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 48 प्रतिशत स्टार्टअप इकाइयों का नेतृत्व महिलाओं के हाथों में हैं (कम से कम एक महिला निदेशक के साथ) और स्टार्टअप के लिए फंड्स ऑफ फंड्स योजना के पहले संस्करण के तहत अब तक 25,000 करोड़ रुपये से अधिक आवंटित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि केवल 2025 में उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा 44,000 से अधिक इकाइयों को मान्यता दी गई।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की कमान संभालने वाले केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि वर्तमान में 80 प्रतिशत घरेलू स्टार्टअप एआई पर आधारित हैं और डिजाइन लिंक्ड इन्सेंटिव (डीएलआई) योजना ने आज तक 23 स्टार्टअप को सहायता दी है।

वैष्णव ने एक सोशल मीडिया पर अपने एक पोस्ट  में कहा,‘भारत का डीप-टेक स्टार्टअप ढांचा केंद्रित नीति और वित्तीय समर्थन से संचालित हो रहा है। अब हमारे 80 प्रतिशत स्टार्टअप एआई तकनीक के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत डीएलआई  योजना ने अब तक 23 स्टार्टअप इकाइयों को मदद पहुंचाई है। संस्थागत वित्त पोषण के लिए सेमीकॉन इंडिया 2025 में 1 अरब डॉलर के इंडिया डीप टेक एलायंस की घोषणा की गई।’

कई उद्यमियों (वेंचर कैपिटलिस्ट) ने भी स्टार्टअप तंत्र और पिछले एक दशक में इसके विकास की सराहना की।

रुकाम कैपिटल की संस्थापक अर्चना जहागीरदार ने कहा कि जोर निर्णायक रूप से टिकाऊ और दीर्घकालिक बिजनेस मॉडल पर दिया जा रहा है और आईपीओ बाजार में दमदार तेजी दिख रही है।

जहागीरदार ने कहा, ‘वर्ष 2021-22 से भारत का आईपीओ बाजार संरचनात्मक रूप से अधिक मजबूत हो गया गया जिसमें तकनीक आधारित कंपनियां आगे आईं। उनके बाद दूसरे क्षेत्र में भी तेज बदलाव दिखने लगे। 2024 और 2025 यह सिलसिला बरकरार रहा है और भारी भरकम रकम जुटाई गई है।’

ऐंजल इन्वेस्टर के लॉयड मथायस  ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बड़ी स्टार्टअप इकाइयां आईपीओ निवेशकों के लिए मुनाफा कमाने का बेहतरीन विकल्प साबित हुई हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 से पहले निवेश करने के बाद निकलना आसान नहीं था क्योंकि बहुत कम स्टार्टअप इकाइयां आईपीओ तक पहुंचने में कामयाब रहीं।

First Published - January 16, 2026 | 10:41 PM IST

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