विदेश मंत्रालय ने आज कहा कि ईरान के चाबहार बंदरगाह को प्रतिबंध से छूट दिए जाने के मुद्दे पर अमेरिका से बातचीत हो रही है। अमेरिकी प्रतिबंधों के मद्देनजर रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण समझे जाने वाले इस बंदरगाह की दीर्घकालिक व्यवहार्यता के बारे में चिंता जताई जा रही है।
मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘जैसा आप जानते हैं कि 28 अक्टूबर, 2025 को अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने 26 अप्रैल, 2026 तक वैध सशर्त प्रतिबंध छूट पर मार्गदर्शन देने वाला एक पत्र जारी किया था। हम इस व्यवस्था को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिकी पक्ष के साथ काम कर रहे हैं।’
यह खबर ऐसे समय में आई है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इससे चाबहार बंदरगाह में भारत की भागीदारी पर चिंता जताई गई थी।
ट्रंप ने इस सप्ताह की शुरुआत में एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ व्यापार करने वाला कोई भी देश अमेरिका के साथ किए जा रहे सभी व्यापार पर 25 फीसदी टैरिफ का तत्काल प्रभाव से भुगतान करेगा। यह आदेश अंतिम और निर्णायक है।’ साल 2024 में चाबहार बंदरगाह के दो में से एक टर्मिनल- शहीद बेहेश्ती टर्मिनल- को भारत द्वारा बंदरगाह के संचालन के लिए एक दीर्घकालिक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद नया जीवन मिला था। इस अनुबंध के तहत 37 करोड़ डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई गई थी।
मगर ईरान के परमाणु कार्यक्रम के कारण बढ़ते तनाव और व्यापार समझौते पर भारत के साथ गतिरोध के बीच अमेरिका ने पिछले साल भारत की रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं को एक बड़ा झटका दिया।
सितंबर 2025 में अमेरिका के विदेश मंत्री ने अफगानिस्तान पुनर्निर्माण सहायता एवं आर्थिक विकास के लिए ईरान फ्रीडम ऐंड काउंटर प्रोलिफरेशन ऐक्ट (आईएफसीए) के तहत 2018 में जारी छूट को 29 सितंबर से रद्द कर दिया था। बयान में कहा गया, ‘एक बार निरसन प्रभावी होने के बाद जो लोग चाबहार बंदरगाह का संचालन करते हैं या आईएफसीए में वर्णित अन्य गतिविधियों में संलग्न होते हैं, वे आईएफसीए के तहत खुद को प्रतिबंधों के दायरे में देख सकते हैं।’
अक्टूबर में जायसवाल द्वारा संदर्भित सशर्त छूट अमेरिका द्वारा दी गई थी। भारत बंदरगाह में अपनी उपस्थिति को रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण मानता है, क्योंकि यह पाकिस्तान और चीनी निवेश वाले पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह के पास है। अमेरिका-ईरान तनाव और बंदरगाह में भारत के अपने रणनीतिक हितों पर तेजी से बदलते घटनाक्रम को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को भविष्य के लिए इस मुद्दे पर सतर्क रुख के साथ चलना होगा। थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के उपाध्यक्ष हर्ष पंत ने कहा, ‘चाबहार का भविष्य ईरान में हो रहे घटनाक्रम पर टिका है। इसलिए भारत को अभी स्थिति पर नजर रखते हुए इंतजार करना होगा। मुझे नहीं लगता कि इस समय भारत कुछ ज्यादा कर सकता है।’
पिछले सितंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एससीओ शिखर सम्मेलन में इस बंदरगाह के भारत के लिए महत्त्व पर जोर दिया गया था। पंत ने कहा कि वाणिज्यिक मोर्चे पर बंदरगाह से व्यापार की मात्रा कम होने के कारण भारत के लिए अभी व्यावसायिक प्रभाव प्राथमिकता नहीं होगी। एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि मध्य एशियाई देशों के लिए निर्बाध वाणिज्यिक कनेक्टिविटी की संभावनाएं बंदरगाह के स्थिर संचालन पर निर्भर हैं।