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Explainer: ₹14 लाख की CTC वाला व्यक्ति न्यू टैक्स रिजीम में एक भी रुपया टैक्स देने से कैसे बच सकता है?

एक्सपर्ट के मुताबिक, ₹14 लाख CTC वाले कर्मचारी स्टैण्डर्ड डिडक्शन और एम्प्लॉयर EPF‑NPS योगदान सही तरीके से इस्तेमाल करके इनकम टैक्स देने से बच सकते हैं

Last Updated- January 16, 2026 | 6:10 PM IST
Income Tax
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

हर नौकरीपेशा व्यक्ति की सैलरी स्लिप में एक लाइन होती है, जिसे देखकर सबसे पहले माथा ठनकता है वो है CTC। और जब ये CTC 12 लाख रुपये को पार कर जाती है तो ज्यादातर लोग मान लेते हैं कि अब टैक्स देना तो तय है। कई बार तो यह सोचकर ही खुशी आधी रह जाती है कि मोटी सैलरी का बड़ा हिस्सा टैक्स में चला जाएगा। लेकिन सच इससे थोड़ा अलग है।

हकीकत यह है कि CTC और टैक्स के बीच का रिश्ता उतना सीधा नहीं जितना दिखता है। सही जानकारी और थोड़ी समझदारी से की गई टैक्स प्लानिंग से ऐसा भी हो सकता है कि 14 लाख रुपये तक की CTC होने के बावजूद इनकम टैक्स जीरो रहे। सरकार के नए टैक्स नियमों, स्टैण्डर्ड डिडक्शन और कुछ कानूनी छूटों ने इस रास्ते को आसान बना दिया है।

यह कोई जुगाड़ या नियमों से बचने की चाल नहीं है, बल्कि वही सुविधाएं हैं जो खुद टैक्स सिस्टम में दी गई हैं। बस जरूरत है इन्हें सही तरीके से समझने और इस्तेमाल करने की।

न्यू टैक्स रिजीम में ₹14 लाख CTC पर टैक्स के फायदे

ClearTax की टैक्स एक्सपर्ट CA शेफाली मुद्रा कहती हैं कि न्यू टैक्स रिजीम (Section 115BAC) के तहत FY 2025–26 में, 14 लाख रुपये की CTC वाले सैलरी कर्मचारी अपनी टैक्स जिम्मेदारी को काफी कम कर सकते हैं, क्योंकि 12.75 लाख रुपये तक की इनकम असल में टैक्स‑फ्री हो जाती है।

ये इसलिए संभव है क्योंकि सभी सैलरीधारक 75,000 रुपये का स्टैण्डर्ड डिडक्शन लेने के हकदार हैं। अगर इस डिडक्शन के बाद टैक्सेबल इनकम 12 लाख रुपये या उससे कम हो, तो Section 87A की छूट के तहत (अधिकतम 60,000 रुपये तक) पूरा टैक्स ऑफसेट हो जाता है और टैक्स जीरो हो जाता है।

इसके अलावा, एम्प्लॉयर का EPF में योगदान (बेसिक सैलरी का 12% तक) और NPS में योगदान (बेसिक सैलरी का 14% तक, Section 80CCD(2) के तहत डिडक्टेबल) टैक्स‑फ्री होता है और टैक्सेबल इनकम में शामिल नहीं होता।

हालांकि, ओल्ड टैक्स रिजीम की तरह 80C या 80D जैसी कटौतियां न्यूज रिजीम में नहीं मिलतीं, लेकिन स्टैण्डर्ड डिडक्शन, कम स्लैब दरें, पूरी Section 87A छूट और टैक्स‑फ्री एम्प्लॉयर योगदान के कॉम्बिनेशन से अगर 14 लाख रुपये की CTC का कुछ हिस्सा EPF और NPS में रखा जाए, तो टैक्सेबल इनकम 12 लाख रुपये या उससे नीचे आ सकती है। इससे 12.75 लाख रुपये तक की कुल सैलरी असल में टैक्स‑फ्री हो जाती है।

Also Read: Budget 2026 से क्रिप्टो इंडस्ट्री की बड़ी उम्मीदें! क्या इसको लेकर बदलेंगे रेगुलेशन और मिलेगी टैक्स में राहत?

EPF और NPS में एम्प्लॉयर के योगदान से टैक्स और CTC का स्ट्रक्चर

शेफाली मुद्रा कहती हैं कि हां, न्यूज टैक्स रिजीम में EPF और NPS में एम्प्लॉयर योगदान का सही इस्तेमाल करके पूरी टैक्स जिम्मेदारी जीरो की जा सकती है, बशर्ते सैलरी स्ट्रक्चर ऐसा हो।

अभी के नियमों के अनुसार, एम्प्लॉयर का EPF में योगदान (बेसिक का 12%) और एम्प्लॉयर का NPS में योगदान (बेसिक का 14% निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए, Section 80CCD(2) के तहत डिडक्टेबल) टैक्स‑फ्री हैं और इसलिए टैक्सेबल इनकम में नहीं जुड़ते, भले ही ये CTC का हिस्सा हों।

इस ट्रिक को काम में लाने के लिए बेसिक सैलरी जरूरी है, क्योंकि EPF और NPS दोनों योगदान बेसिक सैलरी का प्रतिशत होते हैं। अगर CTC में बेसिक सैलरी का एक हिस्सा ठीक से रखा जाए और उसका कुछ हिस्सा EPF और NPS में रूट किया जाए, तो स्टैण्डर्ड डिडक्शन के साथ मिलाकर टैक्सेबल इनकम 12 लाख या उससे नीचे आ सकती है, जिससे पूरी Section 87A छूट मिल जाती है और टैक्स बिल जीरो हो जाता है।

असल में, टैक्स बचत का असर भत्तों या रिइम्बर्समेंट से नहीं, बल्कि रिटायरमेंट‑लिंक्ड एम्प्लॉयर के योगदान से आता है जो बेसिक सैलरी पर निर्भर करता है।

₹14 लाख CTC को टैक्स‑फ्री बनाने का गुणा-गणित

शेफाली का कहना है कि एक सैलरीधारक न्यू टैक्स रिजीम में स्टैण्डर्ड डिडक्शन + टैक्स‑फ्री एम्प्लॉयर योगदान (EPF और NPS) का सही कॉम्बिनेशन करके 14 लाख रुपये CTC को टैक्स‑फ्री बना सकता है।

उदाहरण के लिए, अगर किसी कर्मचारी की CTC 14 लाख रुपये है और बेसिक सैलरी 7 लाख रुपये है:

  • एम्प्लॉयर EPF में 12% बेसिक (84,000 रुपये) योगदान करता है
  • एम्प्लॉयर NPS में 14% बेसिक (98,000 रुपये) योगदान करता है

ये दोनों टैक्स‑फ्री योगदान माने जाते हैं। इसके अलावा, कर्मचारी 75,000 रुपये का स्टैण्डर्ड डिडक्शन भी ले सकता है।

इन सबके कॉम्बिनेशन से टैक्सेबल इनकम 12 लाख रुपये या उससे नीचे आ जाती है और इस तरह 14 लाख रुपये की CTC असल में टैक्स‑फ्री बन जाती है।

Particulars Amount
Total CTC ₹14,00,000
Less: Standard deduction (₹75,000)
Less: Employer EPF (12% of basic) (₹84,000)
Less: Employer NPS (14% of basic, Sec 80CCD(2)) (₹98,000)
Taxable income ₹11,43,000

Section 87A से टैक्स जीरो कैसे हो जाता है?

शेफाली बताती हैं चूंकि टैक्सेबल इनकम 12 लाख रुपये से काफी कम है, इसलिए जो भी टैक्स कंप्यूट होता है, उसे Section 87A की छूट पूरी तरह ऑफसेट कर देती है। नतीजा यह होता है कि टैक्स बिल जीरो हो जाता है।

सार में, अगर कोई कर्मचारी 14 लाख की CTC ले रहा है और उसकी CTC का कुछ हिस्सा एम्प्लॉयर द्वारा EPF और NPS योगदान में रखा गया है, खासकर 14% एम्प्लॉयर NPS का हिस्सा सही तरीके से इस्तेमाल किया गया हो, तो न्यू टैक्स रिजीम में वह कानूनी तरीके से कोई इनकम टैक्स नहीं देगा।

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न्यू टैक्स रिजीम में केवल एम्प्लॉयर के योगदान पर कटौती

न्यू टैक्स रिजीम में कटौती केवल एम्प्लॉयर के EPF और NPS योगदान पर मिलती है, कर्मचारी के खुद के योगदान पर नहीं।

  • एम्प्लॉयर का EPF में योगदान (बेसिक का 12%) और NPS में योगदान (बेसिक का 14% प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए, Section 80CCD(2) के तहत) टैक्स‑फ्री है और सीधे टैक्सेबल इनकम को कम करता है।
  • इसके विपरीत, कर्मचारी द्वारा दिया गया EPF या NPS योगदान न्यू रिजीम में कटौती योग्य नहीं है। ये रकम टैक्सेबल इनकम में जोड़ दी जाती है।
  • कर्मचारी अपनी NPS योगदान पर Section 80CCD(1B) के तहत कटौती सिर्फ ओल्ड टैक्स रिजीम में ले सकता है, न्यू में नहीं।

इसलिए न्यू रिजीम में टैक्स‑बचत का बड़ा रास्ता सिर्फ एम्प्लॉयर का योगदान (EPF और NPS) है, कर्मचारी के खुद के योगदान से नहीं।

CTC स्ट्रक्चर बदलने का टैक्स और रिटायरमेंट पर असर

शेफाली मुद्रा कहती हैं कि अगर आप अपनी CTC में बेसिक सैलरी और अलाउंस का स्ट्रक्चर बदलते हैं, तो इसका असर टैक्स बचत और रिटायरमेंट फंड दोनों पर पड़ता है।

  • बेसिक सैलरी बढ़ाने से EPF और NPS जैसे रिटायरमेंट‑लिंक्ड योगदान का हिस्सा बढ़ जाता है, क्योंकि ये दोनों बेसिक + DA का प्रतिशत होते हैं।
  • हाल की लेबर कोड अपडेट्स के चलते कई कंपनियां बेसिक सैलरी का हिस्सा बढ़ा रही हैं (जैसे कम से कम 50% CTC तक), जिससे एम्प्लॉयर EPF/NPS योगदान और रिटायरमेंट फंड दोनों बढ़ते हैं।
  • इसका मतलब यह भी है कि टेकर‑होम सैलरी थोड़ी कम हो सकती है क्योंकि गैर-जरूरी अलाउंस घटा दिए जाते हैं, लेकिन टैक्सेबल इनकम कम होती है और टैक्स बचत बढ़ती है।

इस तरह, बेसिक सैलरी बढ़ाकर (और अलाउंस घटाकर) कर्मचारी टैक्स बचा सकता है और रिटायरमेंट फंड भी बड़ा बना सकता है, भले ही हर महीने टेकर‑होम रकम थोड़ी कम हो।

अगर एम्प्लॉयर NPS नहीं देता तो विकल्प क्या है?

शेफाली बताती हैं कि अगर एम्प्लॉयर NPS नहीं देता, तो 14 लाख रुपये तक CTC वाले कर्मचारी के पास टैक्स बचाने के कुछ विकल्प अभी भी हैं, लेकिन सीमित हैं क्योंकि न्यू रिजीम में 80C और 80D जैसी कटौतियां नहीं मिलती।

  • सभी सैलरीधारक 75,000 रुपये का स्टैण्डर्ड डिडक्शन ले सकते हैं, जो टैक्सेबल इनकम सीधे कम करता है।
  • एम्प्लॉयर का EPF योगदान (12% बेसिक तक) अभी भी टैक्स‑फ्री है और टैक्स कम करने में मदद करता है।
  • कर्मचारी का खुद का EPF/NPS में योगदान न्यू रिजीम में टैक्स‑सेविंग नहीं करता।

अगर एम्प्लॉयर NPS नहीं देता, तो टैक्स‑बचत के तरीके में सिर्फ स्टैण्डर्ड डिडक्शन और एम्प्लॉयर का EPF ही रह जाता है। इसके अलावा कर्मचारी या तो कुछ टैक्स देने के लिए तैयार होगा या ओल्ड टैक्स रिजीम में जाएगा।

ओल्ड रिजीम में 80C (EPF/PPF/ELSS), 80D (हेल्थ इंश्योरेंस), और 80CCD(1B) (NPS पर अतिरिक्त 50,000 रुपये) जैसी कटौतियां मिलती हैं। इन कटौतियों से टैक्सेबल इनकम बहुत कम हो सकती है (जैसे 80C से 1.5 लाख रुपये + 80CCD(1B) से 50,000 रुपये), इसलिए अक्सर दोनों रिजीम को चेक करना फायदेमंद होता है।

First Published - January 16, 2026 | 6:10 PM IST

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