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बजट से उम्मीदें: हेल्थकेयर, मेडिकल डिवाइस और फार्मा कंपनियों ने टैक्स राहत और R&D निवेश बढ़ाने की मांग की

यह मांग ऐसे समय में आई है जब जीएसटी को तर्कसंगत बनाने की कोशिश हो रही है जिसमें कई तैयार उपकरणों पर अब 5 फीसदी कर लगता है

Last Updated- January 08, 2026 | 10:56 PM IST
Healthcare

स्वास्थ्य, मेडिकल उपकरण और दवा बनाने वाली कंपनियों ने सरकार से कहा है कि वह केंद्रीय बजट 2026-27 के बजट में कर का बोझ कम करे ताकि घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ अनुसंधान, नवाचार और बीमारियों से बचाव के क्षेत्र में निवेश तेजी से बढ़ाया जा सके।

मेडिकल उपकरण बनाने वाली कंपनियों के संगठनों का कहना है कि जरूरी मेडिकल उपकरणों पर लगने वाले कुल कर (जैसे स्वास्थ्य उपकर, अधिभार और जीएसटी) का बोझ कुछ मामलों में 30 फीसदी तक पहुंच जाता है ऐसे में उन्होंने मांग की है कि इसे कम किया जाए। भारतीय चिकित्सा प्रौद्योगिकी संगठन (एमटीएआई) के अध्यक्ष पवन चौधरी ने कहा, ‘ज्यादा कर की वजह से गंभीर बीमारियों के इलाज, जैसे सर्जरी, गैर-संक्रामक बीमारियों (एनसीडी) के प्रबंधन और जांच का खर्चा बढ़ जाता है और इसके कारण परिवारों को आर्थिक परेशानी होती है।’

उन्होंने आगे कहा कि आपूर्ति श्रृंखला में दिक्कतों के कारण लागत बढ़ने से, शुल्क में थोड़ी सी कटौती अब कोई रियायत नहीं है बल्कि यह लोगों के लिए इलाज सस्ता रखने के लिए जरूरी है।

यह मांग ऐसे समय में आई है जब जीएसटी को तर्कसंगत बनाने की कोशिश हो रही है जिसमें कई तैयार उपकरणों पर अब 5 फीसदी कर लगता है, जबकि ज्यादातर इनपुट और इनपुट सेवाओं पर 18 फीसदी कर लगता है। हालांकि, उद्योग का कहना है कि सरकार ने जीएसटी में जो बदलाव किए हैं उससे उन्हें नुकसान हो रहा है क्योंकि उन्हें कर में छूट का फायदा नहीं मिल पा रहा है और विनिर्माताओं के लिए उनकी कार्यशील पूंजी का दबाव बढ़ रहा है।

पॉली मेडिक्योर के प्रबंध निदेशक हिमांशु वैद्य का कहना है, ‘अगर मेडिकल उपकरणों पर भी दवाओं जितना यानी 5 फीसदी ही जीएसटी लगे और इनपुट सेवाओं और पूंजीगत वस्तुओं पर दिए कर का रिफंड मिले तब कंपनियों को तुरंत राहत मिलेगी और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सबको बराबर का मौका मिलेगा।’

कंपनियों ने मांग की है कि कर को कम करने के साथ-साथ सरकार, शोध एवं विकास (आरऐंडडी) में, अच्छे सुविधा केंद्रों में और बीमारियों से बचने के लिए होने वाली जांच में भी निवेश करे। हिमांशु बैद्य ने कहा, ‘अगर सरकार 1,000 करोड़ रुपये का एक अलग फंड बनाती है, तो उससे भारत में बने मेडिकल उपकरण बेहतर होंगे और दुनिया में मुकाबला करने में मदद मिलेगी।’

भारत में 65 फीसदी मौतें पुरानी बीमारियों के कारण होती हैं और लोग बीमारियों से बचने के लिए जांच भी कम कराते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य सेवा उद्योग से जुड़ी संस्था नटहेल्थ ने सुझाव दिया है कि अगर कोई व्यक्ति आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के तहत बने अपने हेल्थ अकाउंट से बीमारियों से बचाव के लिए जांच कराता है तब उसे10,000 रुपये तक की कर छूट मिलनी चाहिए। इससे सरकार को लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा डिजिटल डेटा तैयार करने में मदद मिलेगी।

नटहेल्थ की अध्यक्ष अमीरा शाह ने कहा कि इससे लोग बीमारियों से बचने के लिए ज्यादा जांच कराएंगे, गैर-संक्रामक बीमारियों का जल्दी पता चल सकेगा और इलाज का खर्च और काम में होने वाला नुकसान कम हो जाएगा।

First Published - January 8, 2026 | 10:51 PM IST

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