मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि भारत की तीसरी सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी वोडाफोन आइडिया (वी) को अपने समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) बकाया पर 54,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की राहत मिल सकती है और बकाया के पुन: आकलन से इस राहत की रकम और बढ़ जाएगी।
ब्रोकरेज के विश्लेषकों ने एक नोट में कहा, ‘मौजूदा एजीआर रकम (87,700 करोड़ रुपये) और घोषित राहत उपायों के आधार पर, हम भारत सरकार से मिलने वाली असल एजीआर राहत का हिसाब 54,200 करोड़ रुपये (या वी के लिए लगभग 5 रुपये प्रति शेयर) लगाते हैं, जो 8 प्रतिशत ब्याज दर पर एनपीवी (नेट प्रेजेंट वैल्यू) के आधार पर एजीआर बकाया में लगभग 62 फीसदी की कटौती है।’
इसमें कहा गया है, ‘बेस एजीआर बकाया पर किसी भी रीअसेसमेंट यानी पुन: आकलन से वी को और भी ज्यादा राहत मिलेगी।’
सूत्रों के अनुसार, सरकार ने तीसरी सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी को सूचित करने के बाद सभी सर्कल स्तर पर एजीआर बकाया का मूल्यांकन शुरू कर दिया है। दूरसंचार विभाग (डीओटी) द्वारा अब फ्रीज किए गए बकाया पर कोई ब्याज नहीं लगाया जा रहा है, इसलिए दूरसंचार कंपनी को यह वचन देना होगा कि सरकार द्वारा पुनर्मूल्यांकन किए गए बकाया अंतिम होंगे और कंपनी उन बकाया का भुगतान करने के लिए बाध्य होगी।
सरकार ने आदित्य बिड़ला समूह की दूरसंचार कंपनी को भेजे अपने संचार में कहा है कि उसे मार्च 2026 से शुरू होकर छह वर्षों के लिए अधिकतम 124 करोड़ रुपये सालाना और फिर मार्च 2032 से चार वर्षों के लिए 100 करोड़ रुपये सालाना का भुगतान करना होगा। पुनर्मूल्यांकन और अंतिम रूप से तय किए गए बकाया का भुगतान मार्च 2036 से वार्षिक आधार पर मार्च 2041 तक शुरू होगा।