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ईरान से ट्रेड पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाएगा अमेरिका! भारत पर क्या होगा असर?

रूस से व्यापार पर पहले से ही भारी टैरिफ झेल रहा भारत, अब ईरान को लेकर भी अमेरिकी कार्रवाई की जद में आ सकता है

Last Updated- January 13, 2026 | 11:35 AM IST
US Iran Tariffs
Representational Image

US Iran tariffs plan: अमेरिका की ओर से लगाए गए 50 फीसदी तक के टैरिफ का सामना कर रहा भारत एक बार फिर अमेरिकी कार्रवाई की चपेट में आ सकता है। अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि वह ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने की योजना बना रहा है। सोमवार को (स्थानीय समय) अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर सरकार की सख्ती और हिंसक कार्रवाई के चलते यह कदम उठाया जा रहा है। ट्रंप के मुताबिक इन प्रदर्शनों में करीब 600 लोगों की मौत हुई है और हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

भारत के साथ-साथ चीन भी उन देशों में शामिल है, जिन पर इस फैसले का सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है, क्योंकि दोनों ईरान के बड़े व्यापारिक साझेदार हैं।

भारत-ईरान व्यापार संबंध

तेहरान स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, भारत ईरान के टॉप पांच व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। भारत ईरान को चावल, चाय, चीनी, दवाइयां, सिंथेटिक फाइबर, इलेक्ट्रिकल मशीनरी और नकली आभूषण जैसे उत्पाद निर्यात करता है। वहीं ईरान से भारत सूखे मेवे, ऑर्गेनिक और इनऑर्गेनिक केमिकल्स और कांच के सामान आयात करता है।

वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने ईरान को 1.24 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि 0.44 अरब डॉलर का आयात किया। इस तरह दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 1.68 अरब डॉलर रहा। हालांकि, यह आंकड़ा 2018 के मुकाबले काफी कम है।

ईरान को भारत के बड़े निर्यात

ट्रेडिंग इकनॉमिक्स के मुताबिक, 2024 में भारत के ईरान को प्रमुख निर्यात में अनाज सबसे आगे रहा। भारत ने ईरान को करीब 698.51 मिलियन डॉलर का अनाज निर्यात किया। इसके अलावा खाद्य उद्योग के अवशेष और पशु चारा, चाय-कॉफी और मसाले, फल और मेवे भी प्रमुख निर्यात में शामिल रहे।

ईरान से भारत का आयात

2024 में भारत का ईरान से सबसे बड़ा आयात ऑर्गेनिक केमिकल्स का रहा, जिसकी कीमत करीब 512.92 मिलियन डॉलर थी। इसके बाद फल और मेवे, मिनरल फ्यूल, तेल, नमक, सीमेंट, प्लास्टिक और अन्य केमिकल्स शामिल रहे।

US Iran Tariffs पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका यह अतिरिक्त टैरिफ लगाता है, तो भारत के लिए ईरान से जुड़ा सारा व्यापार और महंगा हो जाएगा। इससे भारत की पहले से दबाव में चल रही अर्थव्यवस्था पर और बोझ पड़ सकता है। अमेरिका पहले ही अगस्त से भारत के कई उत्पादों पर 50 फीसदी टैरिफ लगा चुका है। इसमें रूस से कच्चा तेल और हथियार खरीदने पर 25 फीसदी का जुर्माना भी शामिल है। इन टैरिफ का सबसे ज्यादा असर टेक्सटाइल और सीफूड सेक्टर पर पड़ा है। इसके अलावा रत्न और आभूषण तथा ऑटो पार्ट्स उद्योग भी दबाव में हैं।

US-भारत ट्रेड डील पर बातचीत जारी

दूसरी ओर, हालांकि भारत और अमेरिका दोनों ही देश यह कहते रहे हैं कि उनके आपसी रिश्ते अच्छे हैं और बातचीत जारी है, लेकिन अब तक कोई बड़ा व्यापार समझौता नहीं हो पाया है। सोमवार को भारत में अमेरिकी राजदूत का पद संभालने के बाद सर्जियो गोर ने कहा कि व्यापार को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत के लिए आज एक कॉल तय की गई है। उन्होंने कहा कि सच्चे दोस्त आपस में असहमति रख सकते हैं, लेकिन अंत में वे अपने मतभेद सुलझा लेते हैं।

First Published - January 13, 2026 | 11:35 AM IST

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