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70% सस्ता होम लोन बीमा! लेकिन क्या आप सही पॉलिसी चुन रहे हैं?

पॉलिसीबाजार के नोट के मुताबिक ऑनलाइन लोन इंश्योरेंस सस्ता है, पर समूह बनाम व्यक्तिगत कवर, भुगतान और प्रीमियम संरचना को समझना जरूरी।

Last Updated- January 16, 2026 | 9:01 AM IST
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पॉलिसीबाजार के एक हालिया नोट के अनुसार, ऑनलाइन होम लोन बीमा की समूचे अवधि की कुल लागत ऑफलाइन लोन बीमा की तुलना में 70 फीसदी तक कम हो सकती है। लेकिन कीमत तो सिर्फ शुरुआत है। होम लोन लेने वालों को यह भी ध्यान से देखना चाहिए कि बीमा कैसे काम करता है, भुगतान किसे मिलेगा और लोन बंद करने या ट्रांसफर करने पर क्या होगा।

समूह बनाम व्यक्तिगत

होम लोन बीमा दो प्रकार का होता है। पहला, जिसमें ऋणदाता सीधे ऋण से जुड़ा समूह बीमा प्रदान करते हैं। दूसरा, उधारकर्ता इसी उद्देश्य के लिए एक अलग व्यक्तिगत टर्म प्लान खरीद लेता है। समूह बीमा कवर सुविधा प्रदान करते हैं। इंश्योरेंस ब्रोकर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईबीएआई) के निदेशक वेंकटेश नायडू कहते हैं, ‘ऋणदाता इन्हें ऋण देने के चरण में जारी करते हैं, अक्सर सीमित चिकित्सा जांच और कम कवर के साथ देते हैं।’

हालांकि, ध्यान देने की बात यह है कि ऋणदाता अक्सर एकल प्रीमियम को मूल ऋण राशि यानी होम लोन में जोड़ देते हैं। इसकी वजह से उधारकर्ता को बीमा लागत पर वर्षों तक ब्याज चुकाना पड़ता है, जिससे कुल खर्च पहले दिन दिखने वाली राशि से काफी अधिक हो जाता है।

समूह ऋण आमतौर पर केवल ऋणदाता के जोखिम को ही कवर करते हैं, परिवार की व्यापक सुरक्षा आवश्यकताओं को नहीं। नायडू कहते हैं, ‘ऋण लेने वाले द्वारा ऋण का रीफाइनैंस या हस्तांतरण किए जाने पर ये कम प्रभावी और कम पोर्टेबल साबित हो सकते हैं। साथ ही, इनमें ऋण अवधि, अतिरिक्त लाभ और भुगतान संरचना के मामले में सीमित अनुकूलन की गुंजाइश होती है।’

व्यक्तिगत सावधि बीमा आम तौर पर प्रति रुपये के हिसाब से अधिक किफायती होता है, खासकर लंबी अवधि के लिए। ऋण की राशि कम होने पर भी बीमा कवर आमतौर पर स्थिर रहता है, जिससे जरूरत पड़ने पर परिवार को अतिरिक्त सुरक्षा मिल सकती है। ऋण का अवधि से पूर्व भुगतान, पुनर्वित्त या हस्तांतरण होने पर भी पॉलिसी उधारकर्ता के पास बनी रहती है। भुगतान नामांकित व्यक्ति को मिलता है, जिससे परिवार को अधिक नियंत्रण मिलता है।

स्टेवेल डॉट हेल्थ के सह-संस्थापक अरुण राममूर्ति कहते हैं,‘ग्रुप कवर उन उधारकर्ताओं के लिए उपयुक्त है जो सुविधा को प्राथमिकता देते हैं, मेडिकल चेक-अप नहीं कराना चाहते या जिन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं।’

कर्जदारों को इसे तभी चुनना चाहिए जब कीमतें प्रतिस्पर्धी हों और वे ऋण के माध्यम से प्रीमियम का भुगतान करने की वास्तविक लागत को समझते हों। नायडू कहते हैं, ‘अधिकांश वेतनभोगी और युवा कर्जदारों के लिए, जो ऋणदाता से स्वतंत्र रूप से मूल्य, लचीलापन और दीर्घकालिक सुरक्षा चाहते हैं, एक व्यक्तिगत सावधि योजना बेहतर काम करती है।’

क्या समान कवरेज चाहिए या कवरेज कम करनी होगी?

लेवल कवर के तहत, बीमा राशि स्थिर रहती है। रिड्यूसिंग कवर के तहत, यह बकाया ऋण के साथ घटती जाती है। राममूर्ति कहते हैं, ‘रिड्यूसिंग कवर सस्ता होता है और ऋण राशि पर अधिक सटीक रूप से नजर रखता है। दूसरी ओर, लेवल कवर परिवार को अतिरिक्त वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है।’

अगर उधारकर्ता को केवल ऋण सुरक्षा चाहिए, तो घटती हुई बीमा राशि उपयुक्त रहती है, क्योंकि समय के साथ जोखिम यानी बकाया मूलधन कम होता जाता है। हालांकि, ऋण राशि कम हो जाती है, लेकिन जीवन जोखिम नहीं। एक समान बीमा राशि वाली टर्म प्लान ऋण का बोझ कम होने के बाद भी सुरक्षा बनाए रखती है, जिससे परिवार की आय को बनाए रखने और बच्चों के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।

कम कवरेज मूल्यह्रास अनुसूची के अनुरूप हो

यदि उधारकर्ता घटते हुए कवर का विकल्प चुनता है, तो उसे यह जांचना चाहिए कि कवर में कमी करने की विधि किसी सामान्य तालिका के बजाय उसकी परिशोधन अनुसूची को दर्शाती है या नहीं। उन्हें ब्याज दर में कटौती की आवृत्ति (मासिक बनाम वार्षिक) की भी जांच करनी चाहिए, क्योंकि वार्षिक कटौती से साल के मध्य में ब्याज कवरेज में कमी आ सकती है। उधारकर्ताओं को यह पुष्टि करनी चाहिए कि ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव के कारण ऋण अवधि या समतुल्य मासिक किस्त (ईएमआई) में परिवर्तन होने पर ब्याज कवरेज समायोजित होता है या स्थिर रहता है।

कर्जदारों को वार्षिक आधार पर बीमा राशि का शेड्यूल प्राप्त करना चाहिए और उसकी तुलना ऋण परिशोधन तालिका से करनी चाहिए। राममूर्ति कहते हैं ,‘यह जांच लें कि कटौती मासिक, वार्षिक या किस्तों में होती है या नहीं, और सुनिश्चित करें कि बीमा कवरेज में कोई कमी न हो।’

भुगतान किसे मिलेगा?

ऋणदाता से जुड़ी समूह बीमा योजनाओं में, दावा राशि सीधे ऋणदाता को बकाया ऋण चुकाने के लिए दी जाती है। व्यक्तिगत सावधि योजनाओं में राशि नामांकित व्यक्ति को दी जाती है। परिवार की सुरक्षा के दृष्टिकोण से नॉमिनी के माध्यम से भुगतान आमतौर पर बेहतर होता है। नायडू कहते हैं, ‘यह परिवार को लचीलापन देता है: ऋण को तुरंत बंद कर दें या तत्काल जरूरतों के लिए धन का उपयोग करें और योजनाबद्ध तरीके से पुनर्भुगतान का प्रबंधन करें।’
राममूर्ति के अनुसार, नॉमिनी को भुगतान आमतौर पर बेहतर होता है, क्योंकि इससे परिवार को धनराशि पर नियंत्रण मिलता है। वह कहते हैं, ‘ऋण लेने वाले पॉलिसी को ऋणदाता को हस्तांतरित न करके इसे सुनिश्चित कर सकते हैं।’

सिंगल प्रीमियम या रेगुलर प्रीमियम?

कई उधारकर्ता ऋण देनदारी को कवर करने के लिए एकमुश्त प्रीमियम का विकल्प चुनते हैं। यह प्रीमियम आमतौर पर नियमित प्रीमियम से कम होता है। बंधन लाइफ के मुख्य उत्पाद एवं विपणन अधिकारी मनीष मिश्र कहते हैं, ‘यह ऋण अवधि के दौरान मन की शांति प्रदान करता है, क्योंकि इससे देनदारी कवर हो जाती है और परिवार को ऋण देनदारी के बजाय एक संपत्ति विरासत में मिलती है।’

नियमित प्रीमियम योजना से लागत समय के साथ विभाजित हो जाती है, नकदी प्रवाह में बेहतर स्थिरता मिलती है, और उधारकर्ता द्वारा समय से पहले भुगतान या पुनर्वित्त करने पर लचीलापन भी मिलता है। चुनाव उधारकर्ता की नकदी प्रवाह की स्थिरता और समय से पहले भुगतान की संभावनाओं पर निर्भर होना चाहिए।

जब ऋणदाता ऋण में एकल प्रीमियम जोड़ते हैं

कभी-कभी, ऋणदाता एकल प्रीमियम को ऋण राशि में जोड़ देते हैं। मनीष मिश्र कहते हैं, ‘ऋणदाता उधारकर्ता की सहमति के बिना ऐसा नहीं कर सकते। ऋणदाता इसे उन उधारकर्ताओं के लिए एक विकल्प के रूप में पेश करते हैं जो बीमा चाहते हैं लेकिन उनके पास अतिरिक्त धनराशि नहीं है।’उधारकर्ता ऋण के साथ प्रीमियम राशि उधार लेता है और पॉलिसी को वित्तीय संस्थान को सौंप देता है। इसका मुख्य लाभ सुविधा है,कोई अलग से अग्रिम भुगतान नहीं करना पड़ता।

मुख्य कमी यह है कि उधारकर्ता प्रीमियम पर भी ब्याज चुकाता है, जिससे ऋण की कुल लागत बढ़ जाती है। अरोड़ा कहती हैं, ‘इस व्यवस्था में जानकारी का सही ढंग से खुलासा न होने की समस्या हो सकती है, क्योंकि उधारकर्ता पूरी तरह से यह समझे बिना दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर देते हैं कि ऋण प्रीमियम के वित्तपोषण के लिए है।’

यदि आप ऋण का पूर्व भुगतान या हस्तांतरण करते हैं

ऋण से जुड़ी समूह बीमा पॉलिसियों में, यदि उधारकर्ता ऋण का पूर्व भुगतान करता है, संपत्ति को गिरवी रखता है या उसे हस्तांतरित करता है, तो वह समूह पाॅलिसी का हिस्सा नहीं रहता और बीमा कवर रद्द हो जाता है। जेनरली सेंट्रल लाइफ इंश्योरेंस के मुख्य तृतीय-पक्ष वितरण अधिकारी, सर्वेश कुमार मिश्र कहते हैं, ‘एकल-प्रीमियम पॉलिसियों में, बीमाकर्ता अक्सर अनुबंध में निर्धारित समय अवधि या समर्पण मूल्य के आधार पर धनवापसी की अनुमति देते हैं।’

अरोड़ा बताती हैं कि व्यवहार में उधारकर्ताओं को अक्सर रिफंड प्राप्त करने के लिए फॉलो-अप करने और औपचारिक रद्दीकरण अनुरोध करने की आवश्यकता होती है। नियमों के अनुसार, उधारकर्ता व्यक्तिगत जीवन बीमा के रूप में पॉलिसी को जारी रख सकता है। मनीष मिश्र कहते हैं, ‘अन्यथा, उधारकर्ता पॉलिसी सरेंडर कर सकता है और फोरक्लोजर के वर्ष के आधार पर सरेंडर मूल्य प्राप्त कर सकता है।’

उचित मूल्य कैसे सुनिश्चित करें

कर्जदार ऑनलाइन पॉलिसी खरीदकर बेहतर कीमत पा सकते हैं। पॉलिसीबाजार के टर्म इंश्योरेंस प्रमुख वरुण अग्रवाल कहते हैं, ‘ऑनलाइन लोन इंश्योरेंस में प्रीमियम काफी कम होने के साथ-साथ वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) शून्य फीसदी है, जबकि ऑफलाइन पॉलिसी पर 18 फीसदी लगता है।’ उचित मूल्य निर्धारण सुनिश्चित करने के लिए, उधारकर्ताओं को यह जांचना चाहिए कि बीमा राशि ऋण के अनुरूप है या नहीं।

बीमा राशि को इस तरह से नहीं बढ़ाया जाना चाहिए जिससे प्रीमियम बढ़ जाए। उधारकर्ताओं को यह भी जांचना चाहिए कि पॉलिसी की अवधि ऋण की अवधि से मेल खाती है या नहीं, और क्या विकलांगता और गंभीर बीमारी जैसे प्रावधान ऋण चुकाने की क्षमता को सुरक्षित रखते हैं। कर्जदारों को कई बीमा कंपनियों के कवर की तुलना करनी चाहिए।

यदि ऋणदाता आपसे उसका बीमा खरीदने पर जोर देता है तो कर्जदारों के पास चुनने की पूरी आजादी है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के दिशानिर्देशों के अनुसार, कर्जदारों को एक ही ऋणदाता से बीमा खरीदना अनिवार्य नहीं है।

First Published - January 16, 2026 | 9:01 AM IST

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