भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा कि बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को पूरी तरह से स्वचालित शिकायत प्रबंधन प्रणाली स्थापित करनी चाहिए, जिसमें आंतरिक लोकपाल (आईओ) और उप आंतरिक लोकपाल तक पहुंच हो। साथ ही बैंक के आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र द्वारा आंशिक रूप से हल की गई या पूरी तरह से अस्वीकार की गई सभी शिकायतों को समीक्षा के लिए स्वत: ही आईओ के कार्यालय में भेजने की व्यवस्था होनी चाहिए।
नियामक ने कहा कि आंतरिक लोकपाल को शिकायतों की समीक्षा के लिए कम से कम 10 दिन मिलने चाहिए। भारतीय रिजर्व बैंक, नैशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) या कार्ड नेटवर्क के दिशानिर्देशों में समाधान के लिए समय-सीमा निर्धारित है। अन्य सभी मामलों में शिकायत प्राप्ति से 20 दिनों के भीतर समीक्षा करने की समय सीमा निर्धारित की गई है।
रिजर्व बैंक द्वारा 7 अक्टूबर को जारी मसौदा दिशानिर्देशों में नियमन के दायरे में आने वाली संस्थाओं द्वारा अस्वीकार की गई शिकायत को आंतरिक लोकपाल के कार्यालय में स्थानांतरित करने की समय सीमा 20 दिन है। वहीं क्रेडिट सूचना कंपनियों के मामले में ऐसी शिकायतों को प्राप्ति के 25 दिनों के भीतर आंतरिक लोकपाल के कार्यालय में भेजने का प्रावधान है।
आईओ कार्यालय को जनता से सीधे मिली शिकायतों को नहीं देखना चाहिए, बल्कि बैंक द्वारा पहले ही जांच की जा चुकी शिकायतों पर विचार करना चाहिए, जिनका बैंकों ने आंशिक समाधान किया है, या उन शिकायतों को खारिज कर दिया है।