भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर बातचीत के निष्कर्ष की घोषणा 27 जनवरी को यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व के दौरे के समय किए जाने की संभावना है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने आज संवाददाताओं से कहा, ‘हम उम्मीद कर रहे हैं कि बातचीत का निष्कर्ष निकल जाएगा और समझौता हो जाएगा। हालांकि हस्ताक्षर होने की संभावना नहीं है लेकिन निश्चित तौर पर समझौते की रूपरेखा तैयार हो सकती है। उस समय कुछ घोषणा हो सकती है जो अगले पांच दिनों में होने वाली प्रगति पर निर्भर करेगी।’
तीन दिवसीय (25 से 27 जनवरी) राजकीय यात्रा के दौरान यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नई दिल्ली में 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे। साथ ही वे इस वर्ष के गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि भी होंगे।
पिछले तीन महीनों के दौरान दोनों पक्ष वार्ता के ‘अंतिम और सबसे कठिन’ चरण में रहे हैं। दोनों पक्षों ने अब तक 24 में से 20 मुद्दों को पूरा कर लिया है। अग्रवाल ने कहा, ‘कुछ मुद्दे हैं जिन पर बातचीत चल रही है। वास्तव में हम दिन-रात लगे हुए हैं। हम कोशिश कर रहे हैं कि नेताओं की बैठक से पहले इसे पूरा कर लिया जाए।’
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि यह समझौता सभी पहलुओं को कवर करेगा लेकिन संवेदनशील कहे जाने वाले कृषि मुद्दे को चर्चा से बाहर रखा गया है। उन्होंने यूरोप की एक खबर का उल्लेख करते हुए कहा कि इस समझौते में कृषि को शामिल नहीं किया जाएगा।
ब्रसेल्स की यूरोपीय समाचार वेबसाइट यूरेक्टिव ने खबर दी है कि लेयेन ने यूरोपियन पार्लियामेंट के सदस्यों को बताया कि भारत के साथ व्यापार समझौते में कृषि शामिल नहीं है। उन्होंने बुधवार को अपने यूरोपियन पीपुल्स पार्टी (ईपीपी) के साथ एक बैठक में कहा कि कृषि को बाहर रखे जाने के बावजूद यह समझौता यूरोपीय संघ के व्यापार संबंधों के लिए एक महत्त्वपूर्ण संकेत है। उन्होंने कहा कि शुरू से ही स्पष्ट था कि कृषि को अंतिम पैकेज में शामिल नहीं किया जाएगा।
यूरोपीय संघ के एक अधिकारी के अनुसार, यूरोपीय संघ के शीर्ष व्यापार अधिकारी सबीन वेयांड ने बुधवार सुबह यूरोपीय संघ के राजदूतों को बताया कि कृषि टैरिफ पर सहमति वाले पैकेज में दोनों तरफ से रक्षात्मक हितों को विशेषाधिकार दिया गया है। अधिकारी ने कहा कि ब्रसेल्स ने यूरोपीय वाइन और शराब पर 150 फीसदी शुल्क को कम करने पर भारत के साथ एक सहमति बना ली है।
भारत और यूरोपीय संघ निर्धारित समय सीमा से पहले दोनों पक्षों के बीच मतभेदों को कम करने के लिए लगातार बातचीत कर रहे हैं। कठिन मुद्दों में इसत के आयात पर यूरोपीय संघ की नीतियों और 1 जनवरी से शुरू होने वाले कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म पर भारत की चिंताएं शामिल हैं। वाहन, वाइन और कृषि उत्पादों पर कम शुल्क यूरोपीय संघ के प्रमुख हितों में शामिल हैं।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने लंबित मुद्दों को निपटाने और एफटीए वार्ता की दिशा में एक निर्णायक कदम बढ़ाते हुए 8 से 9 जनवरी को ब्रसेल्स का दौरा किया। इससे पहले अग्रवाल और यूरोपीय आयोग के व्यापार महानिदेशक के बीच 6 से 7 जनवरी को उच्चस्तरीय चर्चा हुई थी।
वाणिज्य विभाग ने कहा कि इन बैठकों में विभिन्न वार्ता के तहत हुई प्रगति का जायजा लेने, मतभेदों को कम करने और शेष मुद्दों को स्पष्ट करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। साल 2024-25 में यूरोपीय संघ के साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार 136.53 अरब डॉलर था जिसमें 75.85 अरब डॉलर का निर्यात और 60.68 अरब डॉलर का आयात शामिल था।
भारत के लिए 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौता काफी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में देरी हो रही है और अमेरिका द्वारा भारी शुल्क लगाए जाने के कारण भारत नए निर्यात बाजारों की तलाश कर रहा है। इस व्यापार समझौते के आर्थिक लाभ के अलावा यूरोपीय संघ और विशेष रूप से जर्मनी एवं फ्रांस जैसे उसके सबसे बड़े सदस्य भारत को रूस के प्रभाव से दूर रखना चाहते हैं। दोनों पक्षों को उम्मीद है कि इस समझौते से चीन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
भारत और यूरोपीय आयोग की ओर से गुरुवार को जारी बयान में दोनों पक्षों ने बहुप्रतीक्षित यात्रा की घोषणा की। यूरोपीय आयोग ने कहा कि पहली बार यूरोपीय संघ का नेतृत्व गणतंत्र दिवस परेड में बतौर मुख्य अतिथि भाग लेंगे। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के मौके पर भारत-ईयू बिजनेस फोरम भी आयोजित होने की उम्मीद है।