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क्या भारत चीन की जगह ले पाएगा? ग्लोबल कंपनी का साफ संकेत

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एक बहुराष्ट्रीय कंपनी की केंद्र सरकार को दी प्रस्तुति में कहा गया- भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर निर्यातोन्मुख बन रहा है, जबकि चीन की आपूर्ति श्रृंखला अभी भी अपरिहार्य है।

Last Updated- January 16, 2026 | 9:05 AM IST
India-China

एक बहुराष्ट्रीय कंपनी ने हाल ही में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत और चीन की स्थिति पर केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुतीकरण दिया है। उपभोक्ता सामान व मोबाइल बनाने वाली इस कंपनी के अनुसार भारत का इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में ‘रणनीतिक अनिवार्यता’ की ओर बढ़ रहा है लेकिन विश्व चीनी आपूर्ति श्रृंखला पर ‘अभी निर्भर’ है।

यह प्रस्तुतीकरण दिसंबर में दिया गया था। इसमें एक दशक से अधिक समय में भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव का विश्लेषण किया गया है। भारत वर्ष 2022 और 2027 के बीच निर्यातोन्मुख रणनीतियों को साकार रूप दे रहा है और वैश्विक बाजार के अनुरूप उत्पादन व समन्वय बढ़ा रहा है। कंपनी के अनुसार 2028 के बाद भारत का इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र अधिक निर्यात व आपूर्ति श्रृंखला वाला होने की उम्मीद है। लिहाजा यह ‘रणनीतिक रूप से अधिक अपरिहार्य’ होने की संभावना है।

चीन की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता कई कारकों पर निर्भर है। इनमें इनपुट पर शून्य आयात शुल्क, तैयार प्लग ऐंड प्ले इन्फ्रास्ट्रक्चर, कम लागत वाली पूंजी और सरकार अनुदान शामिल हैं। चीन ने अपनी आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण तीन चरणों में किया। इस क्रम में 1980 के दशक के बाद से वैश्विक ब्रांड जैसे होंडा, टोयोटा, एचपी और डेल का चीन में विनिर्माण करना। इसके बाद 1990 के दशक से चीन में घरेलू कंपनियों का बनना शुरू हुआ। फिर 2000 के दशक से जीली, एसएआईसी, बीवाईडी, श्याओमी, वीवो, ओपो और हुआवेई जैसे चीनी ब्रांड वैश्विक स्तर पर उभर कर आए।

कंपनी ने कहा कि विश्व चीन की आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भर है। कंपनी ने खुलासा किया कि कैसे चीन के निर्माण का पारिस्थितिकीतंत्र प्लग ऐंड प्ले के आधारभूत ढांचे से लाभान्वित हुआ। इससे संयंत्र स्थापित करने की अवधि घटी और संचालन का जोखिम कम हुआ। इसके अलावा कम लागत वाली पूंजी तक पहुंच वाली कंपनियों को बड़े, दीर्घकालिक निवेश करने में सक्षम बनाया। ऐसी नीतियां बनाई गईं जो उत्पादन और निर्यात को पुरस्कृत करती हैं।

कंपनियों को उत्पादन का विस्तार करने और वैश्विक बाजारों में आक्रामक रूप से प्रतिस्पर्धा करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का पारिस्थितिकीतंत्र रणनीतिक और चरणबद्ध रहा है। भारत ने वर्ष 2022 में घरेलू चिप बनाने की क्षमताओं को विकसित करने के लिए सेमीकंडक्टर मिशन की शुरुआत की। इसी तरह वर्ष 2023 में लैपटॉप और सर्वर के स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए से आईटी हार्डवेयर के उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना 2.0 शुरू की।

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First Published - January 16, 2026 | 9:05 AM IST

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