Stock Market Outlook: अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध (US Iran War) के कारण कच्चे तेल की कीमत बढ़ने की चिंता के बीच पिछले तीन ट्रेडिंग सत्रों में एनएसई निफ्टी-50 इंडेक्स 1,000 से ज्यादा अंक यानी करीब 4% गिरकर 24,500 के स्तर पर आ गया है। यह निफ्टी में तीन दिनों में सबसे तेज 1,000 अंकों की गिरावट है। इससे पहले 4 अप्रैल 2025 को निफ्टी एक ही दिन के कारोबार के दौरान 1,000 अंक से ज्यादा गिर गया था।
कमजोर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण निवेशकों का भरोसा अस्थिर बना रहा। वैश्विक बाजारों के साथ-साथ घरेलू मोर्चे पर भी अनिश्चितता बढ़ गई है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। ऐसे माहौल में निवेशकों के सामने कई सवाल खड़े हो जाते हैं—किन सेक्टरों से दूर रहना चाहिए, क्या गिरावट में खरीदारी का मौका है और इस संकट के दौरान अपने पोर्टफोलियो को कैसे सुरक्षित रखा जाए।
पॉल एसेट एंड फंड मैनेजर और 129 वेल्थ फंड में इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट प्रसेनजीत पॉल ने कहा, ”निवेशकों को उन सेक्टर्स में सावधानी बरतनी चाहिए जो कच्चे तेल की कीमतों से सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं और वैश्विक सप्लाई चेन में व्यवधान पर निर्भर हैं।”
पॉल ने बताया कि एविएशन, पेंट, टायर और पेट्रोकेमिकल से जुड़े कारोबार जैसे सेक्टर कच्चे तेल पर आधारित कच्चे माल पर बहुत अधिक निर्भर हैं। इसलिए तेल की बढ़ती कीमतें उनके लाभ मार्जिन को कम कर देती हैं। अधिक एनेग्जी खपत वाली या सप्लाई चेन पर भारी आयात निर्भरता वाली कंपनियों को भी भू-राजनीतिक तनाव जारी रहने पर लागत संबंधी दबाव का सामना करना पड़ेगा।
पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के असर अब दुनिया के ऊर्जा बाजार में साफ दिखाई देने लगे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव ने तेल और गैस की सप्लाई को लेकर बड़ी चिंता खड़ी कर दी है। तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। इससे पहले यह करीब 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी। जानकारों का कहना है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो तेल की कीमतों में तेजी बनी रह सकती है।
प्रसेनजीत पॉल ने बताया कि भूराजनीतिक टकराव के समय शेयर बाजार में अक्सर तेज लेकिन अस्थायी गिरावट देखने को मिलती है। ऐसे समय में निवेशक जोखिम कम करने के लिए जल्दी-जल्दी शेयर बेचने लगते हैं। इसके कारण कई बार उन कंपनियों के शेयर भी गिर जाते हैं जिनका कारोबार वास्तव में ज्यादा प्रभावित नहीं होता।
उन्होंने कहा, ”इतिहास बताता है कि ऐसे दौर लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए अवसर भी बना सकते हैं। जब धीरे-धीरे अनिश्चितता कम होती है, तो मजबूत कंपनियों के शेयर आम बाजार से ज्यादा तेजी से संभलते हैं। हालांकि हर गिरावट को सीधे खरीदारी का मौका नहीं मानना चाहिए। निवेशकों को सावधानी से चुनकर उन कंपनियों में निवेश करना चाहिए जिनकी बैलेंस शीट मजबूत हो, कैश फ्लो स्थिर हो और कमाई का भविष्य साफ दिखाई देता हो।’
एक्सपर्ट ने कहा, ”जिन सेक्टरों का कारोबार ज्यादातर घरेलू मांग पर आधारित होता है, जैसे हेल्थकेयर, रिटेल और जरूरी सेवाएं, वे आमतौर पर वैश्विक संघर्षों से कम प्रभावित होते हैं।इतिहास में देखा गया है कि बाजार में घबराहट के समय धीरे-धीरे अच्छी और मजबूत कंपनियों में निवेश करने वाले निवेशकों को लंबी अवधि में अच्छा फायदा मिला है।” उन्होंने कहा कि निवेशकों को मजबूत वित्तीय स्थिति वाली कंपनियों और घरेलू मांग पर आधारित कारोबारों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
निवेशकों को बाजार में आई हालिया गिरावट से बड़ा नुकसान हुआ। बीएसई में लिस्टेड कंपनी का मार्केट कैप बुधवार को गिरकर 4,46,87,694 करोड़ रुपये आ गया। जबकि शुक्रवार को बाजार बंद होने के बाद यीह 4,63,25,200 करोड़ रुपये था। इस तरह, निवेशकों को पिछले तीन ट्रेडिंग सेशन में 16,37,506 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।