ईरान के साथ संघर्ष खत्म करने के लिए अमेरिका के प्रयासों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई जिसका असर शेयर बाजार पर भी पड़ा और बेंचमार्क सूचकांक लगातार दूसरे दिन बढ़त में रहे। हालांकि भू-राजनीतिक जोखिम के कारण निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है।
कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1,781 अंक तक चढ़ने के बाद कारोबार की समाप्ति पर थोड़ी बढ़त गंवाकर 1,205 अंक या 1.6 फीसदी की तेजी के साथ 75,274 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 394 अंक या 1.7 फीसदी बढ़त के साथ 23,307 पर बंद हुआ। पिछले दो सत्र में दोनों सूचकांक 3.5 फीसदी चढ़ चुके हैं।
बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 8.2 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 431 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। दो दिन में बाजार पूंजीकरण में 15.8 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है।
तेल की कीमतों में नरमी से बाजार में तेजी को बल मिला। अमेरिका ने ईरान के साथ संघर्ष को खत्म करने के लिए 15-सूत्रीय योजना तैयार की है जिसमें पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। इस खबर से तेल के दाम नरम पड़ गए। ब्रेंट क्रूड 1.6 फीसदी की गिरावट के साथ 93.5 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। हालांकि सोना 1.8 फीसदी चढ़कर 4,557.5 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।
टकराव खत्म करने के लिए राजनयिक प्रयासों के बावजूद अनिश्चितता बनी हुई है क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट अभी भी बंद है। इस रुकावट ने हाल के इतिहास में ईंधन आपूर्ति को सबसे गंभीर झटका दिया है। इससे महंगाई और वैश्विक वृद्धि को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतें हाल के ऊंचे स्तर से नीचे आई है मगर कीमतें अभी भी युद्ध से पहले के स्तर से लगभग 27 फीसदी ज्यादा है।
इधर, पश्चिम एशिया में हमले जारी रहे। ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों पर अपने हमले तेज कर दिए जबकि इजरायल ने संकेत दिया कि वह अपने हमले जारी रखेगा। इस बीच ईरान ने युद्धविराम के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और अमेरिका के नेतृत्व वाली बातचीत को ‘तर्कहीन’ बताया।
विश्लेषकों का कहना है कि बाजार कूटनीति और ऊर्जा आपूर्ति दोनों ही मोर्चों पर होने वाले घटनाक्रम के प्रति संवेदनशील बना रहेगा।
ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने बताया कि अमेरिका में घरेलू समर्थन की कमी, बढ़ते सैन्य खर्च, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और आने वाले मध्यावधि चुनाव जैसी वजहें इस संघर्ष की अवधि को सीमित कर सकती हैं और टकराव शायद अप्रैल से आगे न बढ़े। इसके अलावा उम्मीद है कि स्थिति सामान्य होने पर कई देश अपनी खरीद में तेजी लाएंगे और अपने पेट्रोलियम भंडार बढ़ाएंगे। इन सबका मतलब है कि इस साल कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहने की संभावना है, भले ही वे 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहें।’
बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर 2,902 शेयर बढ़त में और 1,415 गिरावट में बंद हुए। एचडीएफसी बैंक में 2.2 फीसदी की तेजी आई और सेंसेक्स की बढ़त में इसने 213 अंक का योगदान दिया। नैशनल स्टॉक एक्सचेंज के सभी क्षेत्रीय सूचकांक लाभ में रहे। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में सबसे ज्यादा 3.5 फीसदी की तेजी आई।
वैलेंटिस एडवाइजर्स के प्रबंध निदेशक और संस्थापक ज्योतिवर्धन जयपुरिया ने कहा, ‘ईरान युद्ध के बाद से बाजार में हर दिन एक नया दिन होता है। इस सुधार का टिके रहना मौजूदा युद्ध के बातचीत से हल होने पर निर्भर करता है। लेकिन साल-दो साल के नजरिये से शेयरों में पैसा लगाने का यह एक अच्छा समय है। अगर आप युद्धों के इतिहास को देखें तो बाजार आम तौर पर युद्ध के दौरान 8 से 10 फीसदी तक गिरते हैं और एक साल बाद उनमें काफी तेजी आती है। अब शेयरों की कीमतें वाजिब स्तर पर आ गई हैं।’