BMC Election: महाराष्ट्र में बीएमसी सहित सभी 29 नगर निकायों के चुनाव का मतदान सम्पन्न हो गया। राज्य की महानगर पालिकाओं में करीब 50 फीसदी मतदान हुआ। सबकी नजर मुंबई पर टिकी है, जहां आर्थिक रूप से समृद्ध बीएमसी पर शासन को लेकर भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन महायुति और ठाकरे बंधुओं के मोर्चे के बीच दिलचस्प मुकाबला होने की उम्मीद जताई जा रही है।
महाराष्ट्र के नगर निकायों की 2,869 सीट के लिए सुबह 7:30 बजे मतदान शुरू होकर शाम 5:30 बजे तक चला। करीब 50 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। ये मतदाता 15,931 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे, जिनमें मुंबई के 1,700 और पुणे के 1,166 प्रत्याशी शामिल हैं। मतगणना कल यानी 16 जनवरी को होगी।
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मतदान के बाद आए बीएमसी के 2 एग्जिट पोल में भाजपा गठबंधन को बहुमत मिलने का अनुमान है। भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 130 से 150 सीटें मिल सकती हैं। बहुमत के लिए 114 की जरूरत है। वहीं कांग्रेस गठबंधन को 60 सीटें मिलने का अनुमान है। अन्य के खाते में 5 से 7 सीटें आ सकती हैं। हालांकि नतीजे शुक्रवार को आएंगे।
बीएमसी चुनाव सिर्फ नगर निगम का नहीं, बल्कि मुंबई की सत्ता हासिल करने की लड़ाई है। इसलिए यह महायुति और ठाकरे भाईयों के लिए साख का सवाल है। 74,000 करोड़ रुपए के बजट वाली एशिया की सबसे बड़ी महानगरपालिका बीएमसी पर बिना बंटे शिवसेना ने (1997-2017) तक राज किया था। तब भाजपा उसकी सहयोगी थी। मुंबई नगर निगम का बजट गोवा, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के बजट से भी बड़ा है।
इन चुनावों में सबसे अहम बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) है जहां 2017 के बाद 227 सीटों पर चुनाव हो रहा है। यहां बहुमत के लिए 114 का आंकड़ा जरूरी है। भाजपा- शिवसेना (शिंदे गुट) में गठबंधन हैं। भाजपा 137 सीटों पर लड़ रही है वहीं शिंदे की शिवसेना ने 90 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं।
उधर शिवसेना यूबीटी ने मनसे के साथ गठबंधन किया है। यूबीटी 163 सीटों पर और मनसे ने 52 सीट पर अपने उम्मीदवार खड़े किये हैं। कांग्रेस ने वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) से गठबंधन किया है। कांग्रेस 143 सीटों पर लड़ रही है जबकि वीबीए को 46 सीट दी गईं हैं। एनसीपी ने किसी के साथ हाथ नहीं मिलाया। अजित गुट वाली ये पार्टी 94 सीटों पर लड़ रही है।
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मतदान के बीच स्याही पर विवाद खड़ा हो गया है। उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग द्वारा इस्तेमाल की जा रही स्याही पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा इस्तेमाल किये जा रहे मार्कर पेन की स्याही आसानी से मिटाई जा सकती है, जिससे फर्जी वोटिंग का खतरा बढ़ गया है। वहीं, स्याही के विवाद पर सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मैंने भी मतदान किया है, मुझे भी मार्कर से निशान लगाया गया है, क्या यह मिट रहा है…? चुनाव आयोग को इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए और कुछ और इस्तेमाल करना चाहिए, अगर वे चाहें तो ऑयल पेंट का इस्तेमाल कर सकते हैं, चुनाव निष्पक्ष होने चाहिए। लेकिन हर बात पर हंगामा करना और सवाल उठाना बहुत गलत है।
हालांकि, चुनाव आयोग ने उन खबरों को खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया है कि निकाय चुनावों के दौरान मतदाताओं की उंगलियों पर लगे पक्की स्याही के निशान मिटाए जा रहे हैं। बीएमसी ने एक बयान में कहा कि मीडिया में आ रहीं ये खबरें तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। बीएमसी प्रशासन ने कहा कि बीएमसी आयुक्त ने मतदान के बाद पक्की स्याही मिटाए जाने के संबंध में कोई बयान नहीं दिया है। इसलिए, मीडिया में प्रसारित हो रही खबरों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है।