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लेखक : देवाशिष बसु

आज का अखबार, लेख

म्युचुअल फंड बनाम विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों पर बहस और जमीनी हकीकत

भारतीय शेयर बाजार में पिछले दो वर्षों में ज्यादातर वक्त एक खास सोच हावी रही है। वह सोच यह है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की तरफ से अंधाधुंध बिकवाली के बावजूद शेयरों की कीमतों पर खास फर्क नहीं पड़ा है। घरेलू म्युचुअल फंड (डीएमएफ) ‘आखिरी खरीदार’ या संकट मोचक के रूप में हालात को […]

आज का अखबार, लेख

आर्थिक चुनौतियों के बीच चमक रही हैं छोटी कंपनियां

देश के शेयर बाजार को जब उसकी सबसे बड़ी कंपनियों और निफ्टी 50 के लेंस से देखा जाता है तो वह संघर्षरत नजर आता है। लेकिन अगर हम छोटी कंपनियों की ओर देखें तो एक अलग तस्वीर नजर आती है। एक ऐसी तस्वीर जहां जबरदस्त वृद्धि है, मुनाफे का विस्तार हो रहा है  और मांग […]

आज का अखबार, लेख

शेयर बाजार में रिकॉर्ड तेजी के बीच गहराया बड़ा संकट, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने बढ़ाई भारत की टेंशन

इस अप्रैल में निफ्टी का माइक्रोकैप सूचकांक 21.55 फीसदी ऊपर था, जितना ऊंचा वह 2022 में अपनी शुरुआत के बाद से कभी नहीं उछला था। सीएनएक्स 500 भी इसी महीने 10.5 फीसदी बढ़ा और पिछले पांच साल में यह पहला महीना है, जब यह 10 फीसदी से ज्यादा उठा है। मार्च में बाजार में गिरावट […]

आज का अखबार, लेख

FDI का स्रोत नहीं बल्कि प्राथमिकताएं तय करना जरूरी, इस पर चीन से सीखने की जरूरत

भारत ने 10 मार्च को अपनी जमीनी सीमा से सटे देशों से आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से जुड़े नियमों में ढील दे दी। ‘प्रेस नोट 3’ के नाम से ये दिशानिर्देश अप्रैल 2020 में लागू हुए थे जिनका उद्देश्य कोविड महामारी के दौरान मौके का फायदा उठाने वाले यानी अवसरवादी अधिग्रहणों को रोकना […]

आज का अखबार, लेख

बाजार की तेजी बनाम भू-राजनीतिक हकीकत: पश्चिम एशिया में नाजुक शांति

बाजार अक्सर ऐसा व्यवहार करता है जैसे मानो उसने अगले सप्ताह के संभावित घटनाक्रम का पहले ही अंदाजा लगा लिया हो। जब वास्तविक घटनाक्रम से पहले ही कीमतें अचानक बढ़ती या गिरती हैं तो कुछ मामलों में बाजार अंदाजा लगा भी लेता है। तो क्या दुनिया भर के बाजारों में मौजूदा तेजी पश्चिम एशिया में […]

आज का अखबार, लेख

बाजार में गिरावट का मौजूदा दौर कितना खतरनाक?

बाजार में गिरावट के दौर दो तरह के होते है। एक दौर वह होता है जिसमें शुरुआत में तेज गिरावट आती है मगर बाद में बिकवाली की रफ्तार कुंद पड़ने लगती है। चार से पांच महीनों में सब कुछ ठीक हो जाता है। लगभग एक दशक से भारत और शेष दुनिया के बाजार इसी तरह […]

आज का अखबार, लेख

खाड़ी युद्ध का असली ट्रेलर: होर्मुज स्ट्रैट की नाकेबंदी से भारत में तेल, गैस और उर्वरक का बड़ा संकट

ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध पांचवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और इस​की चपेट में आकर भारतीय सूचकांक 9 फीसदी से अ​धिक टूट चुके हैं। युद्ध के प्रत्यक्ष प्रभाव हम सभी के सामने हैं क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद हो चुका है। भारत के कुल आयात का लगभग 54 फीसदी कच्चा तेल, 60 फीसदी तरलीकृत […]

आज का अखबार, लेख

हालात सुधरने पर ही लौटेंगे विदेशी निवेशक

इन दिनों भारत को लेकर एक धांसू बात यह कही जा रही है कि यहां के शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई है। इस सिद्धांत के अनुसार अगर श्रेष्ठ प्रतिभाओं से लैस अरबों डॉलर के वैश्विक फंड भारत की आर्थिक संभावनाओं पर दांव लगाएं तो अगले दो दशकों में […]

आज का अखबार, लेख

स्मॉलकैप शेयरों के लिए बेहतर परिस्थितियां, शेयर बाजार को मिली उम्मीद की किरण

भारतीय शेयर बाजार इस समय एक दिलचस्प विरोधाभास पेश कर रहे हैं। बड़ी कंपनियां अपने कारोबार को लेकर जूझ रही हैं मानो देश में मंदी का दौर हो, लेकिन उनके शेयर की कीमतें मजबूत बनी हुई हैं। दूसरी ओर, कई छोटी कंपनियां शानदार प्रदर्शन कर रही हैं, जैसे अर्थव्यवस्था 10 फीसदी या उससे अधिक की […]

आज का अखबार, लेख

हालिया व्यापार समझौते राहत भरे, लेकिन ऊंचे मूल्यांकन अब भी बड़ी बाधा

भारतीय शेयर बाजार पर मंडरा रहा बादल फिलहाल छंट गया है। भारत के अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ व्यापार सौदों ने पिछले एक साल में शेयर बाजार से जुड़े सबसे बड़े जोखिमों में से एक को कम कर दिया है। टैरिफ और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच, विदेशी निवेशकों ने वर्ष 2025 में भारी […]

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