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लेखक : देवाशिष बसु

आज का अखबार, लेख

स्मॉलकैप शेयरों के लिए बेहतर परिस्थितियां, शेयर बाजार को मिली उम्मीद की किरण

भारतीय शेयर बाजार इस समय एक दिलचस्प विरोधाभास पेश कर रहे हैं। बड़ी कंपनियां अपने कारोबार को लेकर जूझ रही हैं मानो देश में मंदी का दौर हो, लेकिन उनके शेयर की कीमतें मजबूत बनी हुई हैं। दूसरी ओर, कई छोटी कंपनियां शानदार प्रदर्शन कर रही हैं, जैसे अर्थव्यवस्था 10 फीसदी या उससे अधिक की […]

आज का अखबार, लेख

हालिया व्यापार समझौते राहत भरे, लेकिन ऊंचे मूल्यांकन अब भी बड़ी बाधा

भारतीय शेयर बाजार पर मंडरा रहा बादल फिलहाल छंट गया है। भारत के अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ व्यापार सौदों ने पिछले एक साल में शेयर बाजार से जुड़े सबसे बड़े जोखिमों में से एक को कम कर दिया है। टैरिफ और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच, विदेशी निवेशकों ने वर्ष 2025 में भारी […]

आज का अखबार, लेख

भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने पांच बड़ी चुनौतियां; गलती की गुंजाइश नहीं

कई चुनौतियों का सामना कर रहे भारत में आश्चर्यजनक रूप से शांति झलक रही है। शेयर बाजार 81 हजार के पार है और पिछले महीने ही रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुका है। शॉपिंग मॉलों में चहल-पहल है। ब्याज दरें स्थिर हैं। कारों और साइ​कलों की बिक्री बढ़ रही है। उच्च श्रेणी की संपत्तियों की बिक्री […]

आज का अखबार, लेख

राज्यों की बेतहाशा उधारी ने आरबीआई की दर कटौती और बॉन्ड खरीद का असर किया फीका

भारतीय रिजर्व बैंक ने 23 दिसंबर को यह घोषणा की कि वह सरकारी बॉन्ड की खरीद और डॉलर-रुपये के स्वैप के माध्यम से 32 अरब डॉलर की नकदी व्यवस्था में डालेगा। सामान्य समय में ऐसी घोषणा से दलाल पथ के मिजाज में उत्साह आना चाहिए था लेकिन हुआ उलटा और शेयर सूचकांक उसी दिन गिर […]

आज का अखबार, लेख

शेयर बाजार में निफ्टी के उच्च स्तर और पोर्टफोलियो रिटर्न में अंतर ने निवेशकों को चौंकाया

भारत का शेयर बाजार तमाम चुनौतियों के बीच मजबूती से खड़ा है। कोविड-19 महामारी में फिसलने के बाद मानक सूचकांक (निफ्टी 50 और सेंसेक्स) घरेलू निवेश, खुदरा निवेशकों की बढ़ती तादाद और दीर्घकालिक वृद्धि दर की उत्साहजनक बातों के दम पर नई बुलंदियों पर पहुंचे हैं। इसके बावजूद हाल में जब सूचकांक अपने अब तक […]

आज का अखबार, लेख

नए श्रम कानून: भारतीय नीति के साथ इसका क्रियान्वयन है मुख्य चुनौती

भारत के नए चार श्रम कानूनों का उद्देश्य 29 पुराने कानूनों को हटाकर उनकी जगह लेना है। ये कानूनों का पालन आसान बनाने, सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने, कंपनियों को कर्मचारियों की भर्ती करने, नौकरी से निकालने और अपने कारोबार को बढ़ाने में अधिक सहूलियत देने का वादा करते हैं। लेकिन भारत में अक्सर ऐसा […]

आज का अखबार, लेख

जीडीपी ग्रोथ और कॉरपोरेट नतीजे दिखा रहे असली मांग की कमी

भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार ऐसे आंकड़े सामने ला रही है जो ज्यादातर वित्त मंत्रियों में ईर्ष्या का भाव उत्पन्न कर देंगे। राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.4 फीसदी रहने का अनुमान है। आधार आंकड़ा 7.1 फीसदी है जो हालात बेहतर रहने पर […]

आज का अखबार, लेख

AI बूम या पुराना बुलबुला? अमेरिकी शेयर बाजार की तेजी क्यों लग रही है जानी-पहचानी

व्यापारिक तनावों या राजकोषीय दिक्कतों से बेपरवाह अमेरिकी शेयर बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब है। यह तेजी नई पीढ़ी के तकनीकी आशावाद की लहर पर सवार है जिसका नाम है आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई)। सात बड़ी टेक कंपनियां यानी अल्फाबेट, एमेजॉन, ऐपल, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया और टेस्ला इस समय एसऐंडपी 500 के बाजार पूंजीकरण में करीब […]

आज का अखबार, लेख

‘उपयोगी ज्ञान’ के जरिए विकसित भारत: ऐसी संस्कृति बनाना जो ज्ञान का सम्मान करे

कुछ दिनों पहले जोएल मोकिर, फिलिप एगियों और पीटर हॉविट को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दिया गया। मोकिर की दलील है कि समाज तब फलते-फूलते हैं जब वे उपयोगी ज्ञान का पोषण करते हैं, उसका विकास करते हैं और उसे प्रसारित करते हैं। एगियों और हॉविट ने समझाया कि कैसे ज्ञान तब अत्यधिक उत्पादक हो […]

आज का अखबार, लेख

निजी पूंजीगत व्यय सुस्त, वेतन वृद्धि की कमी से मांग को नहीं मिल रहा सहारा

अर्थशास्त्री कई दशकों से लगातार यह शिकायत करते रहे हैं कि हमारा राजस्व व्यय बहुत अधिक है और पूंजीगत व्यय पर्याप्त नहीं है। यह शिकायत अब कम से कम खत्म हो सकती है। पिछले 11 वर्षों में, नरेंद्र मोदी सरकार ने लगभग 54 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय किया है, जिसमें महामारी के बाद […]

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