रीन्यू के अध्यक्ष व मुख्य कार्याधिकारी सुमंत सिन्हा का मानना है कि अमेरिका के पीछे हटने के कारण जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए काम कर रहे वैश्विक संगठनों को झटका लगा है। भारतीय उद्योग को ट्रांसमिशन क्षमता निर्माण में देरी होने से राजस्व नुकसान हुआ है। लिहाजा उद्योग मुआवजे की मांग को लेकर सरकार से बातचीत कर रहा है। सिन्हा ने सुधीर पाल सिंह को साक्षात्कार में बताया कि बहरहाल, अक्षय ऊर्जा के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) में सीमित वृद्धि देखी गई है। पेश हैं प्रमुख अंश :
अमेरिका यूएन के जलवायु परिवर्तन कन्वेंशन, इंटरनैशनल रीन्यूएबल एनर्जी एजेंसी और इंटरनैशनल सोलर अलायंस से बाहर निकल गया है। ऐसी अटकलें लंबे समय से लगाई जा रही थीं और यह लोगों के जेहन में था। यह काफी समय से मौजूदा अमेरिका प्रशासन का घोषित रुख रहा है। अमेरिका ने कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (कॉप) में भाग नहीं लिया था। अब उसने इसे और अधिक औपचारिक रूप से कर दिया है – बस इतना ही।
अमेरिका में जलवायु अनुसंधान का लाभ अब उपलब्ध नहीं होगा। जब विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अपने को संगठनों से बाहर कर लेती है व कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए अधिक प्रयास नहीं करती है तो इससे वैश्विक प्रयासों को झटका लगेगा। अच्छी बात यह है कि कॉप का आयोजन हुआ और अन्य 192 देशों ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सरकार और उद्योग दोनों की ओर से जोरदार ढंग से प्रयास किए जा रहे हैं। भारत तीन साल पहले हर साल लगभग 15 गीगावाट (जीडब्ल्यू) नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ता था। यह पिछले कैलेंडर वर्ष में बढ़कर 45 गीगावाट हो गई। मुझे उम्मीद है कि जल्द ही यह और बढ़कर 65-70 गीगावाट तक पहुंच जाएगी। पिछले दो-तीन वर्षों में काफी क्षमता आबंटित की गई है और कई बड़े खिलाड़ी अधिक महत्वाकांक्षा व पूंजी के साथ इस क्षेत्र में उतरे हैं। ऋणदाता भी सहज महसूस कर रहे हैं।
कार्यान्वयन संबंधी समस्याएं सामने आती हैं। वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) उम्मीद के मुताबिक तेजी से पीपीए पर हस्ताक्षर नहीं कर रही हैं। दरअसल, बिजली की मांग में वृद्धि अनुमान से धीमी रही है। इसका आंशिक कारण 2025 में मानसून का लंबा चलना है।
ग्रिड निर्माण की गति में भी कभी-कभी विसंगतियां आती हैं, जिससे बिजली कटौती व राजस्व हानि होती है। यदि किसी डेवलपर को ग्रिड संबंधी समस्याओं के कारण संयंत्र तैयार होने के बावजूद उत्पादन बंद करने के लिए कहा जाता है तो क्षतिपूर्ति तंत्र होना चाहिए। हमने वही किया जो हमें करना चाहिए था। हम इस बारे में सरकार से चर्चा कर रहे हैं। कारण यह है कि बिजली उत्पादन में कोई भी कमी हमारे मुनाफे में सीधा नुकसान है। आदर्श रूप से ग्रिड का विस्तार क्षमता वृद्धि से आगे होना चाहिए, लेकिन फिलहाल स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है। पारेषण क्षमता निर्माण में देरी से डेवलपर को समस्याएं होती हैं।
हमारी कंपनी अभी 6.5 गीगावाट मॉड्यूल और 2.5 गीगावाट सेल्स का निर्माण करती है। हमारी सेल्स क्षमता को 6.5 गीगावाट तक बढ़ाया जा रहा है और इसे इस साल बाद में चालू किया जाएगा। इस क्षमता का लगभग दो-तिहाई हिस्सा घर में ही उपयोग किया जाएगा।