अमेरिका में वीजा नियमों को लेकर बढ़ती सख्ती और लगातार बदलती इमिग्रेशन नीतियों के कारण बड़ी संख्या में भारतीय प्रोफेशनल्स भारत लौट रहे हैं। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, बीते एक साल में यह रुझान और तेज हुआ है, खासकर राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान।
इस ‘रिवर्स ब्रेन ड्रेन’ में सबसे ज्यादा संख्या टेक्नोलॉजी सेक्टर से जुड़े प्रोफेशनल्स की है। हालांकि अब उपभोक्ता वस्तुओं, सेवाओं और कंज़्यूमर टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों के मिड और सीनियर लेवल एग्जीक्यूटिव्स भी पहले की तुलना में अधिक संख्या में भारत लौट रहे हैं। इनमें से अधिकांश अमेरिका में H-1B और L-1 जैसे नॉन-इमिग्रेंट वीज़ा पर कार्यरत थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, लौटने वाले कई प्रोफेशनल्स की सालाना सैलरी 1.5 लाख डॉलर से 4 लाख डॉलर के बीच थी, जो इस बदलाव के पैमाने को दर्शाता है। रिक्रूटर्स का कहना है कि वीज़ा को लेकर अस्थिरता और बार-बार होने वाले नीतिगत बदलावों ने अमेरिका में लंबे समय के करियर प्लान बनाना मुश्किल कर दिया है।
पिछले एक साल में कंज़्यूमर टेक्नोलॉजी कंपनियों से जुड़े एक दर्जन से ज्यादा CXO स्तर के अधिकारी भारत लौटकर वरिष्ठ नेतृत्व की भूमिकाएं संभाल चुके हैं। एक उदाहरण में, एक बहुराष्ट्रीय पैकेज्ड फूड कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने लगभग एक दशक अमेरिका में बिताने के बाद पिछले सितंबर भारत वापसी की। उन्होंने बताया कि बीते 12 महीनों में वीज़ा पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता काफी बढ़ गई थी, जबकि इससे पहले वे भारत से आए कई ऑफर्स ठुकरा चुके थे।
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भारत में बढ़ते अवसर भी इस वापसी का बड़ा कारण बन रहे हैं। लौटने वाले प्रोफेशनल्स को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs), सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनियों, स्थापित स्टार्टअप्स, बड़े कॉरपोरेट समूहों और टेक्नोलॉजी कंसल्टिंग फर्म्स में अहम भूमिकाएं मिल रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में भारत की पहचान ने इसकी आकर्षण क्षमता को और मजबूत किया है।
टेक सेक्टर में छंटनी और वीजा से जुड़ी पाबंदियों से प्रभावित कई मिड-लेवल प्रोफेशनल्स भी भारत लौट रहे हैं, जिनमें से कुछ ने यहां अपेक्षाकृत कम वेतन पर काम स्वीकार किया है।
सर्च और रिक्रूटमेंट फर्म्स के अनुसार, फार्मास्यूटिकल्स, हेल्थकेयर, फाइनेंस, सप्लाई चेन और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भारत आधारित नौकरियों का मूल्यांकन करने वाले प्रवासी भारतीयों की संख्या में साफ़ बढ़ोतरी हुई है। जहां पहले परिवार और निजी कारण प्राथमिक होते थे, वहीं अब इमिग्रेशन की दिक्कतें और अमेरिकी जॉब मार्केट की अस्थिरता बड़े फैसले की वजह बन रही हैं।
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनुभव रखने वाले लीडर्स की बढ़ती मांग, डिजिटल इनोवेशन का विस्तार और भारत में उभरते नेतृत्व के अवसर इस ट्रेंड को और गति दे रहे हैं। इसका असर कंज़्यूमर टेक और फिनटेक सेक्टर में हुई कई हाई-प्रोफाइल नियुक्तियों में साफ़ दिखाई दे रहा है।