facebookmetapixel
₹931 का HDFC Bank stock… क्या ₹1,200 तक जाएगा? 4 ब्रोकरेज ने दिए बड़े संकेतRIL: Q3 नतीजों के बाद स्टॉक 3% से ज्यादा टूटा; ब्रोकरेज की सलाह- BUY करें, 3 नए ग्रोथ इंजन देंगे मजबूतीGovt Business Loan Scheme: सिर्फ आधार कार्ड दिखाइए, सरकार देगी 90 हजार तक का लोन; जानें स्कीम के बारे मेंGoogle Gemini ने पेश किया ‘Answer Now’ फीचर, जानें कैसा करना होगा यूज30 साल में पलट गई दुनिया की तस्वीर, गरीब देश बने अमीर, भारत भी रेस में आगेलेबर कोड का सीधा असर, प्राइवेट बैंकों और इंश्योरेंस कंपनियों का खर्च बढ़ाGold silver price today: सोने चांदी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, चांदी 3 लाख रुपये पारचांदी ने बनाया इतिहास: MCX पर पहली बार ₹3 लाख के पारBCCL IPO Listing Today: कोल इंडिया की सहायक कंपनी के आईपीओ की धमाकेदार शुरुआत, 96% के प्रीमियम पर हुआ लिस्टपैसों के दम पर अमीर चुनाव खरीद लेते हैं? 66 देशों के सर्वे में बड़ा दावा

Iran Protest: निर्वासित ईरानी शाहपुत्र पहलवी का नया संदेश- विरोध तेज करें, शहरों के केंद्रों पर कब्जे की तैयारी करें

ईरान में पहलवी के आह्वान के बाद विरोध प्रदर्शन तेज़, देशव्यापी हड़ताल और प्रमुख इलाकों पर कब्ज़े की तैयारी।

Last Updated- January 10, 2026 | 5:24 PM IST
Exiled Iranian crown prince Pahlavi calls for strikes, plans his return
Representative Image

Iran Protest: ईरान में विरोध प्रदर्शन लगातार बढ़ते जा रहे हैं, क्योंकि देश के अंतिम शासक के निर्वासित पुत्र रेजा पहलवी ने फिर से जनता से सड़कों पर उतरने, देशव्यापी हड़ताल और महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थलों पर कब्जा करने का आह्वान किया है। उनके इस कदम ने हाल के वर्षों में देश में जारी सबसे लंबे और व्यापक विरोध आंदोलनों को नई गति दी है।

सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने बयान में, पहलवी ने प्रदर्शनकारियों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने शासन की धमकियों के बावजूद सड़कों पर उतरकर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। उन्होंने कहा, “आपकी हिम्मत और अडिग संकल्प ने पूरी दुनिया का सम्मान अर्जित किया है।” उन्होंने विरोध में भारी भीड़ जुटने को ईरान की शीर्ष नेतृत्व द्वारा जारी चेतावनियों का “सशक्त जवाब” बताया और कहा कि अब देश के शासक “छिपे हुए” हैं और जनता की हिम्मत से भयभीत हैं।

Also Read: 65 मौतें, 2311 गिरफ्तारी के बाद एक फोन कॉल से सरकार विरोधी प्रदर्शन और तेज….आखिर ईरान में हो क्या रहा है?

पहलवी ने विरोध की रफ्तार बढ़ाने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से परिवहन, तेल, गैस और ऊर्जा जैसे प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों को देशव्यापी हड़ताल में शामिल होना चाहिए। उनका मानना है कि लगातार सड़कों पर दबाव और आर्थिक व्यवधान ईरान की शासन व्यवस्था और उसकी कमजोर दमन प्रणाली को “घुटनों पर ला देगा”।

इस बयान के बाद ईरान के कई शहरों में प्रदर्शन तेज हो गए हैं और देश में राजनीतिक अस्थिरता के संकेत बढ़ते जा रहे हैं।

ईरान के निर्वासित नेता ने नागरिकों से 10 और 11 जनवरी को शाम 6 बजे के बाद राष्ट्रीय झंडे और प्रतीक चिन्हों के साथ सड़कों पर आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अब सिर्फ विरोध प्रदर्शन करने का समय नहीं है, बल्कि शहरों के प्रमुख क्षेत्रों पर नियंत्रण पाने और उन्हें स्थायी रूप से कब्जे में लेने की तैयारी करनी है। उन्होंने अलग-अलग मार्गों से प्रदर्शनकारियों को जोड़कर एकजुट होने की भी सलाह दी।

इस अपील में उन्होंने सुरक्षा बलों के उन सदस्यों को भी सीधे संबोधित किया, जो प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करने में हिचकिचा रहे हैं। उन्होंने उन्हें कहा कि वे “दमन मशीन को और धीमा करें और बाधित करें”, ताकि निर्णायक क्षण में विरोधियों के खिलाफ मजबूत स्थिति बनाई जा सके।

निर्वासित नेता ने यह भी संकेत दिया कि अगर परिस्थितियां अनुकूल हुईं तो वह ईरान लौटने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं भी देश लौटने की तैयारी कर रहा हूँ, ताकि हमारी राष्ट्रीय क्रांति की सफलता के समय मैं आपके साथ खड़ा रह सकूँ। मुझे विश्वास है कि वह दिन अब बहुत करीब है।”

वहीं ईरानी अधिकारियों ने विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए गिरफ्तारी, भारी सुरक्षा बल तैनाती और इंटरनेट प्रतिबंध लगाए हैं, ताकि प्रदर्शनकारियों के बीच समन्वय मुश्किल हो। हालांकि कुछ रैलियों में लोग पहलावी के नाम के नारे भी लगा रहे हैं, विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंदोलन व्यापक रूप से सामाजिक और आर्थिक परेशानियों, राजनीतिक दमन और सिस्टम में बदलाव की मांग से प्रेरित है, न कि केवल राजशाही के पुनःस्थापन की चाह से।

28 दिसंबर से शुरू हुए ये विरोध प्रदर्शन अब तेहरान, मशहद और क़ोम सहित कई बड़े शहरों तक फैल चुके हैं। सुरक्षा बलों के साथ झड़पों में अब तक कम से कम 60 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग हिरासत में लिए गए हैं।

First Published - January 10, 2026 | 5:24 PM IST

संबंधित पोस्ट