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सुलह से सुलझे सड़क निर्माण दावे

Last Updated- December 12, 2022 | 10:06 AM IST

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने पिछले 2 साल के दौरान राजमार्ग निर्माण दावों के 66 मामले सुलह प्रक्रिया से निपटाए हैं। इस कवायद से दरअसल प्राधिकरण को फायदा हुआ है क्योंकि सुलह प्रक्रिया से पंचाट दावों के एक चौथाई के  बराबर में ही कंसेसनायर को भुगतान करके मामले को निपटाने में मदद मिली है। एनएचएआई मामलों में सुलह करने को प्राथमिकता दे रहा है और सुलह प्रक्रिया से विवादों को सुलझाने पर काम कर रहा है।
एनएचएआई के एक शीर्ष अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘हम सभी कांट्रैक्टरोंं या कंसेसनायरों से कह रहे हैं कि वे सुलह के लिए आएं, जिससे उनके दावों का तेजी से समाधान हो सके।’
अब तक 134 मामले स्वतंत्र विशेषज्ञों की सुलह समिति (सीसीआईई) को भेजे गए हैं। इनमें से 66 कांट्रैक्टरों के 16,092.63 करोड़ रुपये के दावे और एनएचएआई के 5,977.82 करोड़ रुपये के प्रतिदावों को पिछले 2 साल में 5,642 करोड़ रुपये में सुलझा लिया गया है।
इस साल की शुरुआत में 70,000 करोड़ के पंचाट दावे निर्माण कंपनियों ने किए थे।
उपरोक्त उल्लिखित अधिकारी ने कहा, ‘इनमें से ज्यादातर दावे बढ़ा चढ़ाकर किए गए थे, लेकिन वास्तविक दावा 20,000 करोड़ रुपये का था। अब सुलह प्रक्रिया से मांग के एकचौथाई में समाधान हो रहा है।’
सुलह प्रक्रिया के तहत एनएचएआई की शुद्ध देनदारी 20,000 करोड़ रुपये होगी। प्राधिकरण का दावा है कि करीब हर कंसेसनायर सुलह से सहमत है क्योंकि इससे तेजी से समाधान हो रहा है और उन्हें धन मिल जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि कर्ज समाधान, कोविड से जुड़ी नकदी की चिंता और लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण फर्मों को सुलह की ओर जाना पड़ रहा है। इस समय एचसीसी, सदभाव इंजीनियरिंग, अशोका बिल्डकॉन और इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंशियल सर्विसेज (आईएलऐंडएफएस) इस प्रक्रिया में लगे हैं।
नकदी के संकट से जूझ रही कंपनियों के लिए  सुलह आसान और साफ सुथरी प्रक्रिया है और पंचाट अवार्ड के 75 प्रतिशत के बराबर बैंक गारंटी रखने का मसला भी नहीं है।
2020 की शुरुआत में एनएचएआई ने पंचाट का गठन कर सुलह की प्रक्रिया शुरू की थी और आईएलऐंएफएस के करीब 650 करोड़ रुपये के दावे को 200 करोड़ रुपये में निपटाया गया था।

First Published - January 1, 2021 | 9:13 PM IST

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