Budget 2026: जैसे-जैसे बजट 2026-27 की तारीख करीब आ रही है, टैक्स विशेषज्ञों ने सरकार को चेताया है कि उच्च आय वर्ग पर इनकम टैक्स अधिभार (सर्चार्ज) बढ़ाना या वेल्थ टैक्स को फिर से लागू करना खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत में पूंजी और टैलेंट के पलायन का खतरा बढ़ सकता है।
वर्तमान में, जिन व्यक्तियों की सालाना इनकम 50 लाख रुपये से अधिक है, उन पर इनकम के स्तर के अनुसार सर्चार्ज लगता है।
50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक की आय पर 10% सर्चार्ज
1 करोड़ से 2 करोड़ रुपये तक 15%
2 करोड़ से 5 करोड़ रुपये तक 25%
5 करोड़ रुपये से ऊपर नए टैक्स सिस्टम में 25%, जबकि पुराने सिस्टम में यह 37% है।
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विशेषज्ञों के अनुसार, हाल ही में जीएसटी दरों में कटौती और कम इनकम टैक्स कलेक्शन से सरकार को इस वित्तीय वर्ष में करीब 2 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। वहीं, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में बढ़ती खर्च की जरूरतें सरकार को नए राजस्व स्रोत खोजने पर मजबूर कर सकती हैं।
लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सुपर-रिच पर टैक्स बढ़ाने से उल्टा असर पड़ सकता है।
पीडब्ल्यूसी इंडिया के पार्टनर अमित राणा ने कहा कि भारत पहले ही वर्टिकल इक्विटी के सिद्धांत का पालन करता है, यानी जो अधिक कमाता है, वह अधिक टैक्स देता है। उन्होंने कहा, “जब टैक्स का बोझ बहुत अधिक हो जाता है, तो उच्च आय वाले लोग भारत छोड़ने पर विचार कर सकते हैं। आज के वैश्विक वातावरण में यह आसान है। ऐसे लोग अक्सर उद्योग और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”
ईवाई इंडिया की टैक्स पार्टनर सुरभि मारवाह ने चेताया कि ज्यादा सर्चार्ज या वेल्थ टैक्स की वापसी उच्च-आय वाले लोगों को कम टैक्स वाले देशों की ओर खींच सकती है। उन्होंने कहा कि टैक्स दरों के साथ-साथ टैक्स सिस्टम की स्थिरता और पहले से समझ में आने वाली प्रणाली भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि वेल्थ टैक्स 2015 में इसलिए हटा दिया गया क्योंकि इसका संग्रह बहुत कम था और प्रशासनिक जटिलताएं ज्यादा थीं। मारवाह के अनुसार, सर्चार्ज लागू करना आसान है और इससे विवाद भी कम होते हैं।
शार्दुल अमरचंद मंगलदास के पार्टनर गौरी पुरी ने कहा कि उच्च टैक्स से उद्यमिता और रोजगार सृजन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, वहीं वेल्थ टैक्स के लौटने से अनुपालन जटिल हो जाएगा।
डेलॉयट इंडिया (Deloitte India) के पार्टनर अलोक अग्रवाल ने बताया कि बजट 2023 में सरकार ने नए टैक्स सिस्टम के तहत सबसे उच्च सर्चार्ज को 37% से घटाकर 25% कर दिया था, जिससे टॉप मार्जिनल रेट करीब 39% रह गया। उन्होंने कहा कि हाल ही में टैक्स में कटौती को देखते हुए सरकार जल्दी ही इस दिशा में बदलाव की संभावना कम है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार को टैक्स दर बढ़ाने की बजाय बेहतर टैक्स कलेक्शन, टेक्नोलॉजी और डेटा शेयरिंग पर ध्यान देना चाहिए।