facebookmetapixel
Advertisement
‘इस्तीफा नहीं दूंगी, हारे नहीं, हराया गया’, हार के बाद ममता बोलीं: चुनाव आयोग से लड़ाई, अब सड़क पर संघर्षSIP ‘किंग’: इस फंड ने ₹1000 की SIP से 30 साल में बना दिए ₹2.5 करोड़; देखें कहां लगाया पैसा?इतिहास के सबसे बुरे दौर में भारतीय करेंसी! डॉलर के मुकाबले 95.43 पर पहुंची कीमत, कब थमेगी यह ढलान?NSE ने लॉन्च किया Electronic Gold Receipts, अब शेयरों की तरह खरीदें सोनामलेरिया की दवा ने बदली किस्मत! Anuh Pharma के शेयर में अचानक तूफानी तेजीअब Form 12B की जगह Form 122, नौकरी बदलने वाले ध्यान रखें; वरना कट जाएगा टैक्सहैदराबाद बना लग्जरी हाउसिंग का किंग, बेंगलूरु ने पकड़ी रफ्तार, जानें किस शहर में मिल रहा सबसे बड़ा घरMarico Q4 Results: मुनाफा 18% बढ़कर ₹408 करोड़ पर, निवेशकों के लिए 400% डिविडेंड का ऐलानHUF vs Will: संपत्ति के बंटवारे में कौन है असली ताकतवर? एक फैसला बदल सकता है परिवार का भविष्यपोस्ट ऑफिस स्कीम्स में करते हैं निवेश? अब हर ट्रांजैक्शन के लिए यह डॉक्यूमेंट जरूरी, नहीं तो होगी परेशानी

लेखक : बीएस संपादकीय

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: जापान और यूनाइटेड किंगडम की अर्थव्यवस्था में मंदी और वैश्विक खतरे

गत सप्ताह दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं जापान और यूनाइटेड किंगडम ने कहा कि लगातार दो तिमाहियों से उनके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि ऋणात्मक है। आमतौर पर अर्थशास्त्री इसे अर्थव्यवस्था के मंदी में जाने का संकेत मानते हैं। इसकी वजह से जापान शायद सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की सूची में नीचे फिसल जाए। जर्मनी […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: तीसरी तिमाही में कंपनियों के नतीजों से मिल रहा उत्साहवर्धक संकेत

चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2023) में आए 3,233 सूचीबद्ध कंपनियों के नतीजे बताते हैं कि खपत अभी भी कम है लेकिन सुधार के कुछ संकेत हैं और कॉर्पोरेट निवेश में सुधार हो रहा है। विशुद्ध बिक्री में पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में केवल सात फीसदी का इजाफा हुआ […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्रा और भविष्य

भारतीय रिजर्व बैंक 2022 के उत्तरार्द्ध से ही प्रायोगिक स्तर पर केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) जारी कर रहा है। खुदरा क्षेत्र में ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित सीबीडीसी-आर को एक सीमित उपयोगकर्ता समूह (सीयूजी) के बीच जारी किया गया था जिसमें भाग लेने वालों में ग्राहक और व्यापारी शामिल हैं।  प्रायोगिक तौर पर जारी […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial:  चुनावी चंदे में पारदर्शिता और सुधार का अवसर

सर्वोच्च न्यायालय के पांच न्यायाधीशों के संवैधानिक पीठ ने देश में चुनावी चंदे में आवश्यक पारदर्शिता लाने वाला निर्णय सुनाते हुए छह वर्ष पुरानी चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक करार देते हुए उस पर रोक लगा दी। उसने अपने निर्णय में कहा कि यह बॉन्ड संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) में निहित सूचना के अधिकार का […]

आज का अखबार, संपादकीय

NDA vs UPA: आर्थिक प्रदर्शन में कौन आगे?

केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में प्रस्तुत श्वेत पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार के कार्यकाल के 10 वर्षों में देश का आर्थिक प्रदर्शन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के 10 वर्षों (2004-14) की तुलना में बेहतर रहा है। जैसा कि इस संदर्भ में इस समाचार […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना में गहन सुधार आवश्यक

सरकार की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना देश की औद्योगिक नीति के सबसे करीब है। कई पीएलआई कार्यक्रम उन क्षेत्रों के लिए भी तैयार किए गए जिनके बारे में सरकार मानती है कि वे देश के विकास और आर्थिक सुरक्षा के लिए प्रासंगिक हैं।  इनमें से कुछ सीधे तौर पर पर्यावरण के अनुकूल बदलाव […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: राजकोषीय संघवाद, केंद्र के नियंत्रण और हस्तांतरण को लेकर चिंता

बजट सत्र के दौरान यह एक किस्म की परिपाटी सी बन गई है कि दक्षिण भारत के कुछ राज्यों की सरकारों ने करों में अपनी हिस्सेदारी को लेकर आपत्ति जताई है यानी केंद्र सरकार के राजकोषीय संघवाद पर प्रश्नचिह्न लगाया है। उनकी शिकायत नई नहीं है लेकिन हाल के वर्षों में उसके साथ अतिरिक्त राजनीतिक […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: वृहद आर्थिक स्थिरता का लाभ

इसमें दो राय नहीं कि 2013-14 में भारत की अर्थव्यवस्था मुश्किल हालात से दो-चार थी। वह संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के दूसरे कार्यकाल का अंतिम वर्ष था और तब से अब तक हालात में सुधार हुए हैं। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा गत सप्ताह प्रस्तुत श्वेत पत्र की बहुत सीमित नीतिगत प्रासंगिकता है।  भारत की […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: औद्योगिक उत्पादन और रोजगार के क्षेत्र में संतुलित दृष्टिकोण

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने हाल ही में उद्योगों के वार्षिक सर्वेक्षण (एएसआई) के वर्ष 2020-21 और 2021-22 के आंकड़े जारी कर दिए। ध्यान देने वाली बात है कि दोनों वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था कोविड-19 महामारी से मची उथल पुथल से जूझ रही थी।  बहरहाल, परिणाम दिखाते हैं कि देश का विनिर्माण क्षेत्र […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: भारतीय रिजर्व बैंक ने नीतिगत रीपो दर पर रखा लंबा विराम

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने 2024 की अपनी पहली बैठक में नीतिगत रीपो दर और अपने रुख दोनों को अपरिवर्तित रखा। उसने नीतिगत रीपो दर को 6.5 फीसदी के स्तर पर ही बने रहने दिया। इस यथास्थिति की वजह एकदम साफ है।  एमपीसी का इरादा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक […]

1 67 68 69 70 71 103
Advertisement
Advertisement