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लेखक : बीएस संपादकीय

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: भारतीय रिजर्व बैंक ने नीतिगत रीपो दर पर रखा लंबा विराम

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने 2024 की अपनी पहली बैठक में नीतिगत रीपो दर और अपने रुख दोनों को अपरिवर्तित रखा। उसने नीतिगत रीपो दर को 6.5 फीसदी के स्तर पर ही बने रहने दिया। इस यथास्थिति की वजह एकदम साफ है।  एमपीसी का इरादा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक […]

आज का अखबार, संपादकीय

तेल की बढ़ती मांग: घरेलू उत्पादन और ग्लोबल सप्लाई चेन पर ध्यान दे भारत

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने बुधवार को यह अनुमान जताया कि 2030 तक वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की मांग में कितना इजाफा हो सकता है। आईईए के मुताबिक मांग में इजाफे की सबसे बड़ी वजह भारत होगा जो सबसे बड़े तेल आयातक के रूप में चीन को पछाड़कर शीर्ष पर आ जाएगा। इस समय […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: शोध एवं विकास व्यय में इजाफा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अंतरिम बजट पेश करते समय जो भाषण दिया उसमें उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि सरकार का ध्यान उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। ध्यान देने वाली बात यह है कि सीतारमण ने उभरते क्षेत्रों में नवाचार और शोध को प्रोत्साहन देने के लिए एक लाख […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: द्विपक्षीय समझौते और ‘पहले भारत के विकास’ की भावना

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अंतरिम बजट से यह बात सामने आई कि सरकार कई देशों के साथ द्विपक्षीय निवेश समझौतों (बीआईटी) के लिए बातचीत कर रही है। यह अच्छी खबर है क्योंकि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की गति धीमी हो रही है। मध्यस्थता विवादों के निस्तारण समेत निवेश नियमों के लिए पारस्परिक ढांचा तैयार करके […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: अंतरिम बजट में अपनाया गया बीच का रास्ता और गुणात्मक सुधार

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट विश्लेषकों को सुखद आश्चर्य में डालते हुए अंतरिम बजट में राजकोषीय घाटे का अनुमान से कम स्तर प्रस्तुत किया। यह बात खासतौर पर सराहनीय है क्योंकि चालू वर्ष में नॉमिनल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के कमजोर रहने का अनुमान है। सरकार का मानना है कि […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: उच्च शिक्षा में और सुधार जरूरी

शैक्षणिक सत्र 2021-22 के लिए अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (एआईएसएचई) के ताजा संस्करण में इस बात को रेखांकित किया गया है कि बीते कुछ वर्षों में देश के उच्च शिक्षा क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण सुधार और वृद्धि देखने को मिली है। सर्वेक्षण के मुताबिक बीते वर्षों में छात्रों के नामांकन में लगातार सुधार हुआ है। […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: आत्मविश्वास से भरा बजट

चुनावी साल में केंद्र सरकार को 1 फरवरी को केवल लेखानुदान पेश करना रहता है। सरकार ने प्रमुख नीतिगत प्रस्तावों तथा कर बदलावों को जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया है जब नई सरकार सत्ता में होगी। समय के साथ लेखानुदान ‘अंतरिम बजट’ में बदल गया। इस वर्ष के अंतरिम बजट में पारदर्शिता और […]

आज का अखबार, संपादकीय

भ्रष्टाचार: भारत की प्रगति में बाधा

ट्रांसपैरेंसी इंटरनैशनल के नवीनतम भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (सीपीआई) से पता चलता है कि 2023 में देश में सरकारी क्षेत्र का भ्रष्टाचार एक मुद्दा रहा। वर्ष 2022 में जहां देश को 180 देशों में 85वां स्थान मिला था, वहीं इस वर्ष वह फिसलकर 93वें स्थान पर चला गया है। यह रैंकिंग सापेक्ष स्थिति दर्शाती है। देश […]

आज का अखबार, लेख

Editorial: आर्थिक सुधारों से मजबूत हुई अर्थव्यवस्था, लेकिन चुनौतियां भी

आर्थिक मामलों के विभाग ने सोमवार को बीते एक दशक में देश के आर्थिक प्रदर्शन की समीक्षा प्रस्तुत की। यह हर वर्ष आने वाली आर्थिक समीक्षा नहीं है। उसे तो लोक सभा चुनाव के बाद पेश होने वाले पूर्ण बजट के पहले प्रस्तुत किया जाएगा। अर्थव्यवस्था की समीक्षा में उन सुधारों को प्रमुखता से पेश […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: नीतीश कुमार की NDA में वापसी, अधर में लटका ‘इंडिया’ का भविष्य!

लोकसभा चुनाव के पहले नीतीश कुमार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच तीसरी बार गठबंधन हुआ है लेकिन लगता नहीं कि इससे बिहार की तकदीर में कोई बदलाव आएगा। एक बार फिर भाजपानीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के साथ समझौता करके उन्होंने नौवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके राजग और […]

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