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इंडसइंड बैंक की अकाउंटिंग गड़बड़ियों पर SFIO की सख्ती, बैंक अधिकारियों से हुई पूछताछ

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब मुंबई पुलिस की EOW ने धन की हेराफेरी या डायवर्जन का कोई सबूत न मिलने पर अपनी प्रारंभिक जांच बंद करने की तैयारी कर ली है

Last Updated- December 19, 2025 | 12:46 PM IST
IndusInd Bank
Representational Image

IndusInd Bank Accounting Errors: निजी क्षेत्र के इंडसइंड बैंक ने शुक्रवार को कहा कि सीरियस फ्रॉड इन्वे​स्टिगेशन ऑफिस (SFIO) ने इस सप्ताह बैंक के अधिकारियों से बातचीत की है और जल्द ही अकाउंटिंग से जुड़ी गड़बड़ियों पर विशेष जानकारी मांगते हुए लिखित पत्र भेजेगा। SFIO कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) के अंतर्गत काम करने वाली एक एजेंसी है।

एक नियामकीय फाइलिंग में बैंक ने बताया कि रिजर्व बैंक (RBI) के कॉम​र्शियल बैंकों में धोखाधड़ी जो​खिम प्रबंधन से जुड़े मास्टर निर्देशों (दिनांक 15 जुलाई 2024) के अनुसार, 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक की किसी भी धोखाधड़ी की सूचना RBI के साथ-साथ SFIO को भी देना अनिवार्य है। इसी के अंतर्गत, आंतरिक डेरिवेटिव ट्रेड्स की अकाउंटिंग, ‘अन्य परिसंपत्तियों’ और ‘अन्य देनदारियों’ में कुछ अप्रमाणित बैलेंस, और माइक्रोफाइनेंस ब्याज व शुल्क आय से जुड़े मामलों की जानकारी 2 जून 2025 को SFIO को दी गई थी।

MCA ने SFIO को दिए थे जांच के आदेश

इससे पहले आई रिपोर्टों में कहा गया था कि कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय (MCA) ने इंडसइंड बैंक में अकाउंटिंग में गंभीर अनियमितताओं को लेकर SFIO जांच के आदेश दिए थे। यह कदम वैधानिक ऑडिटरों और फॉरेंसिक रिपोर्ट्स के बाद उठाया गया, जिनमें जनहित से जुड़े गंभीर मुद्दों का हवाला दिया गया था। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने धन की हेराफेरी या डायवर्जन का कोई सबूत न मिलने पर अपनी प्रारंभिक जांच बंद करने की तैयारी कर ली है।

इंडसइंड बैंक ने जनवरी-मार्च तिमाही (Q4FY25) में ₹2,329 करोड़ का शुद्ध घाटा दर्ज किया। यह घाटा बड़े पैमाने पर प्रावधान बढ़ाने और डेरिवेटिव्स तथा माइक्रोफाइनेंस कारोबार से जुड़ी गलत तरीके से दर्ज की गई आय और राजस्व प्रविष्टियों को वापस लेने के बाद हुआ, जिनकी पहचान तिमाही के दौरान हुई थी।

यह भी पढ़ें: इंडसइंड बैंक में 9.5% तक हिस्सेदारी खरीदेगा HDFC Bank, रिजर्व बैंक से मिली मंजूरी

बैंक ने मार्च में किया था गड़बड़ी का खुलासा

मार्च 2025 में बैंक ने खुलासा किया था कि एक आंतरिक समीक्षा में उसके डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में गड़बड़ियां सामने आई हैं। इसके बाद बैंक ने बाहरी एजेंसियों को नियुक्त कर प्रभाव के दायरे और मूल कारण की जांच कराई। जांच में सामने आया कि FY16 से FY24 के बीच बैंक ने कई डेरिवेटिव लेनदेन किए, जिनका अकाउंटिंग ट्रीटमेंट निर्धारित अकाउंटिंग दिशानिर्देशों के अनुरूप नहीं था।

इसके चलते कई वर्षों तक काल्पनिक (नोशनल) आय को लाभ-हानि खाते में दिखाया गया और उसकी संबंधित राशि को एसेट्स के रूप में दर्ज किया गया। बैंक ने FY25 में ऐसी 1,959.98 करोड़ रुपये संचित नोशनल आय को लिख-ऑफ कर दिया है। इसके अलावा, बैंक ने ‘अन्य परिसंपत्तियों’ और ‘अन्य देनदारियों’ के तहत मौजूद 595 करोड़ रुपये की अप्रमानित बैलेंस को समायोजित किया।

ब्याज और शुल्क में हेरफेर

माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो की समीक्षा में यह भी पाया गया कि 673.82 करोड़ रुपये की ब्याज आय और 172.58 करोड़ रुपये की शुल्क आय को गलत तरीके से मान्यता दी गई थी। इन प्रविष्टियों को पलटने से Q4FY25 में 422.56 करोड़ रुपये का नकारात्मक असर पड़ा।

बैंक ने यह भी पाया कि कुछ माइक्रोफाइनेंस लोन को गलत तरीके से स्टैंडर्ड एसेट के रूप में क्लासीफाइड किया गया था और उन पर ब्याज आय भी दर्ज की जा रही थी। क्लासिफिकेशन सुधारने के बाद बैंक ने इन लोन पर 95 प्रतिशत का प्रावधान किया, जिसकी कुल राशि 1,791 करोड़ रुपये रही। इस प्रावधान और ब्याज आय की वापसी से 31 मार्च 2025 तक लाभ-हानि खाते पर 1,969 करोड़ रुपये का प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

इस संकटग्रस्त बैंक के पूर्व एमडी और सीईओ सुमंत कथपालिया और पूर्व डिप्टी सीईओ अरुण खुराना ने डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में करीब 1,960 करोड़ रुपये के नुकसान की जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ दिया है। मौजूदा प्रबंधन इन अधिकारियों को दिए गए बोनस की रिकवरी (क्लॉबैक) के लिए भी कदम उठा रहा है।

First Published - December 19, 2025 | 12:46 PM IST

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