facebookmetapixel
Advertisement
इजराइल को जेडी वेंस की दोटूक चेतावनी- ‘हर सुरक्षा चुनौती का समाधान लोगों को मारकर नहीं कर सकते’IT शेयरों में भारी बिकवाली, निफ्टी IT करीब 6% टूटा; इंफोसिस, TCS समेत सभी 10 शेयर लाल निशान मेंAccenture के कमजोर संकेत से TCS, Infosys और Wipro के निवेशकों को क्या समझना चाहिए?भारत-ब्रिटेन डील का बड़ा फायदा! भारतीय कंपनियों के बचेंगे 500 मिलियन पाउंड हर सालAI बदलेगा रियल एस्टेट का खेल! 7 साल में सेक्टर को मिलेगा 17 अरब डॉलर तक का बूस्टभारत के ब्यूटी मार्केट में बड़ा दांव, लॉरियल खरीदेगी इनोविस्ट में बहुलांश हिस्सेदारीRBI की सख्ती से थम सकती है बॉन्ड बाजार की रफ्तार, विशेषज्ञों ने जताई आशंकाStock Market Update: शेयर बाजार में बड़ी गिरावट! सेंसेक्स 600 अंक टूटा, निफ्टी 24,000 के नीचे; Nifty IT तीन साल के निचले स्तर पर50 बड़ी कंपनियों के साथ भारत आ रही हैं जापान की प्रधानमंत्रीमोदी-ट्रंप मुलाकात के बाद भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को मिली नई रफ्तार

बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलावों की सुगबुगाहट, समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय समिति का हो सकता है गठन

Advertisement

समिति के दायरे में आने वाले विषय अभी नहीं बताए गए हैं और समिति का ढांचा भी घोषित किया जाना है

Last Updated- February 02, 2026 | 8:01 AM IST
Banking Sector Outlook
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

केंद्रीय बजट में बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाने के प्रस्ताव से कुछ पुराने मसलों पर फिर से विचार हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार इनमें कॉरपोरेट घरानों को इस क्षेत्र में अनुमति देने और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को सुव्यवस्थित करने के मसले शामिल हैं।

बजट में ‘विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर उच्च स्तरीय समिति’ बनाने का प्रस्ताव किया गया है। इसका मकसद वित्तीय स्थायित्व, समावेशन और ग्राहक संरक्षण को सुरक्षित रखते हुए इस सेक्टर की व्यापक समीक्षा करना और इसे भारत के विकास के अगले दौर के साथ जोड़ना है। समिति के दायरे में आने वाले विषय अभी नहीं बताए गए हैं और समिति का ढांचा भी घोषित किया जाना है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘समिति के काम करने का दायरा तय किया जाएगा। हम उम्मीद कर रहे हैं कि समिति बैंकिंग क्षेत्र को पूरे विस्तार से देखेगी, ताकि वह ऐसे सुझाव दे सके, जिनसे हमें 2047 के लिए बैंकिंग की योजना बनाने में मदद मिले।’

वित्ती सेवा विभाग के सचिव एम नागराजू ने कहा कि इसके कई पहलू हैं- उदाहरण के लिए वाणिज्यिक ऋण और जीडीपी का अनुपात, बैंकिंग नेटवर्क का विस्तार और जमा और ऋण से संबंधी मसले। इन सब पर पर विचार किया जाएगा। नागराजू ने बजट के बाद प्रेस वार्ता में कहा, ‘हम सभी हिस्सेदारों के साथ परामर्श करेंगे। उसके बाद सरकार विचार करेगी कि 2047 के लिए हम किस तरह से मजबूत नींव रखें।’

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे मसलों पर विचार कर सकती है। इनमें लंबे समय से कॉरपोरेट घरानों को बैंकिंग में प्रवेश करने की अनुमति दिए जाने पर चल रही बहस, बड़े शेयरधारकों के वोटिंग का अधिकार (वर्तमान में 26 प्रतिशत पर सीमित) और बैंकिंग प्रणाली में अधिक जुड़ाव की आवश्यकता शामिल है। इसमें सीमित दायरे में  काम करने वाले छोटे बैंकों को मिलाकर बड़े और अधिक प्रतिस्पर्धी संस्थान बनाना शामिल हो सकता है।

नियोस्ट्रैट एडवाइजर्स एलएलपी के संस्थापक अबीजर दीवानजी ने कहा, ‘समिति लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों पर फिर से विचार का अवसर देगी। इसमें बैंकिंग में कॉरपोरेट के संभावित प्रवेश का मसला भी शामिल है। यह ऐसा क्षेत्र है, जिस पर नियमन की सख्ती रही है। भारत को बड़े बैंकों की जरूरत है। इसके लिए उसे घरेलू और विदेशी दोनों तरह के पूंजी के सभी स्रोतों का दोहन करने की जरूरत है।’

उन्होंने कहा, ‘बैंकिंग में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए अनुमोदन प्रक्रिया का मसला भी है। बड़े शेयरधारकों के लिए मौजूदा 26 प्रतिशत वोटिंग अधिकार की सीमा एक बाधा है, जिस पर फिर से विचार की आवश्यकता है।’

Advertisement
First Published - February 2, 2026 | 8:01 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement