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Editorial: चुनौतीपूर्ण समय का बजट — संतुलित घाटा और सर्विस सेक्टर से विकास की उम्मीद

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इसका मतलब है कि सरकार ने अपने खर्च और कर्ज (घाटे) को बहुत ज्यादा न बढ़ाकर एक संतुलित और अनुशासित रास्ता चुना है

Last Updated- February 02, 2026 | 8:51 AM IST
Budget 2026 Analysis

Union Budget 2026: वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट असाधारण भूराजनीतिक उथल-पुथल के बीच प्रस्तुत किया गया। भारत की वृद्धि दर 7.4 फीसदी के साथ मजबूत बनी रही लेकिन आगे इसे बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा। बीते कई सालों से सरकार का रुख सार्वजनिक निवेश को वृद्धि को बढ़ावा देने में प्रयोग करने का रहा है। इस वर्ष बुनियादी ढांचे पर होने वाला व्यय बढ़कर 12.2 लाख करोड़ रुपये होने जा रहा है जो काफी अधिक है। इसके साथ ही नई और बड़ी अधोसंरचना परियोजनाओं के लिए दृष्टिकोण में भी विस्तार किया गया है।

इसमें शामिल हैं: दक्षिण भारत में विशेष रूप से विभिन्न विकास केंद्रों को जोड़ने वाली नई उच्च गति की रेल लिंक श्रृंखला, पूर्व-पश्चिम धुरी पर नए समर्पित मालवाहक गलियारे, तटीय माल परिवहन, जिससे रेल और राजमार्गों पर दबाव कम हो सके और 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग, जिनका उद्देश्य आंतरिक क्षेत्रों से खनिज संपदा को आसानी से बंदरगाहों तक पहुंचाना है। यह बात ध्यान देने लायक है कि अतिरिक्त पूंजीगत व्यय का बड़ा हिस्सा ब्याज रहित ऋण में इजाफे के रूप में है जो राज्यों को उनके ही निवेश के लिए दिया जाता है।

बहरहाल, फैक्टरियों और परियोजनाओं में निजी निवेश ने सरकारी निवेश को लेकर प्रतिक्रिया नहीं दी और रोजगार वृद्धि सीमित बनी रही। सरकार ने विनिर्माण पर जो जोर दिया उसे निस्संदेह कुछ कामयाबी मिली। केंद्रीय वित्त मंत्री ने घोषणा की है कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन का दूसरा दौर शुरू किया जाएगा और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के आवंटन को 23,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये किया जाएगा। मेक इन इंडिया को प्रतिकूल हालात का सामना करते रहना होगा। इसमें मौजूदा कारोबारी तनाव भी शामिल हैं। Budget 2026 में सेवा क्षेत्र पर बहुत अधिक ध्यान दिया गया है।

यह भी पढ़ें: SME को ‘चैंपियन’ बनाने के लिए ₹10,000 करोड़ का फंड, छोटे उद्योगों की किस्मत बदलेगी सरकार

एक उच्चस्तरीय समिति का प्रस्ताव रखा गया है जो सेवा क्षेत्र में ‘शिक्षा से रोजगार और उद्यमिता’ तक रोजगार और उत्पादन पर ध्यान देगी। आईटी सक्षम सेवाओं, पर्यटन, स्वास्थ्य और पशु चिकित्सा, सामाजिक देखभाल और रचनात्मक क्षेत्रों तक कई सेवा क्षेत्रों की सहायता के लिए बजट समर्थन की घोषणा की गई। इसमें नए उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना से लेकर नए संस्थानों के लिए सब्सिडी सहायता तक शामिल हैं। यह परिवर्तन सरकार की व्यापक चिंता को दर्शा सकता है। यह चिंता नई विनिर्माण इकाइयों में निजी निवेश की कमी, नए कारखानों की बढ़ती पूंजीगत लागत और भारतीय वस्तुओं के लिए वैश्विक बाजार तक पहुंच और शुल्क तथा गैर शुल्क बाधाओं से संबंधित है। सेवा क्षेत्र को इन समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता।

हालांकि, इसमें कार्यबल में उच्च कौशल की आवश्यकता होती है। इस कमी को दूर करना ही इन नई पहलों का मूलभूत विषय प्रतीत होता है। फिर भी यह उचित प्रश्न है कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस की क्रांति इन क्षेत्रों में रोजगार सृजन पर कितना प्रभाव डालेगी क्योंकि अब सरकार अपना ध्यान इन पर केंद्रित कर रही है।

मौजूदा सरकार की आर्थिक नीति का दूसरा प्रमुख स्तंभ, पूंजीगत व्यय के अलावा राजकोषीय संयम भी रहा है। Budget 2026 पर्यवेक्षकों को अपेक्षाकृत विरोधाभासी संकेत देता है। यह पहला साल है जब औपचारिक लक्ष्य अगले वर्ष के राजकोषीय घाटे से हटकर ऋण-जीडीपी अनुपात पर केंद्रित किया गया है, जिसे अब ‘ऋण लक्ष्य निर्धारण के लिए परिचालन साधन’ के रूप में पुनः परिभाषित किया गया है। इससे विश्लेषण कुछ जटिल हो जाता है, क्योंकि अब भविष्य में जीडीपी की दिशा और भी महत्त्वपूर्ण हो गई है। बजट  अगले वर्ष के लिए 10 प्रतिशत नॉमिनल वृद्धि मानकर चलता है, जो इस वर्ष से थोड़ी अधिक है । इसमें यह भाव निहित है कि उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति इस वर्ष कुछ अधिक होगी।

इसका नतीजा यह हुआ कि वित्त मंत्री यह वादा कर सकती हैं कि ऋण-जीडीपी अनुपात को मौजूदा वर्ष के 56.1 फीसदी से कम करके 2026-27 में 55.6 फीसदी किया जाएगा। यह अपेक्षा से धीमा है। राजकोषीय घाटा भी जीडीपी के 4.4 फीसदी से घटकर 4.3 फीसदी हो जाएगा। ये बहुत छोटे बदलाव हैं और राजकोषीय एकीकरण के प्रति गत दृष्टिकोण से एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाते हैं।

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इस वर्ष एक ओर, वैश्विक दबाव काफी अधिक हैं और वित्त मंत्री शायद प्रणाली को झटका देना पसंद न करें, खासकर तब जबकि कुछ प्रणालियां, जैसे जीएसटी प्राप्तियां, संकट का संकेत दे रही हों। दूसरी ओर, ऋण का गणित प्रतिकूल है क्योंकि पिछले उधार की कई किश्तें इस वर्ष परिपक्व होंगी। शुद्ध उधारी केवल मामूली रूप से बढ़ेगी, सकल बाजार उधारी तेजी से बढ़कर 17.2 लाख करोड़ रुपये हो जाएगी, जो 14.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इससे स्वाभाविक रूप से बॉन्ड बाजार पर काफी दबाव पड़ेगा और यील्ड तथा दरों पर बोझ बनेगा।

जहां तक सामान्य निवेशक, छोटे व्यवसायी और उपभोक्ताओं का सवाल है, सरकार की कार्रवाई का ध्यान तंत्र और शासन को आसान बनाने पर केंद्रित है। यह स्वागत योग्य है। बजट में जो वादे किए गए हैं उनमें छोटे उद्यमों के लिए ट्रेड्स प्रणाली के उपयोग का विस्तार, कई कर अपराधों को अपराध मुक्त बनाना और कुछ चूकों (जैसे विदेशी संपत्तियों के लिए) पर प्रतिरक्षा प्रदान करना, भरोसे पर आधारित कस्टम्स के लिए नए दृष्टिकोण का वादा और व्यक्तिगत यात्रा के लिए शुल्क मुक्त भत्तों का संशोधन शामिल हैं।

एक चीज जिसे सख्त किया गया है, वह है वायदा एवं विकल्प कारोबार पर प्रतिभूति लेनदेन कर। कुछ बड़े बाजार प्रतिभागी चिंतित हैं कि इससे नकदी कम होगी लेकिन तथ्य यह है कि खुदरा व्यापारी इन जटिल लेन-देन में अत्यधिक शामिल हो रहे थे, और वायदा एवं विकल्प में लग रही तिकड़मों को रोकने के लिए कुछ कदम उठाना आवश्यक था। कुल मिलाकर, Budget 2026 इस दांव पर आधारित है कि धीमा राजकोषीय एकीकरण, राज्य का पूंजीगत व्यय और सेवाओं को बढ़ावा देना विकास को जारी रखेगा।

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First Published - February 2, 2026 | 8:50 AM IST

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