Silver ETFs Crash: सोमवार को सोना और चांदी से जुड़े ETF में भारी गिरावट देखने को मिली। यह लगातार तीसरा दिन है जब निवेशकों की घबराहट खुलकर सामने आई। देश और दुनिया के बाजारों में सोना और चांदी तेजी से गिरे, जिससे ETF निवेशकों में हड़कंप मच गया। चांदी से जुड़े ETF पर सबसे तेज मार पड़ी। NSE पर कई सिल्वर ETF करीब 20 प्रतिशत तक टूट गए। बाजार में ऐसा माहौल बन गया कि निवेशक बिकवाली के लिए टूट पड़े। चांदी की यह गिरावट अब तक की सबसे तेज चालों में गिनी जा रही है।
जिस सोने को हमेशा सुरक्षित निवेश माना जाता है, वही इस बार दबाव में दिखा। गोल्ड ETF 6 से 11 प्रतिशत तक गिर गए। कुछ ही घंटों में सोने की कीमतों ने निवेशकों का भरोसा हिला दिया। MCX पर सोना करीब 5 प्रतिशत गिरकर ₹1,37,390 प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि चांदी 6 प्रतिशत टूटकर ₹2,49,713 प्रति किलो पर पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना 6 प्रतिशत और चांदी करीब 12 प्रतिशत गिर गई। रिकॉर्ड ऊंचाई से देखें तो सोना 13.5 प्रतिशत और चांदी करीब 32 प्रतिशत नीचे आ चुकी है।
| ETF का नाम | गिरावट |
|---|---|
| HDFC सिल्वर ETF | 19.2% |
| निप्पॉन इंडिया सिल्वर ETF | 18% |
| कोटक सिल्वर ETF | 20% |
| ICICI प्रूडेंशियल सिल्वर ETF | 20% |
| SBI सिल्वर ETF | 20% |
| एक्सिस सिल्वर ETF | 20% |
शुक्रवार को सोने में एक दशक से ज्यादा की सबसे बड़ी गिरावट आई थी और चांदी में अब तक की सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट दर्ज हुई थी। उसी बिकवाली की आंधी सोमवार को भी थमी नहीं और बाजार में दबाव बना रहा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बड़ी गिरावट की शुरुआत अमेरिका से आई एक खबर से हुई। कहा गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप फेडरल रिजर्व के प्रमुख पद के लिए केविन वार्श को नामित कर सकते हैं। इस खबर ने वैश्विक बाजारों में बेचैनी बढ़ा दी।
Zerodha के संस्थापक और CEO नितिन कामथ ने इस गिरावट को बहुत ही दुर्लभ घटना बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में बाजार इतनी तेजी से टूटता है कि जोखिम संभालना मुश्किल हो जाता है। ट्रेडर्स का नुकसान उनकी जमा रकम से भी ज्यादा हो सकता है। उन्होंने कहा कि अपने 16 साल के अनुभव में उन्होंने ऐसा हाल सिर्फ एक बार पहले देखा था, जब कोविड के दौरान कच्चे तेल की कीमत शून्य से नीचे चली गई थी।
Geojit Financial Services के सीनियर निवेश रणनीतिकार श्रीराम बी के आर ने कहा कि गोल्ड और सिल्वर ETF में गिरावट की वजह अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमतों का टूटना है। उन्होंने कहा कि कीमतें अब भी ऊंचे स्तर पर हैं और आगे का रास्ता साफ नहीं है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि वैश्विक तनाव सोने को कुछ सहारा दे सकता है, लेकिन अभी बाजार बहुत अस्थिर है। निवेशकों को जल्दबाजी से बचने और सोच-समझकर कदम उठाने की सलाह दी जा रही है।