प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
Budget 2026: कम मूल्य वाले, पीयर-टु-मर्चेंट (पी2एम) यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड के लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए आम बजट में 2,000 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि आवंटित की गई है, जबकि ऐसे भुगतानों पर शून्य मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) जारी रहेगी। वित्त वर्ष 26 के लिए अंतिम आवंटन 2,196.21 करोड़ रुपये था, जो उसी वर्ष के लिए 437 करोड़ रुपये के बजटीय आवंटन से पांच गुना अधिक है।
हालांकि भारत की प्रमुख रियल-टाइम भुगतान प्रणाली के विकास और स्थिरता की मदद के लिए उद्योग जितनी राशि आवश्यक बताता है, यह आवंटन उससे से कम से कम पांच गुना कम है। उम्मीदें तो 10,000 करोड़ रुपये से लेकर 15,000 करोड़ रुपये तक की थीं। यूपीआई यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) है, जो उपयोगकर्ताओं को तत्काल आधार पर साथियों और व्यापारियों को धन हस्तांतरित करने की सुविधा देता है।
जानकार सूत्रों ने कहा कि भुगतान उद्योग बजट से पहले वित्त मंत्रालय के साथ इस तरह के लेनदेन पर संभावित एमडीआर के संबंध में जायजा ले रहा था। सूत्र ने बताया कि उद्योग अगले कुछ महीने में एमडीआर के अपने प्रयास को आगे बढ़ाने के लिए एक बार फिर मंत्रालय से संपर्क करेगा। एमडीआर बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया के लिए भुगतान किया जाने वाला शुल्क होता। साल 2025 में यूपीआई ने 228.28 अरब यूपीआई लेनदेन दर्ज किए।
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आंकड़ों से पता चलता है कि प्रोत्साहन के लिए सरकार ने वित्त वर्ष 24 में 3,631 करोड़ रुपये का सबसे ज्यादा व्यय किया था। उद्योग के अनुसार देश में अगले एक दशक के दौरान हर महीने 100 अरब यूपीआई लेनदेन किए जाने की क्षमता है, जो भुगतान प्रणाली की कमाई पर निर्भर करता है।
एवेन्यूजएआई लिमिटेड के प्रबंध निदेशक और पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन विश्वास पटेल ने कहा कि उद्योग 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के प्रोत्साहन की मांग करता रहा है और उन्होंने तर्क दिया कि सब्सिडी पर निर्भर रहने के बजाय, 20 लाख रुपये से अधिक के वार्षिक कारोबार वाले व्यापारियों के लिए यूपीआई पी2एम लेनदेन पर 30 आधार अंक से कम विनियमित एमडीआर की अनुमति दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा ‘यूपीआई के शून्य एमडीआर और सरकार द्वारा हर दिन मुफ्त में 30 करोड़ लेनदेन की प्रक्रिया के लिए केवल 2,000 करोड़ रुपये आवंटित करने से बड़े स्तर और विकास के मामले में पूरे तंत्र में बाधा आएगी। छोटे व्यापारियों को शून्य एमडीआर की पेशकश करके प्रोत्साहन जारी रखा जा सकता है। यूपीआई पी2पी पर शून्य शुल्क जारी रखा जा सकता है।’
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उन्होंने बताया ‘बड़े व्यापारियों के लेनदेन की प्रकिया के लिए सरकार को करदाताओं के पैसे से हमें क्यों प्रोत्साहित करना चाहिए? यूपीआई का भारत के सबसे पसंदीदा भुगतान विकल्प के रूप में दबदबा है और प्रत्येक व्यापारी यूपीआई की पेशकश जारी रखेगा, भले ही प्रक्रिया शुल्क के रूप में केवल 30 आधार अंक का भुगतान किया जाए क्योंकि वे वैसे भी क्रेडिट कार्ड और अन्य विकल्पों के लिए 2 प्रतिशत का भुगतान कर रहे हैं।’
जनवरी 2020 के बाद से डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए रुपे डेबिट कार्ड और भीम-यूपीआई लेनदेन के लिए एमडीआर को शून्य कर दिया गया था।