बजट

सरकार की रणनीति समझिए, बजट में छिपा है बड़ा संदेश

बैंकिंग से लेकर किसान और इंडस्ट्री तक, बजट 2026 की असली तस्वीर रिपोर्ट के जरिए समझिए

Published by
बीएस वेब टीम   
Last Updated- February 02, 2026 | 3:28 PM IST

बजट का दिन सिर्फ आंकड़ों और घोषणाओं तक सीमित नहीं होता। यह वह लम्हा होता है, जब सरकार देश को यह बताती है कि आने वाले सालों में भारत की दिशा क्या होगी। इस बार का बजट भी कई बड़े सवालों के जवाब लेकर आया। क्या सरकार खर्च बढ़ाएगी। क्या निवेश को नई रफ्तार मिलेगी। क्या बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता मिलेगी।

बजट की घोषणाओं के बाद जब सेक्टरवार असर को देखा गया, तो तस्वीर और साफ हुई। यह बजट किसी एक वर्ग के लिए नहीं है। यह एक लंबी रणनीति का हिस्सा है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, बजट में बैंकिंग से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, MSME और कृषि तक, कई सेक्टरों को अलग-अलग स्तर पर समर्थन दिया गया है।

बैंकिंग सेक्टर को मिला भरोसे का संदेश

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि बजट में बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर के लिए माहौल काफी सकारात्मक है। सरकार ने विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बैंकिंग ढांचे की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाने का फैसला किया है। इसका मकसद बैंकों को ज्यादा मजबूत बनाना और भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करना है।

इसके साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड की घोषणा की गई है, जिससे बैंकों का जोखिम कम होगा और निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा। रिपोर्ट के अनुसार, इससे लंबी अवधि के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को फंडिंग मिलना आसान होगा।

Also Read: Budget 2026: आत्मविश्वास से भरपूर, मगर भविष्य की चिंताओं को लेकर सतर्क

कैपिटल मार्केट में संतुलन की कोशिश

रिपोर्ट के मुताबिक, कैपिटल मार्केट के लिए बजट में संतुलित रुख अपनाया गया है। एक तरफ म्युनिसिपल बॉन्ड्स और कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट को गहराई देने की कोशिश की गई है। दूसरी तरफ फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स बढ़ाकर सरकार ने संकेत दिया है कि सट्टेबाजी पर लगाम जरूरी है। यूनियन बैंक की रिपोर्ट मानती है कि इसका असर शॉर्ट टर्म में ट्रेडिंग पर दिख सकता है, लेकिन इससे बाजार ज्यादा स्थिर बनेगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का बड़ा दांव

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे बड़ा फोकस एरिया बनकर उभरा है। सरकार ने पूंजीगत खर्च बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। सड़क, रेलवे, फ्रेट कॉरिडोर, जलमार्ग और कोस्टल कार्गो से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई है। रिपोर्ट का कहना है कि इससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

शहरी विकास और छोटे शहरों पर नजर

रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने इस बार टियर दो और टियर तीन शहरों को विकास के नए केंद्र के तौर पर देखा है। सिटी इकोनॉमिक रीजन और शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की योजनाओं से छोटे शहरों में निवेश और रोजगार बढ़ने की संभावना है। इसका मकसद विकास को बड़े महानगरों तक सीमित न रखना है।

आईटी और टेक्नोलॉजी सेक्टर को राहत

यूनियन बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, आईटी और आईटीईएस सेक्टर के लिए बजट काफी राहत भरा है। सेफ हार्बर लिमिट बढ़ाने से टैक्स से जुड़े विवाद कम होंगे। सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की घोषणा से भारत में चिप निर्माण और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी। डेटा सेंटर्स और क्लाउड सेवाओं को दी गई टैक्स राहत को रिपोर्ट ने लंबी अवधि के लिए सकारात्मक बताया है।

टैक्स सिस्टम में सुधार की दिशा

रिपोर्ट के अनुसार, नया इनकम टैक्स एक्ट लाने का फैसला टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। TDS और TCS नियमों में ढील से आम करदाताओं और कारोबारियों की परेशानी कम हो सकती है। इससे टैक्स विवाद घटने की उम्मीद जताई गई है।

MSME, किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर फोकस

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि बजट में MSME सेक्टर और कृषि को भी खास महत्व दिया गया है। छोटे कारोबारियों के लिए ग्रोथ फंड और सस्ते कर्ज की व्यवस्था की गई है। वहीं कृषि, पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी योजनाओं के जरिए किसानों की आय बढ़ाने और जोखिम कम करने की कोशिश की गई है।

आखिर में बड़ा सवाल

यह बजट सभी को खुश करे, यह जरूरी नहीं। लेकिन यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने साफ तौर पर यह दिखा दिया है कि उसका फोकस लंबी अवधि की ग्रोथ, निवेश और रोजगार पर है। अब असली परीक्षा यह है कि ये घोषणाएं कितनी तेजी से जमीन पर उतरती हैं और आम आदमी की जिंदगी में कितना बदलाव लाती हैं।

First Published : February 2, 2026 | 3:00 PM IST