PSU Bank Stocks: सरकारी बैंकों (PSU Banks) के शेयरों में लगातार दूसरे दिन गिरावट देखने को मिली। सोमवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर दिन के कारोबार के दौरान निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स 2.4 फीसदी तक टूट गया। पिछले दो कारोबारी सत्रों में यह इंडेक्स कुल मिलाकर करीब 8 फीसदी गिर चुका है। बाजार के जानकारों के मुताबिक, हाल की तेज तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू की है, जिससे बैंकिंग शेयरों पर दबाव बना है।
व्यक्तिगत शेयरों की बात करें तो इंडियन बैंक का शेयर सोमवार को दिन के कारोबार में 4 फीसदी गिरकर 810.60 रुपये पर आ गया। बीते दो दिनों में यह शेयर 11 फीसदी टूट चुका है। इससे पहले 30 जनवरी 2026 को इंडियन बैंक का शेयर 923 रुपये के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा था। बैंक ऑफ बड़ौदा का शेयर भी करीब 3 फीसदी गिरकर 270.50 रुपये पर कारोबार करता दिखा और पिछले दो सत्रों में इसमें 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का शेयर भी 3 फीसदी गिरकर 990.20 रुपये पर आ गया। बीते दो कारोबारी दिनों में SBI के शेयर की कीमत 8 फीसदी घटी है। यह शेयर 1 फरवरी 2026 को 1,083.60 रुपये के अपने अब तक के सबसे हाई पर था।
इसके अलावा निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स में शामिल पंजाब नेशनल बैंक, यूको बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के शेयरों में भी करीब 2 फीसदी की गिरावट देखी गई। सुबह 11:28 बजे निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स करीब 2 फीसदी नीचे कारोबार कर रहा था, जबकि इसी समय निफ्टी 50 में गिरावट सिर्फ 0.48 फीसदी की थी।
हालांकि हाल के दो दिनों में गिरावट देखने को मिली है, लेकिन लंबी अवधि में सरकारी बैंकों का प्रदर्शन मजबूत रहा है। पिछले पांच महीनों में निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स करीब 21 फीसदी चढ़ा है। इसके मुकाबले इसी अवधि में निफ्टी 50 में सिर्फ 1 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है।
यह भी पढ़ें: जेफरीज, गोल्डमैन सैक्स से मोतीलाल ओसवाल तक: ब्रोकरेज हाउसेस ने बजट 2026 को कैसे किया डिकोड
केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने बैंकिंग सेक्टर को लेकर बड़े संकेत दिए हैं। सरकार ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बैंकिंग सेक्टर की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाने की योजना पर काम कर रही है। इस समिति का उद्देश्य बैंकों की मौजूदा संरचना की समीक्षा करना और भविष्य की जरूरतों के लिए उन्हें मजबूत बनाना है। इसमें छोटे सरकारी बैंकों के विलय, बैंकिंग ढांचे में सुधार और मजबूत बैलेंस शीट वाले बड़े बैंकों के निर्माण जैसे मुद्दों पर विचार किया जाएगा।
सरकार ने वित्त वर्ष 2027 के लिए डिसइनवेस्टमेंट और एसेट मोनेटाइजेशन का लक्ष्य बढ़ाकर 80,000 करोड़ रुपये कर दिया है, जो वित्त वर्ष 2026 के संशोधित अनुमान से काफी ज्यादा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए IDBI बैंक और LIC में हिस्सेदारी बिक्री जैसे बड़े सौदों पर भरोसा किया जा रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संकेत दिया है कि सरकार सभी कैबिनेट से मंजूर डिसइनवेस्टमेंट प्रस्तावों को आगे बढ़ाएगी। इसके साथ ही कुछ सरकारी बैंकों में अतिरिक्त हिस्सेदारी घटाने की भी योजना है।
ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी से बाजार की धारणा पर थोड़ा नकारात्मक असर पड़ सकता है, हालांकि इससे सट्टेबाजी पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी। वहीं, घरेलू ब्रोकर्स पर जीएसटी लागू न करने का फैसला बाजार के लिए हल्का सकारात्मक माना जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2027 में डिसइनवेस्टमेंट से ज्यादा रकम जुटाने का लक्ष्य यह संकेत देता है कि आने वाले समय में सरकारी बैंकों और LIC में बड़े स्तर पर हिस्सेदारी बिक्री की जा सकती है।