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Brokerages Budget 2026 Review: बजट 2026 के बाद शेयर बाजार अभी भी इसके बारीक पहलुओं को समझने में लगा है। 1 फरवरी को बजट वाले दिन सेंसेक्स (Sensex) 1500 अंकों से ज्यादा गिरा, जो पिछले 6 सालों में सबसे बड़ी गिरावट थी। फिलहाल, सेंसेक्स करीब 80,000 के स्तर पर निफ्टी करीब 24,800 के आसपास स्थिर हो रहा है। ज्यादातर ब्रोकरेज का मानना है कि F&O सेगमेंट में सिक्युरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाना निवेशकों के लिए कड़वा सच है, लेकिन कुल मिलाकर बजट के आंकड़े मजबूत हैं और प्रस्ताव सही दिशा में हैं। बजट में STT बढ़ोतरी से बाजार को झटका लगा लेकिन लंबे समय में फिस्कल अनुशासन और कैपेक्स पर भरोसा दिखता है। ब्रोकरेज मानते हैं कि अब बाजार की नजर कमाई की रिकवरी पर रहेगी, न कि सिर्फ बजट घोषणाओं पर।
बर्नस्टीन के अनुसार, यह बजट ज्यादा एकेडमिक रहा, जिसमें राजकोषीय घाटे में मामूली कमी, रेवेन्यू खर्च में लगातार बढ़ोतरी और कैपेक्स में मामूली बढ़त देखने को मिली। हालांकि निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई सेक्टर्स घोषणाएं की गईं, लेकिन उनमें से कई को तुरंत ग्रोथ लाने के बजाय लंबे समय में मदद करने वाली हैं।
तुरंत टैक्स बढ़ाने वाले उपायों की कमी साफ दिखी, क्योंकि सरकार पिछले साल पहले ही बड़े कदम उठा चुकी थी और वह फिस्कल कंसोलिडेशन के लिए प्रतिबद्ध है, भले ही इसकी रफ्तार धीमी हो। डेरिवेटिव्स पर STT में बढ़ोतरी ने मार्केट के सेंटिमेंट को खराब किया है, और जिस LTCG कटौती की उम्मीद थी, वह नहीं हुई, जिससे इन्वेस्टर्स और भी निराश हुए।
गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि पॉलिसी बाने वाले अभी भी तुरंत तेज ग्रोथ के बजाय आर्थिक और बाजार की मजबूती को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह बात लगातार हो रहे राजकोषीय समेकन और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने से साफ दिखती है। इसका मकसद डेरिवेटिव बाजार में अत्यधिक सट्टेबाजी को रोकना लगता है, भले ही इससे थोड़े समय के लिए शेयर बाजार की तेजी पर असर पड़े।
बजट में राजकोषीय दबाव अपेक्षाकृत कम रहा है और कैपेक्स स्थिर है, जो हमारी उम्मीदों के अनुरूप है। इससे भारतीय शेयर बाजार को लेकर हमारा सकारात्मक नजरिया बना हुआ है, क्योंकि हमें लगता है कि कमाई की ग्रोथ डबल डिजिट (मिड-टीन्स) में वापस आ सकती है। हालांकि, विदेशी निवेशकों की पहले से कमजोर भावना और STT बढ़ोतरी के अचानक फैसले के कारण कम समय में वैल्यूएशन पर जोखिम बना रह सकता है। मध्यम अवधि में हमें रणनीतिक महत्व वाले क्षेत्रों और नए इंफ्रास्ट्रक्चर में अच्छे अवसर नजर आते हैं। इनमें डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर्स, बायोटेक, ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर, न्यूक्लियर पावर और क्रिटिकल मिनरल्स शामिल हैं।
मॉर्गन स्टैनली के मुताबिक, कैपेक्स में संभावित बढ़ोतरी, सेवाओं के क्षेत्र की ग्रोथ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर जोर, साथ ही उम्मीद से थोड़ी धीमी राजकोषीय सख्ती, मिलकर FY27 की कमाई को सहारा देंगे। इसके अलावा, बायबैक के जरिए शेयरों की बढ़ती मांग से भी बाजार को समर्थन मिलेगा। हमारा फाइनेंशियल्स, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी और इंडस्ट्रियल सेक्टर पर Overweight रुख है।
जेफरीज के मुताबिक, STT में बढ़ोतरी मार्केट सेंटीमेंट के लिए नकारात्मक है। हालांकि, ऑप्शन और फ्यूचर्स के कारोबार (टर्नओवर) पर इसका असर सीमित रहने की संभावना है। जुलाई 2024 के बजट में कुल खर्च बढ़ने का जो असर पड़ा था, उससे भी ऑर्डर या भागीदारी पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ा था। उद्योग से हुई बातचीत के मुताबिक, वॉल्यूम पर करीब 5% तक असर हो सकता है। जेफरीज अनुमान है कि BSE/GROWW में ADTO या ऑर्डर में 5% की गिरावट, कमाई पर करीब 4% असर डाल सकती है।
इसके अलावा, डेटा सेंटर ऑपरेटर और कैपेक्स से जुड़े सेक्टर जैसे पावर इक्विपमेंट, कूलिंग सिस्टम देने वाली कंपनियां, रियल एस्टेट कंपनियां, डेटा सेंटर से जुड़ी नीतियों के कारण अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पाने वाले होंगे। डेटा सेंटर के लिए टैक्स में छूट (लोधा के लिए सकारात्मक) और GCCs के लिए सेफ हार्बर नियमों में राहत (REITs को फायदा) मुख्य लाभार्थी हैं।
सोने की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के चलते गोल्ड पर ड्यूटी बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन इसमें कोई बदलाव न होना राहत की बात है। PSU बैंकों के लिए M&A की घोषणा और FDI सीमा 20% से बढ़ाने की उम्मीद थी। चूंकि बजट में इन मुद्दों पर कुछ नहीं कहा गया, इसलिए इसे भावनात्मक रूप से नकारात्मक माना जा सकता है।
फ्रेंकलिन टेम्प्लटन का कहना है कि फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ने से मार्केट वॉल्यूम पर नकारात्मक असर पड़ने की संभावना है। इसका असर स्टॉक एक्सचेंज और ब्रोकर्स की आय पर भी पड़ेगा। हालांकि आर्थिक वृद्धि और महंगाई की स्थिति संतुलित दिख रही है, लेकिन FY27 में ज्यादा उधारी के कारण बॉन्ड यील्ड पर दबाव बना रह सकता है। डेट सेगमेंट में निवेश करने वाले निवेशकों को अक्रूअल आधारित शॉर्ट ड्यूरेशन रणनीतियों और एक्टिव तरीके से मैनेज की गई ड्यूरेशन रणनीतियों से फायदा मिल सकता है।
लॉन्ग टर्म इक्विटी निवेशक फ्लेक्सी-कैप, मल्टी-कैप, मल्टी-फैक्टर, लार्ज और मिड-कैप इक्विटी फंड जैसी डायवर्सिफाइड स्ट्रैटेजी में निवेश बनाए रख सकते हैं। जो निवेशक उतार-चढ़ाव के समय कम जोखिम के साथ स्थिर रिटर्न चाहते हैं, वे मल्टी एसेट एलोकेशन या बैलेंस्ड एडवांटेज फंड जैसे हाइब्रिड विकल्प चुन सकते हैं, ताकि अलग-अलग एसेट क्लास में जोखिम संतुलित किया जा सके।
मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक, कुल मिलाकर बजट के आंकड़े व्यवहारिक और संभव नजर आते हैं। हमें उम्मीद है कि बाजार जल्द ही बजट को पचा लेगा और उसका ध्यान कॉरपोरेट कमाई की ग्रोथ पर चला जाएगा। FY25 से FY27 के दौरान निफ्टी की कमाई में करीब 12 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। फिलहाल निफ्टी का वैल्यूएशन 20.4 गुना है, जो लंबी अवधि के औसत (20.8 गुना) से थोड़ा कम है।
ब्रोकरेज की ऑटो, डाइवर्सिफाइड फाइनेंशियल्स, टेक्नोलॉजी, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी और EMS पर ओवरवेट रेटिंग है। वहीं, PSU बैंक, हेल्थकेयर, कैपिटल गुड्स, इंफ्रा और सीमेंट को न्यूट्रल रखा है। अंडरवेट सेक्टर्स में प्राइवेट बैंक, FMCG (स्टेपल्स), ऑयल एंड गैस, यूटिलिटीज और मेटल्स हैं।