केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट में एक अप्रत्याशित कदम के तहत वायदा और विकल्प (एफ ऐंड ओ) खंडों के सौदों पर प्रतिभूति लेन देन कर में इजाफा करने की घोषणा की। बढ़ा हुआ कर 1 अप्रैल से लागू होगा। इन करों में वर्ष 2024 के बाद दूसरी बार बढ़ोतरी की गई है। इसका मकसद खुदरा निवेशकों के बढ़ते घाटे के दौर में अत्यधिक सट्टेबाजी पर अंकुश लगाना है। सट्टेबाजी के कारण व्यापार की मात्रा घटी है। इसके अलावा कर लगाए जाने से कर संग्रह भी बढ़ेगा।
वायदा अनुबंधों पर एसटीटी 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया गया है। विकल्प (ऑप्शंस) सौदों के तहत ऑपशन प्रीमियम पर कर 0.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत होगा। लेकिन ऑप्शन की खरीद-बेच पर शुल्क निहित मूल्य के 0.125 प्रतिशत से बढ़कर 0.15 प्रतिशत होगा।
एसटीटी दरों में आखिरी बार इजाफा 2024 के केंद्रीय बजट में किया गया था। सरकार का अनुमान है कि वित्त वर्ष 27 में एसटीटी संग्रह 73,700 करोड़ रुपये रह सकता है।
वित्त वर्ष 2026 के लिए बजट अनुमान अब तक का सबसे अधिक 78,000 करोड़ रुपये था जबकि संशोधित अनुमान 63,670 करोड़ रुपये है। बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कारोबार में गिरावट आने के कारण अत्यधिक सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए ट्रेडिंग के नियमों को सख्त किया। इससे इस वित्त वर्ष में एसटीटी संग्रह पर असर पड़ा। वित्त वर्ष 2024 में वास्तविक एसटीटी संग्रह 52,197 करोड़ रुपये था।
वित्त मंत्री ने बजट घोषणाओं के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘हम केवल एफ ऐंड ओ के लेन देन पर एसटीटी में बदलाव कर रहे हैं। लेकिन अन्य लेन देन के एसटीटी पर कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। दरअसल सट्टेबाजी की स्थिति में अत्यधिक जोखिम भरी हो सकती है और निवेशकों को नुकसान पहुंचा सकती है। यह मामूली वृद्धि अत्यधिक सट्टेबाजी को हतोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई है।’
राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने कहा, ‘आप एफऐंडओ के लेन देन की मात्रा पर नजर डालिए। इसकी तुलना जब सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) या अंतर्निहित प्रतिभूति के बाजार से करते हैं तो यह भारी सट्टेबाजी के दायरे में आती है। इसके चलते छोटे और नौसिखिया निवेशकों को नुकसान होता है। सरकार का ध्येय सट्टेबाजी की प्रवृत्तियों को हतोत्साहित करना है।’
कैलेंडर वर्ष 2025 में कारोबार गिरकर 391 लाख करोड़ रुपये रह गया जबकि यह कैलेंडर वर्ष 2024 में 490 लाख करोड़ रुपये था। इस गिरावट का मुख्य कारण साप्ताहिक सेटलमेंट को सीमित करना और अनुबंधों का आकार बढ़ाना था। सेबी की एक पुरानी रिपोर्ट के अनुसार एफऐंडओ खंड में 93 प्रतिशत से अधिक व्यक्तिगत ट्रेडरों को नुकसान उठाना पड़ा था।
एनएसई के एमडी और सीईओ आशिष कुमार चौहान ने कहा, ‘बजट में सुनियोजित उपायों के जरिए वित्तीय बाजारों को और मजबूत किया गया है। इसके तहत अत्यधिक सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए डेरिवेटिव पर ज्यादा एसटीटी, रीट के माध्यम से सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की परिसंपत्तियों से राजस्व जुटाना, बॉन्ड इंडेक्स डेरिवेटिव की शुरुआत और कॉरपोरेट बॉन्ड के लिए मजबूत बाजार-निर्माण ढांचे को अपनाया गया है।’
बीएसई के एमडी व सीईओ सुंदररमन राममूर्ति ने कहा, ‘एसटीटी का पुनर्समायोजन निवेशकों को दीर्घकालिक इक्विटी भागीदारी पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित करने के लिहाज से तैयार किया गया है। इससे बेहतर नकदी और अधिक टिकाऊ बाजार गतिशीलता को बढ़ावा मिलेगा।’ इस घोषणा के बाद बाजार अवसंरचना संस्थानों (एमआईआई) और स्टॉक ब्रोकरेज के शेयरों में ट्रेडिंग गतिविधियों में कमी आने की आशंका के चलते भारी गिरावट आई।
बीएसई का शेयर 8 प्रतिशत गिरकर 2,570 रुपये पर बंद हुआ। सीडीएसएल के शेयर में 6.7 प्रतिशत की गिराटव आई। एनएसडीएल का शेयर 1.6 प्रतिशत गिरा। साथ ही, ब्रोकरों के शेयरों पर भी दबाव आया।