रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव | फाइल फोटो
Railway Budget 2026: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज अपने बजट भाषण में 7 हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की जो घोषणा की है, उस पर लगभग 16 लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा। उन्होंने कहा कि उनका मंत्रालय अगले कुछ महीनों में एक विस्तृत योजना तैयार करेगा।
मंत्री ने कहा कि इन 7 हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के निर्माण के लिए विस्तृत योजना में स्वदेशीकरण के बढ़ते स्तर पर ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह काम फिलहाल निर्माणाधीन पहले कॉरिडोर के मुकाबले काफी तेजी से होने की संभावना है।
वैष्णव ने यहां एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘देश ने पहले मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के दौरान बहुत कुछ सीखा है। आज हमारे इंजीनियरों को सिविल, ओवरहेड उपकरण, सिग्नलिंग सिस्टम, रोलिंग स्टॉक, स्टेशन निर्माण और अन्य प्रौद्योगिकियों की समझ है। यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है। हमें उस अनुभव के आधार पर आगे बढ़ना होगा।’
सरकार ने एक सफल हाई-स्पीड कॉरिडोर के निर्माण के लिए आवश्यकताओं को मानकीकृत करने में काफी काम किया है, और विस्तृत योजना पर काम करते समय वह इस सवाल पर विचार करेगी कि क्या वह पूरी तरह से स्वदेशी (फंडिंग और मैन्युफैक्चरिंग सहित) होना चाहती है।
वैष्णव ने संवाददाताओं से बातचीत के दौरान बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘मुंबई-अहमदाबाद के बीच पहले कॉरिडोर के निर्माण के दौरान देश ने काफी कुछ सीखने की कोशिश की है। आज हमारे इंजीनियर प्रौद्योगिकी- सिविल, ओवरहेड इक्विपमेंट, सिग्नलिंग सिस्टम, रोलिंग स्टॉक, स्टेशन कंस्ट्रक्शन आदि को बेहतर तरीके से समझते हैं। यह एक महत्त्वपूर्ण बदलाव है। हमें उस अनुभव पर आगे बढ़ना होगा।’
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सरकार ने एक सफल हाई स्पीड कॉरिडोर बनाने की जरूरतों का मानकीकरण करने की दिशा में काफी काम कर लिया है। विस्तृत योजना तैयार होने पर सरकार इस बात पर विचार करेगी कि क्या वह पूरी तरह से स्वदेशी (वित्त पोषण एवं विनिर्माण सहित) बनना चाहती है।
पहला कॉरिडोर जापान इंटरनैशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) के सहयोग से बनाया जा रहा है। वह इस परियोजना की 80 फीसदी से अधिक लागत का वित्तपोषण कर रही है। यह परियोजना करीब एक दशक पहले शुरू हुई थी। शुरुआती देरी के कारण इसकी परियोजना लागत अब करीब 2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ गई है। वैष्णव ने कहा कि नए कॉरिडोर निर्बाध आवागमन को सक्षम बनाने के लिए पूरी तरह से एलिवेटेड होंगे।
उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत में चेन्नई-बेंगलूरु-हैदराबाद हाई स्पीड नेटवर्क एक साउथ हाई स्पीड ट्रायंगल (या डायमंड) बनाएगा जो प्रमुख आर्थिक एवं आईटी केंद्रों को जोड़ेगा। मंत्री ने कहा कि सभी 7 कॉरिडोर पर काम एक साथ होगा।
वैष्णव ने कहा कि बुलेट ट्रेन का सबसे जटिल पहलू प्रोपल्शन सिस्टम है और भारत ने इसे स्वदेशी बनाने के लिए बहुत काम किया है। उन्होंने कहा, ‘भारत में डिजाइन एवं विनिर्मित प्रोपल्शन सिस्टम अब अमेरिका, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, फ्रांस और स्पेन सहित तमाम प्रमुख देशों को निर्यात किए जा रहे हैं।’
ईवाई इंडिया के पार्टनर और इन्फ्रास्ट्रक्चर लीडर कुलजीत सिंह ने कहा, ‘इन कॉरिडोर पर निवेश वित्त वर्ष 2027 में पूरे बुनियादी ढांचा क्षेत्र के लिए प्रस्तावित 12.2 लाख करोड़ रुपये के वार्षिक पूंजीगत व्यय से अधिक है। यह निर्माण एवं अन्य रेलवे बुनियादी ढांचा सेवा कंपनियों के लिए बेहद सकारात्मक खबर है।’
वैष्णव ने कहा कि पश्चिम बंगाल के दानकुनी को गुजरात के सूरत से जोड़ने वाला नया डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से होकर गुजरेगा। यह कॉरिडोर अपने मार्ग के आसपास आर्थिक उत्पादन को बढ़ावा देगा।
मंत्री ने कहा, ‘यह 2,052 किलोमीटर का कॉरिडोर मौजूदा वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के साथ एकीकृत होगा। इससे पश्चिमी तट के बंदरगाहों तक वस्तुओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो सकेगी।’