facebookmetapixel
Advertisement
US-Iran Talks: परमाणु जिद या सख्त शर्तें, 21 घंटे बाद भी क्यों नहीं बनी डील; किन कारणों से बिगड़ी बातचीतबारिश के बाद अब तपेगा देश! IMD का अलर्ट, इन राज्यों में हीटवेव का कहर; जानें कब और कहां बढ़ेगी सबसे ज्यादा गर्मीUS-Iran War: ईरान से डील फेल! 21 घंटे की बातचीत बेनतीजा, खाली हाथ लौटे वेंस; क्या अब बढ़ेगा युद्ध का खतरा?अमेरिका और ईरान के बीच सीधी वार्ता शुरू, इस्लामाबाद में जेडी वेंस और घालिबाफ आमने-सामने: रिपोर्टशहबाज शरीफ और जनरल आसिम मुनीर से मिला ईरानी डेलीगेशन, इस्लामाबाद पर टिकी दुनिया की नजरेंडीजल और हवाई ईंधन पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी, पेट्रोल पर टैक्स में कोई बदलाव नहींFixed Deposit interest rates 2026: 444 दिन की जमा पर मिलेगा 6.6% तक ब्याज, ये बैंक दे रहे मौकाStock Market Next Week: अगले हफ्ते इस दिन बंद रहेगा मार्केट, कैलेंडर चेक कर करें अपनी प्लानिंग!UPI पर चार्ज लगा तो 75% लोग इस्तेमाल कर देंगे बंद! सर्वे में सामने आई डिजिटल इंडिया की नई चुनौती1 शेयर के बदले मिलेंगे 10 शेयर! पशुपति कॉटस्पिन करने जा रही स्टॉक स्प्लिट, रिकॉर्ड डेट अगले हफ्ते

मझोले व छोटे शहरों के लिए ₹5,000 करोड़ का फंड, आर्थिक क्षेत्रों के रूप में विकसित होंगे शहर

Advertisement

इसके लिए चैलेंज मोड के जरिये हरेक शहर के आर्थिक क्षेत्र (सीईआर) को पांच साल के लिए 5,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं

Last Updated- February 02, 2026 | 8:48 AM IST
Urban Development
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट 2026 में शहर-आधारित विकास के लिए बड़ा कदम उठाया। उन्होंने मझोले औऱ छोटे शहरों के विकास के लिए वित्तीय सहायता की घोषणा की। सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा कि सरकार ने सुधार करके नतीजे दिखाने के आधार पर वित्त प्रबंधन की प्रणाली आएगी। इसके लिए चैलेंज मोड के जरिये हरेक शहर के आर्थिक क्षेत्र (सीईआर) को पांच साल के लिए 5,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।

मंत्री ने कहा, ‘शहर भारत के विकास, नवाचार और अवसरों के इंजन हैं। अब हम मझोले और छोटे शहरों और यहां तक कि मंदिर वाले शहरों पर भी ध्यान देंगे, जिन्हें आधुनिक बुनियादी ढांचे और मूलभूत सुविधाओं की जरूरत है।’जैसे-जैसे भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर बढ़ रहा है, कम विकसित शहरों पर ध्यान देने वाली सरकारी नीति से देश भर में समान विकास सुनिश्चित होगा।

सीतारमण ने कहा कि बजट 2026-27 का लक्ष्य शहरों की क्षमता बढ़ाना है ताकि उनके खास विकास के संचालकों के आधार पर सीईआर की मैपिंग की जा सके। उन्होंने कहा कि भारत को 5 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों (यानी मझोले और छोटे शहरों) में बुनियादी ढांचा विकसित करने पर ध्यान देना जारी रखना चाहिए, क्योंकि वे अब वृद्धि के केंद्र बन गए हैं।

सीतारमण ने कहा, ‘पिछले एक दशक में हमारी सरकार ने सार्वजनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को बड़े पैमाने पर बेहतर बनाने के लिए कई पहल की हैं। इनमें इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनविट) और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (रीट्स) जैसी नई वित्तीय योजनाओं और नैशनल इन्वेस्टमेंट ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआईआईएफ) तथा नैशनल बैंक फॉर फाइनैंसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर ऐंड डेवलपमेंट (नाबार्ड) जैसे संस्थान शामिल हैं।’

विश्लेषकों का कहना है कि सार्वजनिक पूंजीगत खर्च में लगातार वृद्धि और सीईआर पर जोर देने से महानगरों से दूर ज्यादा संतुलित और परिणाम-केंद्रित शहरी विकास को बढ़ावा दिए जाने की सरकार की मजबूत इच्छा शक्ति का पता चलता है। एनईसी कॉरपोरेशन इंडिया के अध्यक्ष और मुख्य कार्याधिकारी आलोक कुमार ने कहा, ‘इन शहरों की

असरदार क्षमता इस बात पर निर्भर करेगी कि फिजिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर को इंटेलिजेंट डिजिटल सिस्टम से कितनी अच्छी तरह मदद मिलती है। जैसे-जैसे क्षेत्रीय शहर बढ़ेंगे, सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, इमरजेंसी रिस्पॉन्स और डेटा-आधारित शासन के लिए एकीकृत प्लेटफॉर्म बड़े पैमाने पर विश्वसनीयता, दक्षता एवं  जवाबदेही के लिए महत्त्वपूर्ण होंगे।’

शहरों को आर्थिक क्षेत्रों के तौर पर विकसित करने पर जोर देना 2025-26 की आर्थिक समीक्षा में दी गई सिफारिशों के मुताबिक है।

Advertisement
First Published - February 2, 2026 | 8:48 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement