facebookmetapixel
पूर्व सेना प्रमुख नरवणे के अप्रकाशित संस्मरणों पर हंगामा, लोकसभा की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगितबैंकिंग सुधार समिति की रूपरेखा जल्द, बीमा में 100% FDI को वैश्विक दिलचस्पी: एम नागराजूविनिवेश की रफ्तार से बनेगा राजस्व का रास्ता, बजट के बाद बोलीं निर्मला सीतारमणAir India के बोइंग 787 में ईंधन नियंत्रण स्विच में खामी, लंदन-बेंगलूरु उड़ान रोकी गईEditorial: संघीय संतुलन, राज्यों की हिस्सेदारी और राजकोषीय अनुशासन की कठिन कसौटीबजट 2026-27: कर प्रोत्साहन और सख्त राजकोषीय गणित ने विकास अनुमानों की परीक्षा लीबजट 2026-27: राजकोषीय मजबूती के आंकड़ों के पीछे की कहानी और बाकी बड़े सवालबजट में बढ़ी बाजार उधारी से बॉन्ड यील्ड ऊपर, डेट म्युचुअल फंड निवेशकों को रणनीति बदलने की जरूरतSTT बढ़ाकर ₹73,700 करोड़ जुटाने का लक्ष्य, लेकिन F&O वॉल्यूम घटने से अनुमान पर उठे सवालF&O पर बढ़ा STT: आर्बिट्राज फंडों के रिटर्न पर 30-50 आधार अंक का दबाव

जनवरी में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में हल्की रिकवरी, नए ऑर्डर में तेजी से PMI सुधरकर 55.4 पर

नए ऑर्डर्स में तेजी से मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में सुधार, लेकिन कारोबारी भरोसा साढ़े तीन साल के निचले स्तर पर

Last Updated- February 02, 2026 | 12:34 PM IST
India January Manufacturing PMI
Representational Image

India January Manufacturing PMI: जनवरी में भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की गतिविधियों में हल्का सुधार देखा गया। यह सुधार नए ऑर्डर्स में तेजी के चलते हुआ। हालांकि, बिजनेस कॉन्फिडेंस पिछले साढ़े तीन साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। मंथली सर्वे में यह जानकारी सामने आई है। सीजनली एडजस्टेड HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) दिसंबर में दो साल के निचले स्तर 55 से बढ़कर जनवरी में 55.4 पर पहुंच गया। PMI के टर्म, 50 से ऊपर का आंकड़ा ग्रोथ और 50 से नीचे का आंकड़ा गिरावट को दिखाता है।

HSBC की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजल भंडारी ने कहा, “जनवरी में भारतीय मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में सुधार देखने को मिला। नए ऑर्डर्स, उत्पादन और रोजगार में बढ़ोतरी हुई। इनपुट लागत में मामूली बढ़ोतरी हुई, जबकि फैक्ट्री-गेट कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी रही, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर थोड़ा दबाव पड़ा।” सर्वे में शामिल कंपनियों ने बताया कि मांग में मजबूती, नए कारोबार में बढ़ोतरी और टेक्नोलॉजी में निवेश ने उत्पादन को सहारा दिया।

घरेलू मांग से बिक्री को सहारा

कुल बिक्री को सबसे ज्यादा सहारा घरेलू बाजार से मिला। हालांकि निर्यात ऑर्डर्स में भी बढ़ोतरी हुई, लेकिन उसकी रफ्तार धीमी रही। जिन कंपनियों को निर्यात में बढ़त मिली, उन्होंने
एशिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूरोप और मिडिल ईस्ट से बढ़ी मांग का जिक्र किया। रोजगार के मोर्चे पर, मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों ने अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती जारी रखी, लेकिन नौकरी बढ़ने की रफ्तार मामूली रही। यह पिछले तीन महीनों में सबसे तेज रही।

बिजनेस कॉन्फिडेंस कमजोर

जनवरी में बिजनेस कॉन्फिडेंस साढ़े तीन साल के निचले स्तर पर आ गया। सिर्फ 15 प्रतिशत कंपनियों को अगले एक साल में उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है, जबकि 83 प्रतिशत कंपनियों ने कोई बदलाव नहीं होने का अनुमान जताया। भंडारी ने कहा कि नए ऑर्डर्स में तेजी के बावजूद, बिजनेस कॉन्फिडेंस कमजोर बना हुआ है और भविष्य के उत्पादन को लेकर उम्मीदें जुलाई 2022 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं।

कीमतों के मोर्चे पर, इनपुट कीमतें पिछले चार महीनों में सबसे ज्यादा बढ़ीं लेकिन आउटपुट कीमतों की महंगाई 22 महीनों के निचले स्तर पर आ गई। सर्वे में कहा गया कि हालांकि कंपनियों ने कीमतें बढ़ाईं, लेकिन महंगाई की दर सीमित रही और लगभग दो साल में सबसे कमजोर रही। कई कंपनियों ने बताया कि बेहतर दक्षता, लागत नियंत्रण और बाजार में प्रतिस्पर्धा के कारण वे कीमतें ज्यादा नहीं बढ़ा सकीं।

PMI कैसे होता है तैयार

HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI को S&P Global तैयार करता है। यह सर्वे करीब 400 मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के परचेजिंग मैनेजर्स से लिए गए जवाबों पर आधारित होता है। कंपनियों का चयन सेक्टर और कर्मचारियों की संख्या के आधार पर किया जाता है, ताकि GDP में उनके योगदान को सही तरह से दिखाया जा सके।

First Published - February 2, 2026 | 12:34 PM IST

संबंधित पोस्ट