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Budget 2026: समावेशी विकास के साथ अर्थव्यवस्था को धार, ₹12.2 लाख करोड़ के पूंजीगत खर्च से दौड़ेगी इकोनॉमी

वित्त मंत्री और वरिष्ठ सचिवों द्वारा बजट के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है

Last Updated- February 02, 2026 | 6:35 AM IST
Nirmala Sitharaman
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में बजट पेश करने से पहले | फोटो: PTI

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करने के बाद वित्तीय सेवाओं के विभाग के सचिव एम नागराजू, दीपम सचिव अरुणीश चावला, आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर और राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव के साथ बजट की बारीकियों पर संवाददाताओं से बात की…

बजट के पीछे के विचार पर

सीतारमण: हम वृद्धि की गति बनाए रखने का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे रहे हैं। हम ढांचागत सुधारों के साथ ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर ध्यान दे रहे हैं जिससे उत्पादकता बढ़ाने और रोजगार पैदा करने का माहौल तैयार हो सके। हम सुनिश्चित कर रहे हैं कि प्रौद्योगिकी का फायदा आम लोगों को मिले और समावेशी विकास को बढ़ावा मिले।

पूंजीगत व्यय पर

सीतारमण: कोविड महामारी के बाद सार्वजनिक पूंजीगत खर्च बढ़ाकर हमने जो गति हासिल की है, वह आगे भी जारी रहेगी। हमने इस बार 12.2 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च का प्रस्ताव किया है, जो बीते 10 साल में सबसे अधिक है। यह सकल घरेलू उत्पाद का 4.4 फीसदी है।

बैंकिंग सुधारों पर समिति

नागराजू: बैंकिंग से जुड़े कई पहलू हैं, जिनमें जीडीपी के अनुपात में कम ऋण, बैंकिंग नेटवर्क का विस्तार आदि शामिल हैं। इस क्षेत्र में कामकाज करने की रूपरेखा होगी और हम हितधारकों से सलाह लेंगे।

विनिवेश व परिसंपत्ति मुद्रीकरण

चावला: हम विनिवेश और परिसंपत्ति मुद्रीकरण के लिए मिली-जुली रणनीति अपनाते हैं। इसके लिए महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है और इस दिशा में उचित तरीके से आगे बढ़ रहे हैं। हम दोनों लक्ष्यों को तार्किक अंजाम तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

ठाकुर: हमारे पास परिसंपत्ति मुद्रीकरण की पुख्ता योजना होगी। हमें उम्मीद है कि हमें उससे फायदा मिलेगा।

प्रतिभूति लेनदेन कर बढ़ाने पर

श्रीवास्तव: वायदा और विकल्प में कारोबार सट्टेबाजी की चपेट में है जिससे छोटे खुदरा और अनुभवहीन निवेशकों को नुकसान होता है। सरकार का इरादा सट्टेबाजी की प्रवृत्ति को हतोत्साहित करना है और प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) में वृद्धि मुख्य रूप से उसी दिशा में है। हालांकि इस बढ़ोतरी के बाद भी, वहां होने वाले लेनदेन की भारी मात्रा को देखते हुए एसटीटी की दरें कम ही रहेंगी।  

वैश्विक अनिश्चितता पर

सीतारमण: वैश्विक अनिश्चितता एक ऐसा मसला है जो बजट बनाते समय अधिकारियों के दिमाग में जरूर रहता है, लेकिन मैं इसे किसी एक कदम का कारण नहीं मानूंगी। वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता कई वजहों से असर डाल रही है, और हम इस पर ध्यान दे रहे हैं। वैश्विक अनिश्चितताएं वास्तव में इतनी बड़ी हैं जैसी हमने पहले कभी नहीं देखीं। इसलिए स्वाभाविक रूप से, हमें खुद ही यह आकलन करना पड़ा कि वे किन-किन तरीकों से असर डाल रही हैं।

पुनर्खरीद यानी बायबैक पर

श्रीवास्तव: यह कोई अतिरिक्त कर नहीं है, यह एक राहत है। पुनर्खरीद कर प्रणाली को बदलकर इसे लाभांश आय बना दिया गया था, जो शेयरधारक के मद में आयकर के रूप में लागू होता था। अब इसे ठीक कर दिया गया है, और हमने इसे शेयरधारकों के लिए पूंजीगत लाभ कर के तौर पर रखा है, जो दीर्घकालिक अवधि के लिए सिर्फ12.5 फीसदी होगा। प्रवर्तकों के लिए जो बदलाव किया गया है, वह उन पर अतिरिक्त पुनर्खरीद कर है, जिससे उनके लिए चीजें पहले जैसी ही रहेंगी।

सरकारी उधारी पर

ठाकुर: हमें नहीं लगता कि उधारी ज्यादा है। शुद्ध बाजार उधारी में वह 5.5 लाख करोड़ रुपये भी शामिल हैं जिन्हें इस साल चुकाना है। हमारे पास इसे प्रबंधित करने की योजना है।  

कर से जुड़े मुकदमों को रोकने के उपायों पर

श्रीवास्तव: प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह के कर पर, ‘जुर्माने’ की जगह ‘अतिरिक्त राशि’ इस्तेमाल करने की घोषणा को माफी योजना के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। जुर्माना लगने से जुड़ा नकारात्मक तत्व करदाता के लिए इस पर विवाद करने की स्थिति पैदा करता है। हम करदाता को यह मौका दे रहे हैं कि अगर आप जुर्माने के बजाय अपनी शुल्क देने को तैयार हैं, तो उतनी ही रकम अतिरिक्त राशि के तौर पर दी जा सकती है।

व्यक्तिगत आयकर के मामले में, अगर आप मांग को मानने और अपील न करने के लिए तैयार हैं, तो आपको 50फीसदी जुर्माना नहीं देना होगा। हमने इस सुविधा को बढ़ाया है और इसमें गलत रिपोर्टिंग के मामलों को भी शामिल किया है, जहां जुर्माना आमतौर पर 200 फीसदी होता है। ये दो जरूरी मौके या सुविधाएं असल में उन स्थितियों का ध्यान रखने के लिए हैं, इसीलिए एक ईमानदार करदाता का हवाला दिया गया है।

डेटा केंद्र पर

श्रीवास्तव: इसमें सोच यह है कि क्लाउड आधारित डेटा सेवाएं देने वाली वैश्विक कंपनी पूरी दुनिया में डेटा केंद्रों का इस्तेमाल करती है। यह पता लगाना बहुत मुश्किल है कि किस डेटा केंद्र से किस तरह का राजस्व मिला है। हमने जो इंतजाम किया है, वह सिर्फ इसलिए है ताकि वह कंपनी भारत में डेटा सेवा केंद्र बनाए और हम इसे दुनिया भर में सेवा देने के लिए कई केंद्रों में से एक के तौर पर इस्तेमाल करें, तो यह अनिश्चितता का कारण न बने।

स्वाभाविक रूप से, जो डेटा सेवा केंद्र भारत में है, उस पर उसकी स्थिति के हिसाब से कर लगेगा। हम जिस चीज को कर से बाहर रख रहे हैं, वह वैश्विक कंपनी है जो असल में दुनिया भर में डेटा सेवा केंद्रों का इस्तेमाल करके क्लाउड आधारित सेवाएं दे रही है। हम नहीं चाहते कि ऐसी वैश्विक सेवाएं देने के लिए भारत में अपने कारोबार को बढ़ाने से उसे रोका जाए।

कर में बढ़ोतरी पर

श्रीवास्तव: इन सभी सुधारों के साथ हम उम्मीद करते हैं कि कर में वृद्धि अर्थव्यवस्था की वृद्धि से ज्यादा तेज होगी। हमें उम्मीद है कि आने वाले साल में कर राजस्व काफी अच्छा रहेगा।

First Published - February 2, 2026 | 6:35 AM IST

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