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Budget 2026: बुनियादी ढांचे पर ₹12.21 लाख करोड़ का दांव, क्या रफ्तार पकड़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था?

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बजट में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं हेतु पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर आर्थिक विकास की गति को तेज करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है

Last Updated- February 02, 2026 | 6:57 AM IST
capital expenditure
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

पिछले कुछ वर्षों में सार्वजनिक निवेश-आधारित वृद्धि मॉडल की सफलता से प्रेरणा लेते हुए, वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट ने बुनियादी ढांचा परिसंपत्तियों के निर्माण पर अधिक ध्यान देने सहित प्रमुख क्षेत्रों में सरकार के पूंजीगत व्यय को और आगे बढ़ाने की मांग की है।

बजट में वर्ष 2026-27 के लिए सरकार का प्रभावी पूंजीगत व्यय 12.21 लाख करोड़ रुपये आंका गया है, जो इस वर्ष के बजट में कुल 53.47 लाख करोड़ रुपये के व्यय का लगभग 22 प्रतिशत है, और वर्ष 2025-26 के 10.95 लाख करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से 11.5 प्रतिशत अधिक है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में अपने बजट भाषण में कहा, ‘सार्वजनिक पूंजीगत व्यय, 2014-15 में 2 लाख करोड़ रुपये से कई गुना बढ़कर 2025-26 के बजट अनुमान में 11.2 लाख करोड़ रुपये का आवंटन हो गया है। वर्ष 2026-27 में, मैं इस रफ्तार को जारी रखने के लिए इसे बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव करती हूं।’ इस वर्ष के बजट दस्तावेजों में साझा किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि सरकार का पूंजीगत व्यय वर्ष 2022-23 में 7.4 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2023-24 में 9.5 लाख करोड़ रुपये, वर्ष 2024-25 में 10.5 लाख करोड़ रुपये और 2025-26 के संशोधित अनुमान में 11.0 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

दो बुनियादी ढांचा क्षेत्र मसलन सड़कें एवं राजमार्ग और रेलवे, अकेले ही 6.0 लाख करोड़ रुपये से अधिक के इस सार्वजनिक निवेश में बड़ी हिस्सेदारी के लिए जिम्मेदार हैं, जो बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के रूप में संपत्ति निर्माण के माध्यम से आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के इरादे को जाहिर करता है।

यह भी पढ़ें | Budget 2026: समावेशी विकास के साथ अर्थव्यवस्था को धार, ₹12.2 लाख करोड़ के पूंजीगत खर्च से दौड़ेगी इकोनॉमी

बजट में रेल मंत्रालय के मद के तहत वर्ष 2026-27 के लिए राजस्व व्यय के रूप में 2.92 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं जबकि वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान में 2.65 लाख करोड़ रुपये का व्यय आंका गया है जो 10 प्रतिशत की वृद्धि है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग क्षेत्र के लिए भी यही कहानी है, जिसे इस वर्ष के बजट 2026-27 में 3.09 लाख करोड़ रुपये का भारी आवंटन मिला है जो वर्ष 2025-26 के लिए 2.87 लाख करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से 7.6 प्रतिशत अधिक है। इसमें हैरानी की बात नहीं है कि सीतारमण ने अपने बजट भाषण में ‘बुनियादी ढांचे को भरपूर समर्थन देने’ के कार्य को आर्थिक वृद्धि को रफ्तार देने और उसे बनाए रखने के लिए सरकार के ‘कर्तव्य’ के प्रमुख स्तंभों में से एक बताया।

यह जोर अगले वित्त वर्ष (2026-27) के लिए उनके द्वारा बताई गई कई विशेष पहलों में शामिल है जिसमें उच्च मूल्य वाले निर्माण एवं बुनियादी ढांचा उपकरण (सीआईई) के घरेलू विनिर्माण के लिए एक योजना और 200 पुराने औद्योगिक समूहों में बुनियादी ढांचे का उन्नयन शामिल है। उन्होंने कहा, ‘पिछले दशक के दौरान हमारी सरकार ने सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के बड़े पैमाने पर संवर्धन के लिए कई पहल की हैं, जिसमें बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट (इनविट्स) और रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (रिट्स) जैसी नई फंडिंग योजनाओं और एनआईआईएफ और एनएबीएफआईडी जैसे संस्थान शामिल हैं।’

निर्मला सीतारमण ने यह भी कहा कि सरकार 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों, जिन्हें मझोले शहर और छोटे शहर कहा जाता है, उनमें भी बुनियादी ढांचे के विकास पर अपना जोर देना जारी रखेगी जिनका वृद्धि केंद्रों के तौर पर विस्तार हुआ है।

वित्त मंत्री सीतारमण द्वारा आज परमाणु ऊर्जा, बैटरी ऊर्जा भंडारण और कार्बन कैप्चर, उपयोगिता एवं भंडारण (सीसीयूएस) जैसे क्षेत्रों में की गई कुछ बड़ी घोषणाओं में सार्वजनिक निवेश पर पूरा ध्यान दिए जाने की बात परिलक्षित हुई।

बजट ने परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आवश्यक वस्तुओं के आयात पर बुनियादी सीमा शुल्क छूट को 2035 तक बढ़ा दिया है और इसे उनकी क्षमता के बावजूद सभी परमाणु संयंत्रों के लिए विस्तारित कर दिया गया है। इसने बिजली, इस्पात, सीमेंट, रिफाइनरी और रसायन सहित पांच क्षेत्रों में पांच वर्षों में सीसीयूएस प्रौद्योगिकियों को स्थापित करने के लिए 20,000 करोड़ रुपये के परिव्यय का भी प्रस्ताव किया है।

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First Published - February 2, 2026 | 6:57 AM IST

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